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जीआईजेएन के स्वीडन में आयोजित सम्मेलन GIJC23 की झलकियां

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हाल ही में स्वीडन में सपन्न जीआईजेएन के वैश्विक सम्मेलन (#GIJC23) ने खोजी पत्रकारिता के क्षेत्र में सबसे बड़ा आयोजन कर के कीर्तिमान स्थापित किया। इससे पहले जीआईजेसी का भौतिक रूप से अंतिम आयोजन वर्ष 2019 में जर्मनी में हुआ था। इन चार वर्षों के दौरान विभिन्न घटनाक्रमों ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है। स्वाभाविक तौर पर इसका बड़ा प्रभाव पत्रकारिता पर भी पड़ा है। इन वर्षों में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी, रूस का यूक्रेन पर आक्रमण और आर्टिफिशिल इंटेलिजेंस का अचानक इतनी तेजी से विकास होना बड़े बदलाव हैं। ऐसी ही अन्य बातों का पूरी दुनिया और पत्रकारिता पर व्यापक असर पड़ा है। यह बात जीआइजेसी-23 में भी सामने आई।

इन चार वर्षों के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता पर खतरों की संख्या और तीव्रता में भी वृद्धि हुई है। इन खतरों ने अब काफी घातक रूप धारण कर लिया है। लेकिन इसकी प्रतिक्रिया भी हुई है। खोजी पत्रकारिता अब पहले से ज्यादा मजबूत और समृद्ध हो चुकी है। दुनिया भर के पत्रकार पहले से कहीं अधिक एकजुट हो चुके हैं और उनमें परस्पर सहयोग की प्रक्रिया तेज हुई है तेरहवीं ‘ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कांफ्रेंस ( 13th Global Investigative Journalism Conference) (जीआईजेसी-23) ने इसका प्रमाण दिया है। इसमें 130 से अधिक देशों के 2100 से अधिक पत्रकारों की एक रिकॉर्ड-तोड़ संख्या शामिल हुई। स्वीडन के गोथेनबर्ग में स्वेन्स्का मासन कॉन्फ्रेंस सेंटर में यह आयोजन हुआ।

इन चार दिनों में जीआइजेसी-23 के प्रतिभागी पत्रकारों को अनगनित विशेषज्ञों से बहुत कुछ सीखने को मिला। खोजी पत्रकारिता के नए तरीकों और तकनीक की जानकारी मिली। सीमापार साझेदारी के लिए नए संपर्क बनाने के अवसर मिले। प्रेस की स्वतंत्रता पर हमलों से निपटने के लिए नया साहस और ज्ञान भी मिला। क़ानूनी मामलों से लेकर पत्रकारों के खिलाफ साइबर जासूसी, कुप्रचार और जान से मारने की धमकियों का मुकाबला करने पर भी चर्चा हुई।

जीआईजेसी-23 के मुख्य वक्ता रॉन डीबर्ट (निदेशक, सिटीजन लैब) थे। उन्होंने डिजिटल हैकिंग के व्यापक और अजेय खतरों की भयावह वास्तविकता की जानकारी दी। लेकिन इससे हार मान लेने के बजाय उन्होंने पत्रकारों को एकजुट होकर एक साथ काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि हम इस खेल को ही बदल दें। हम उन ताकतों की जांच करें, जो पत्रकारों को निशाना बना रही है। दुनिया के पत्रकारों के बीच बढ़ता आपसी सहयोग निश्चित रूप से जश्न मनाने लायक है।

जीआईजेसी-23 की कुछ झलकियाँ इस प्रकार हैं:

दुनिया भर से रिकॉर्ड सहभागिता

इस सम्मेलन में 132 देशों से 2138 पंजीकृत प्रतिभागी शामिल हुए। इस तरह यह इतिहास का सबसे बड़ा खोजी पत्रकारिता सम्मेलन बन गया। इस भारी संख्या के अलावा सम्मेलन की अन्य कई खासियत रही। इसमें विविध श्रेणियों के वक्ताओं और सहभागियों की प्रभावशाली भूमिका रही। इसमें ग्लोबल साउथ के सैकड़ों पत्रकारों के साथ ही स्थानीय समुदायों से जुड़े काफी पत्रकार और मीडिया संगठनों का शामिल होना भी एक बड़ी उपलब्धि है।

धमकी, धमकियाँ, और इससे भी अधिक धमकियाँ

जीआईजेसी-23 में दुनिया भर के पत्रकारों के सामने खतरों और धमकियों का विषय हावी रहा। सम्मेलन के मुख्य भाषण और पूर्ण सत्र में भी इस पर चर्चा हुई। पत्रकारिता पर डिजिटल खतरे को भी पूरे सम्मेलन में महसूस किया गया। यहां तक कि खुद इस सम्मेलन के कुछ प्रतिभागियों को भी इनका शिकार होना पड़ा। पहले ‘इस्टोरीज मीडिया’  (@istories_media) से जुड़े दो पत्रकारों को इस सम्मेलन में शामिल न होने की धमकी मिली। ऐसी धमकी देने वालों के पास दोनों पत्रकारों की यात्रा संबंधी विस्तृत जानकारी होनें के कारण इस खतरे को ज्यादा गंभीरता से महसूस किया गया।

फिर खबर सामने आई कि फ्रांसीसी रिपोर्टर एरियन लावरिलक्स (@AriaLavrilleux) को फ्रांस में हिरासत में लिया गया है। उनके घर पर छापेमारी भी की गई। सम्मेलन में मौजूद पत्रकार समुदाय ने इन घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

खतरों के बीच सावधानी जरूरी

मीडिया संस्थानों के प्रमुख लोगों का दायित्व है कि पत्रकारों को इन खतरों से उबारने और सामान्य जीवन जीने योग्य बनाने में मदद करें। सम्मेलन में इस पर भी चर्चा हुई। प्रेस के बढ़ते तनावपूर्ण माहौल से तनाव, आघात और थकान से निपटने के तरीके बताए गए। इस पर ऐलेना न्यूमैन (डार्ट सेंटर) का सत्र ( Coping with Stress, Trauma and Burnout (for Managers) ) काफी पसंद किया गया। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स और सिटीजन लैब ने कई डिजिटल सुरक्षा क्लीनिक आयोजित करके पता लगाया कि सम्मेलन में उपस्थित पत्रकारों के फोन को जासूसी स्पाइवेयर का शिकार बनाया गया है, अथवा नहीं। संदिग्ध मामलों को ठीक किया गया।

मौज-मस्ती के क्षण

भ्रष्टाचार, मनी-लॉन्ड्रिंग, जलवायु परिवर्तन, युद्ध अपराधों, इत्यादि विषयों पर गहन चर्चा के बाद थोड़ा आराम और कुछ आनंद भी जरूरी था। इसलिए जीआईजेसी के इन-हाउस बैंड द मकरेकर्स के प्रदर्शन, मजेदार इंस्टाग्राम कहानियों और नृत्य-संगीत का भी मजा लिया गया।

तकनीकी से है प्रतियोगिता

पत्रकारों को अब उच्च तकनीकी के साथ प्रतियोगिता में उतरना पड़ रहा है। लेकिन जैसे-जैसे प्रौद्योगिकी आगे बढ़ती है, वैसे-वैसे पत्रकारों की रचनात्मकता, उपकरण और तकनीकें भी बढ़ती हैं। सम्मेलन में हमारे उन विशेषज्ञों के अनगिनत सत्र हुए, जो इस क्षेत्र में तकनीकी से भी आगे हैं। ऐसे सत्रों में ओपन सोर्स जांच, हैकर्स के साथ काम करना, डिजिटल विज्ञापन, क्रिप्टोकरेंसी, वेब संग्रह, डेटा स्क्रैपिंग और सोशल मीडिया खोज जैसे विषय प्रमुख थे।

एआई युग की शुरुआत

यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि एआई का पत्रकारिता पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा। इसे एक खतरे के साथ ही एक आशाजनक उपकरण के रूप में देखा ला सकता है। लिंडहोलमेन साइंस पार्क में आयोजित जीआईजेसी-23 के पहले दिन एआई के खतरों और इससे उम्मीदों पर काफी चर्चा हुई। यह छोटे समाचार संस्थानों की कैसे मदद कर सकता है, इस पर भी बात हुई।

ग्लोबल शाइनिंग लाइट अवार्ड्स

‘ग्लोबल शाइनिंग लाइट अवार्ड्स’  (winners of the Global Shining Light Awards) के विजेताओं की घोषणा हुई। वर्ष 2019 के बाद पहली बार ऐसा हुआ। इस साल के पुरस्कारों ने असाधारण काम को मान्यता दी। वेनेजुएला में अवैध खनन, उत्तर-पश्चिमी नाइजीरिया में प्रणालीगत दस्यु, बांग्लादेश में गुप्त जेलों का खुलासा करने वाली रिपोर्ट्स को सम्मान मिला। दक्षिण अफ्रीका में पुलिस की बर्बरता, इजियम, यूक्रेन में सामूहिक कब्रें, उत्तरी मैसेडोनिया में कोविड-19 मुनाफाखोरी को भी इसमें शामिल किया गया। सभी सम्मानित पत्रकारों को बधाई!

https://twitter.com/ZulkarnainSaer/status/1705205729878020429?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1705205729878020429%7Ctwgr%5E493f97cc8e7354f9df0960609f0374c1722bc024%7Ctwcon%5Es1_c10&ref_url=https%3A%2F%2Fgijn.org%2Fwp-admin%2Fpost.php%3Fpost%3D1232351action%3Deditlang%3Den

डेविड कपलान को विदाई, एमिलिया को कमान

गुरुवार शाम का माहौल थोड़ा भावुक हो गया। जीआईजेएन समुदाय ने निवर्तमान कार्यकारी निदेशक डेविड कपलान को विदाई दी। स्थापना से अब तक 11 साल में वह पहले और एकमात्र जीआईजेएन के नेतृत्वकर्ता रहे हैं । वर्ष 2001 से अब तक वह हर जीआईजेसी में उपस्थित रहे हैं। गाला डिनर कार्यक्रम में उन्होंने शाब्दिक और प्रतीकात्मक रूप से जीआईजेएन के नए कार्यकारी निदेशक एमिलिया डियाज-स्ट्रक को कमान सौंपी।


 

 

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