व्यक्तिगत संबंधों को प्रभावित करने वाली खोजी ख़बरें कैसे करें?
अक्सर कहा जाता है कि जब पत्रकार का किसी कहानी से करीबी रिश्ता होता है, तो किसी व्यक्ति या संस्था से उसका व्यक्तिगत संबंध उसकी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
अक्सर कहा जाता है कि जब पत्रकार का किसी कहानी से करीबी रिश्ता होता है, तो किसी व्यक्ति या संस्था से उसका व्यक्तिगत संबंध उसकी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक बाजार के लगभग 90% हिस्से को तीन कंपनियां नियंत्रित करती हैं। इनके नाम हैं- नोवो नॉर्डिस्क, एली लिली और सैनोफी। उनके नए, एनालॉग संस्करण नए पेटेंट और उपकरण सुरक्षा की परतों के नीचे दबे हुए हैं। फैबियोला टॉरेस के अनुसार किसी पुरानी दवा के चारों ओर एक ‘नए पेटेंट की बाधा’ बना दी जाती है।
VVOJ उन संस्थानों में से है जो न्यूज़रूम में इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दिलाने की वकालत करता है। संस्था का एक अन्य पुरस्कार “फ्लाइवील अवॉर्ड” विशेष रूप से उन संपादकों को सम्मानित करता है जो रिपोर्टरों को रोज़मर्रा की खबरों से समय निकालने और गहन जांच पर काम करने का अवसर देते हैं।
पाँच महाद्वीपों के खोजी संपादकों की पाँच-सदस्यीय समिति ने 13 उत्कृष्ट फाइनलिस्टों में से विजेताओं का चयन किया। बड़े मीडिया संस्थानों की श्रेणी में दो विजेताओं को चुना गया। इसी तरह छोटी और मध्यम संस्थाओं (20 या इससे कम स्टाफ, फ्रीलांसर शामिल) की श्रेणी में एक विजेता घोषित किया गया। अफ्रीका से एक विशेष प्रविष्टि को विशेष प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इन सबके बावजूद, पत्रकारों के सामने एक नाजुक जिम्मेदारी, नफरत को अनजाने में बढ़ावा न देने की है। पैनलिस्टों ने सुझाव दिया कि पत्रकारों को नफरत भरे संदेशों को संदर्भ सहित रिपोर्ट करना चाहिए। उनका प्रसार कम से कम रखना चाहिए। निशाने पर आए समुदायों की आवाज़ को प्रमुखता देनी चाहिए और गालियों या नफरत भरी भाषा को सीधे दोहराने से बचना चाहिए।
आज ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ में छह पूर्णकालिक कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वतंत्र पत्रकारों का एक अच्छा नेटवर्क है। यह हर महीने दो से तीन लंबी जांच-पड़ताल पर ध्यान केंद्रित करता है। इसकी कार्यप्रणाली ‘मितव्ययी’ है। यह पूरी तरह से पाठकों द्वारा वित्त पोषित है। यह उनके दान पर निर्भर है। नितिन सेठी कहते हैं- “पहले दिन से ही हमारी 85% राशि का उपयोग खबरों के उत्पादन में लग रहा है।”
इंडिया-स्पेंड धीमे और धैर्यपूर्ण डेटा कार्य की ताकत को दर्शाता है। लेकिन एल्गोरिदम की गति डेटा पत्रकारिता में एक कमज़ोर बिंदु को उजागर करती है। रॉयटर्स 2025 फ़ेलो और बूम लाइव की उप-संपादक, करेन रेबेलो कहती हैं – “एल्गोरिदम के सामाजिक प्रभाव पर अधिकांश डेटा-संचालित शोध अनुदान-वित्त पोषित हैं। मुख्यधारा के समाचार संस्थान इसमें कोई निवेश नहीं कर रहे हैं।”
एक समय किर्गिज़स्तान की गिनती मध्य एशिया के सबसे लोकतांत्रिक गणराज्यों में होती थी। यहां वास्तविक चुनाव होते थे। एक सशक्त नागरिक समाज और एक जीवंत मीडिया परिदृश्य था। लेकिन एक लोकलुभावन और निरंकुश राष्ट्रपति के शासन में कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों पर भारी दबाव हैं।
पर्यावरण संबंधी ज़रूरी मुद्दे स्वाभाविक तौर पर देशों की सीमाओं से परे होते हैं। इसलिए अच्छी जांच के लिए विभिन्न देशों में काम करना आवश्यक है। लेकिन भाषा, दूरी, प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों और संसाधनों की कमी के कारण साझा पत्रकारिता काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर खोजी पत्रकारिता के उदाहरण देखने को मिलते हैं।
जीआईजेएन ने वर्ष 2016 में नेपाल की राजधानी काठमांडू में दूसरा ‘अनकवरिंग एशिया सम्मेलन’ आयोजित किया। यह सम्मेलन ऐतिहासिक था। इसे आयोजित करने वाले प्रमुख लोगों में कुंदा दीक्षित शामिल थे। लेकिन सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले कुछ घटनाओं का एक जटिल मोड़ आया। इसके कारण वह व्यक्तिगत रूप से सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके। गिरफ़्तारी से बचने के लिए वह स्व-निर्वासन में चले गए।
भारत में डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने ऐसी खबरों के लिए वैकल्पिक माध्यम तैयार किए हैं, जो वाकई जनता के लिए मायने रखती हैं। जीआईजेएन की सदस्य संस्था ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ ने अपनी खोजी रिपोर्टिंग के लिए ख्याति प्राप्त की है। इसने चुनावी बॉन्ड के जरिए भ्रष्टाचार, सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं और कॉर्पोरेट व राजनेताओं के बीच सांठगांठ जैसे मुद्दे उजागर किए हैं। ‘द स्क्रॉल’ और ‘द वायर’ ने निगरानी, पर्यावरण उल्लंघनों और राज्य सत्ता के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की पड़ताल की है। ‘द कारवां’ पत्रिका ने सांप्रदायिक हिंसा, न्यायपालिका और राजनीतिक भ्रष्टाचार पर गहन लेख प्रस्तुत किए हैं। ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ ने मीडिया की भूमिका पर ही ध्यान केंद्रित किया है और मीडिया स्वामित्व के पैटर्न, दुष्प्रचार और संपादकीय स्वतंत्रता में गिरावट की जांच की है।
यह मत सोचिए कि सरकारी जानकारी हमेशा उपलब्ध रहेगी। जिस देश में लोकतंत्र के कमजोर होने का खतरा हो, वहां आपको अपने रिकॉर्ड बनाने के लिए डेटा पत्रकारिता रणनीति का उपयोग करना चाहिए। रूस, कुछ अरब देशों और वेनेज़ुएला में ऐसे मामले देखने को मिल रहे हैं।
जीआईजेसी25 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि खोजी पत्रकारिता का वैश्विक संगम है। यहाँ नई तकनीकों, सहयोगी प्रोजेक्ट्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर होगा। जो पत्रकार अपने काम को और गहराई व असरदार बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह सम्मेलन एक अनोखा अवसर है।
सफल स्थानीय खोजी मीडिया संगठन चलाना आसान नहीं है। दिलचस्प खबरों के मामले में स्थानीय समाचार संगठनों की रैंकिंग अक्सर निचले पायदान पर होती है। ट्रेनों के विलंब से चलने और किसी की बिल्ली लापता होने जैसे स्थानीय समाचारों का अपना अलग महत्व है। लेकिन ऐसी खबरों के भरोसे आप बहुत आगे नहीं जा सकते। ऐसी खबरों के आधार पर आपको पुलित्ज़र जैसे बड़े पुरस्कार मिलने की संभावना कम है।
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस में लोग अपने पसंदीदा टूल से प्यार करते हैं। किसी भी विशेषज्ञ से पूछें तो वह आपको अपनी पसंद के कई टूल का नाम बता देंगे। कहेंगे कि टोपाज़ गीगापिक्सल प्रो का उपयोग करो। कोई आपको जाइरो-आधारित न्यूरल सिंगल इमेज डेब्लरिंग टूल का सुझाव देगा। यहां ऐसे सभी टूल की सूची दी गई है। लेकिन असली समाधान सिर्फ आपके पसंदीदा सॉफ़्टवेयर से नहीं निकलता है। पहले आपको यह स्वीकार करना होगा कि आप सब कुछ नहीं जानते हैं।
कैपी को जेमिनी की तकनीक पर बनाया गया है। यह गूगल द्वारा विकसित एक लार्ज लैंगुएज मॉडल (एलएलएम) है। कुशल तरीके से विश्वसनीय उत्तर तैयार करने ने लिए यह रीट्राइवल ऑगमेंटेड जेनरेशन (आरएजी) का उपयोग करता है।
मीडिया में व्हाट्सएप का बहुत इस्तेमाल होता है। पत्रकार इसका उपयोग अपने पाठकों से जुड़ने के साथ ही स्रोतों से जुड़ने के लिए भी करते हैं। व्हाट्सएप एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन का उपयोग करता है। इसलिए केवल मूल प्रेषक और अंतिम प्राप्तकर्ता ही संदेश देख सकता है। हालांकि इलेक्ट्रॉनिक फ्रंटियर फ़ाउंडेशन की निगरानी आत्मरक्षा (एसएसडी) गाइड के अनुसार व्हाट्सएप और उसकी मूल कंपनी मेटा की गोपनीयता नीतियां चिंताजनक हैं।
आम तौर पर मीडिया का पूरा ध्यान व्हिसल ब्लोअर पर केंद्रित करता है। लेकिन उनके मददगार की अक्सर अनदेखी हो जाती है। जबकि ऐसे मददगारों का समर्थन काफी महत्वपूर्ण होता है। खासकर ऐसे युग में, जब दुनिया भर में सच बोलने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है।
अपनी जांच के लिए सबसे उपयोगी जानकारी कहां मिलेगी? इसके लिए आपको यह पता लगाना होगा कि कहां खोजना है। थॉम्पसन कहते हैं- “परिकल्पना के बारे में सोचें। जानकारी कहां से एकत्र की जाएगी? यह कहां होगी?“
जैसे, यौन हिंसा के अपराधों से जुड़ी जानकारी कहां मिलेगी? इसके लिए मेडिकल रिकॉर्ड, पुलिस रिपोर्ट, मानसिक स्वास्थ्य सहायता डेटा से जानकारी मिल सकती है। सोशल मीडिया में पीड़ितों ने अपनी कहानी सुनाई होगी। हम जानकारी के ऐसे स्रोतों का चयन करें, जिन्हें बुद्धिमानी से जुटाया गया है।
हमारे समूह के दो पत्रकारों के एक जोड़े के साथ भी दिलचस्प मामला हुआ। लंबे दुपट्टे वाला एक युवक उनका पीछा कर रहा था। जबकि ऐसा लग रहा था वह किसी काम से बैंक जा रहा है। एक और बात यह है कि यह एक बूढ़ा, गंदा स्पॉटर था जिसे किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म में एमआई6 एजेंट के रूप में नहीं लिया गया होगा।
वेबसाइट विश्लेषण के लिए Information Laundromat सबसे नया, दिलचस्प और मुफ्त टूल है। जॉर्ज मार्शल फंड के अलायंस फॉर सिक्योरिंग डेमोक्रेसी – (एएसडी) ने यह टूल विकसित किया है। यह सामग्री और मेटाडेटा का विश्लेषण कर सकता है।
मनी लॉन्ड्रिंग को रिश्वतखोरी या टैक्स-चोरी जैसे अन्य वित्तीय अपराधों के साथ न जोड़ें। मनी लॉन्ड्रिंग एक विशेष अपराध है। इसके संबंध में ओसीसीआरपी की परिभाषा पर ध्यान दें। इसमें कहा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग का मतलब अवैध रूप से प्राप्त धन की उत्पत्ति को छिपाना है। इसके लिए विदेशी बैंकों अथवा वैध व्यवसायों से जुड़े हस्तांतरण जैसे तरीके अपनाए जाते हैं।
सूचना के अधिकार के जरिए भी काफी डेटा मिलते हैं। इनका विश्लेषण करने में स्प्रेडशीट काफी उपयोगी है। इसे जानना एक महत्वपूर्ण कौशल है। इससे आपको भारी-भरकम डेटा में संभावित खबरें निकालने में मदद मिलती है। स्प्रेडशीट का उपयोग करके आप पाठकों के लायक मनपसंद प्रस्तुति कर सकते हैं।
शीर्ष विजेताओं को मानद पट्टिका, 2500 अमेरिकी डॉलर और नवंबर 2025 में कुआलालंपुर, मलेशिया में वैश्विक खोजी पत्रकारिता सम्मेलन में दुनिया भर से अपने सैकड़ों सहयोगियों के सामने पुरस्कार स्वीकार करने के लिए एक यात्रा मिलेगी।
प्रेस की स्वतंत्रता में अभूतपूर्व गिरावट आई। इस दौरान अनगिनत पत्रकारों को उत्पीड़न अथवा दमनकारी कानूनों का शिकार होना पड़ा। इसके बावजूद वर्ष 2024 में भारत के खोजी पत्रकारों ने अनगिनत शक्तिशाली खोजी खबरें पेश की हैं।