GIJC25 Program Sneak Peek
GIJC25 Program Sneak Peek

Image: GIJN

आलेख

मलेशिया में होने वाले खोजी पत्रकारिता सम्मेलन की एक झलक

इस लेख को पढ़ें

दुनिया भर के खोजी पत्रकारों के लिए साल का सबसे बड़ा आयोजन—ग्लोबल इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कॉन्फ्रेंस (#GIJC25) का कार्यक्रम घोषित हो गया है। यह सम्मेलन 20 से 24 नवंबर 2025 तक कुआलालंपुर, मलेशिया में होगा। इसमें 15 ट्रैक, 150 से अधिक पैनल और वर्कशॉप्स तथा 300 से अधिक विशेषज्ञ वक्ता शामिल होंगे। खास बात यह है कि इनमें से लगभग सौ वक्ता एशिया से होंगे।

सम्मेलन के प्रमुख ट्रैक और विषय

डेटा जर्नलिज्म

  • सत्र: डेटा-कमी वाले संदर्भों में जांच
  • पत्रकारों को सिखाया जाएगा कि जब सरकारी या आधिकारिक डेटा उपलब्ध न हो, तब फील्डवर्क और ओपन-सोर्स रिसर्च की मदद से ठोस रिपोर्ट कैसे तैयार की जाए।

टेक्नोलॉजी और AI

  • सत्र: ब्लैक बॉक्स तोड़ना: एल्गोरिदम की जांच
  • एल्गोरिदमिक पक्षपात, सप्लाई-चेन ट्रैकिंग और ग्लोबल साउथ की चुनौतियों पर गहन विमर्श।

पर्यावरण

  • सत्र: स्थानीय नजर से वैश्विक जल संकट
  • स्थानीय स्तर की कहानियों से वैश्विक जवाबदेही और जलवायु संकट को जोड़ने के तरीके।

मानवाधिकार

  • सत्र: विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध अपराधों की जांच
  • साक्ष्य संग्रहण, सुरक्षा और नैतिक दुविधाओं पर प्रशिक्षण।

अपराध और भ्रष्टाचार

  • सत्र: धार्मिक समूहों से जुड़े दुरुपयोग की पड़ताल
  • पीड़ितों का विश्वास जीतना और कानूनी दबावों से निपटने की रणनीतियाँ।

बिज़नेस और कॉर्पोरेट रिपोर्टिंग

  • सत्र: दवा उद्योग में ओलिगोपॉली की जांच
  • दवा उद्योग में कीमत तय करने की प्रक्रिया, पेटेंट विस्तार, लॉबिंग और नियामक कब्जे की पड़ताल।

सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन

  • सत्र: डिवाइस सर्च/सीजर की तैयारी
  • सीमा पार रिपोर्टिंग, विरोध प्रदर्शनों और संघर्ष क्षेत्रों में डिजिटल जोखिम कम करने के उपाय।

सहयोग और संपादकीय नेतृत्व

  • सत्र: क्रॉस-बॉर्डर सहयोग में संपादकीय नेतृत्व
  • बहु-न्यूज़रूम प्रोजेक्ट्स के लिए टीम प्रबंधन और निर्णय-प्रक्रिया पर चर्चा।

कार्यशालाएं (Hands-on Workshops)

ग्लोबल इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कॉन्फ्रेंस में दर्जनों प्रैक्टिकल सत्र होंगे।

इनमें शामिल हैं:

  • डोमेन और IP डेटा का उपयोग
  • नशीली दवाओं और भ्रष्टाचार से जुड़े विमानों की ट्रैकिंग
  • QGIS और मैपिंग
  • सोशल मीडिया और गलत सूचना की जांच
  • नो-कोड स्क्रैपिंग तकनीक
  • सैटेलाइट इमेजरी विश्लेषण
  • AI डीपफेक्स की पहचान
  • डेटा क्लीन-अप और विश्लेषण के लिए AI

उपयोगी संसाधन:

सम्मेलन से पहले तैयारी के लिए जीआईजेएन ने कई संसाधन उपलब्ध कराए हैं:

जीआईजेसी25 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि खोजी पत्रकारिता का वैश्विक संगम है। यहाँ नई तकनीकों, सहयोगी प्रोजेक्ट्स और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर जोर होगा। जो पत्रकार अपने काम को और गहराई व असरदार बनाना चाहते हैं, उनके लिए यह सम्मेलन एक अनोखा अवसर है।

क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत हमारे लेखों को निःशुल्क, ऑनलाइन या प्रिंट माध्यम में पुनः प्रकाशित किया जा सकता है।

आलेख पुनर्प्रकाशित करें


Material from GIJN’s website is generally available for republication under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International license. Images usually are published under a different license, so we advise you to use alternatives or contact us regarding permission. Here are our full terms for republication. You must credit the author, link to the original story, and name GIJN as the first publisher. For any queries or to send us a courtesy republication note, write to hello@gijn.org.

अगला पढ़ें

Ukrainian refugees at Lviv railway station in 2022, waiting for a train to leave Ukraine. Image: Shutterstock

प्रवासन और विस्थापितों पर रिपोर्टिंग कैसे करें

किसी आपात स्थिति में सुरक्षित आवागमन के अभाव और हताशा में भी लोग पलायन करते हैं। रेगिस्तानों को पार करने वाले सीलबंद मालवाहक ट्रकों से लेकर यूरोप की सीमाओं के पास गोपनीय अस्थायी हिरासत केंद्रों जैसे मुद्दे अहम हैं। विभिन्न देशों के बीच प्रवासियों का आवागमन आज पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

GIJN Academy collage

जीआईजेएन ने खोजी पत्रकारिता की अकादमी आरंभ की

इसके अंतर्गत प्रशिक्षण लेने वालो के लिए खोजी पत्रकारिता का परिचय, ऑनलाइन ठगी, सैटेलाइट इमेजरी, सहयोगात्मक रिपोर्टिंग, खाद्य असुरक्षा, तकनीक और एआई, पर्यावरण अपराध, लीक और डेटा पत्रकारिता आदि विषयों से परिचित कराया जाएगा।

GIJC25 - Investigating War Crimes Using Satellite Imagery panel

युद्ध अपराधों की जांच के लिए सैटेलाइट चित्रों का उपयोग

सैटेलाइट के जरिए लाइट स्पेक्ट्रम के अलग-अलग हिस्सों से डेटा इकट्ठा किए जाते हैं। इनसे पत्रकार उन बदलावों का पता लगा पाते हैं जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। रडार सैटेलाइट के जरिए बादलों के पार भी देखा जा सकता है। इसका इस्तेमाल 2021 के अंत में यूक्रेन की सीमा के पास रूसी सैन्य शिविरों का पता लगाने के लिए किया गया। भले ही अलग-अलग वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे, लेकिन रडार सैटेलाइट डेटा के पैटर्न से सैन्य कार्रवाई की तैयारी संबंधी बदलाव देखने को मिले। हम इन सैन्य शिविरों को अपनी आंखों से नहीं देख सकते थे। लेकिन अगर ऐसे पैटर्न अचानक दिखाई देते हैं, जो पहले नहीं थे, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि ये मिलिट्री वाहन हैं।