Elections Guide New Digging Tools
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Illustration: Marcelle Louw for GIJN

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खोजी पत्रकारों के लिए गाइड: चुनावी रिपोर्टिंग के नए उपकरण- पहला अध्याय

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रेखांकन: जीआईजेएन के लिए मार्सेले लूव

(संपादकीय टिप्पणी – चुनावी रिपोर्टिंग के लिए जीआईजेएन ने पांच खंडों की मार्गदर्शिका तैयार की है। परिचय खंड‘ आप पढ़ चुके होंगे। यह पहला अध्याय‘है। दूसरा अध्याय एवं तीसरा अध्याय पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें। चौथा अध्याय राजनीतिक संदेश और गलत सूचनाओं पर केंद्रित होगा।)

दुनिया के 150 से अधिक देशों में लोकतांत्रिक चुनाव कराए जाते हैं। सभी देशों के चुनावी नियम, नागरिक स्वतंत्रता कानून अलग-अलग होते हैं। हर देश में सूचना के चैनल भी अलग हैं। इसलिए हर जगह कोई एक ही तकनीक काम नहीं आएगी। ऐसा कोई खोजी उपकरण नहीं है, जो हर जगह प्रभावी हो। लेकिन जांच की गहनता संबंधी कुछ उपकरण, तरीके और कुछ स्थापित नियम हैं, जो अधिकांश देशों में काम आएंगे। उन स्थापित नियमों एवं उपकरणों की जानकारी इस अध्याय में दी गई है।

ऐसी तकनीक के दो उदाहरण देखें:

  • चुनावी हिंसा पर नजर रखने के लिए ‘जियो-कोड‘ का उपयोग करें। गूगल मैप पर ‘व्हाट इज हियर‘ टैग के जरिए किसी घटना के कोर्डिनेट को कॉपी कर लें। फिर उस स्ट्रिंग को ‘ट्वीट-डेक‘ में ‘जियो-कोड‘ शब्द के साथ पेस्ट करें। साथ ही, उस क्षेत्र विशेष का निर्धारण करके उस क्षेत्र के सभी सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो को एक कॉलम में डाल दें। बेलिंगकैट के इस एक्सप्लेनर में इसकी पूरी प्रक्रिया देखें।
  • बूलियन सर्च का उपयोग करें। यह इंटरनेट सर्च का एक आसान तरीका है। इसमें किसी शब्द या कुछ शब्दों के साथ कोई शब्द (एंड, ओर, नोट, नीयर इत्यादि) जोड़कर सर्च किया जाता है। गूगल में डेटा सर्च की ताकत का उपयोग करने के लिए पत्रकारों को बूलियन गूगल सर्च पद्धति पर भरोसा है। इसके लिए स्टेब्लिश्ड सर्च ऑपरेटर्स या एडवांस्ड गूगल डॉर्क्स का उपयोग किया जाता है।

फोटो: जियो-कोड का उपयोग करने से ट्विटर के स्रोतों पर नजर रखने और सत्यापन करने में मदद मिल सकती है। इमेज – स्क्रीनशॉट

दो बहुउद्देश्यीय उपकरण को जानें:

  • एलेफ डॉक्यूमेंट्स लीक डेटाबेस: इसे ओसीसीआरपी ने बनाया है। इससे पत्रकारों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चुनाव संबंधी अपराधों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
  • क्राउडटेंगल टूल फेसबुक और इंस्टाग्राम पर चुनाव संबंधी दुष्प्रचार का पता लगाने में काफी उपयोगी है। हालांकि कुछ दिनों पहले फेसबुक द्वारा नए खाते खोलने पर रोक के कारण इसकी कुछ सीमाएं हैं।

खोजी पत्रकारों के लिए नए बहुउद्देश्यीय उपकरणों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है। चुनावी रिपोर्टिंग के लिए उपयोगी उपकरणों की संख्या भी सीमित है। इस अध्याय में दो नए उपकरणों की जानकारी प्रस्तुत है। विशेषज्ञों का कहना है कि इनसे अधिकांश देशों में चुनावी रिपोर्टिंग में मदद मिल सकती है। जीआईजेएन को दिए गए साक्षात्कार में इन दो विशेषज्ञों ने इन उपकरणों की विशेषता बताई है। जेन लिट्विनेंको उग्र राजनीतिक समूहों कीप्रमुख अन्वेषक और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोरेंस्टीन सेंटर की सीनियर फेलो हैं और क्रेग सिल्वरमैन प्रोपब्लिका से सम्बद्ध हैं।

चुनावी दुष्प्रचार की जांच कैसे करें

‘इन-विड‘ प्लग-इन (InVid plugin) इसे ‘वीडियो सत्यापन का अच्छा उपकरण‘ (video verification tool)  समझा जाता है। यह सोशल मीडिया ट्रैकिंग, गहन जाँच और डेटा विजुअलाइजेशन के एक अच्छे टूल के रूप में विकसित हुआ है। परदे के पीछे से चुनावों को प्रभावित करने वालों की जांच करने वाले पत्रकारों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है।

इन-वीड की ‘वी-वेरिफाई‘ परियोजना में नई सुविधाओं को जोड़ा गया है। यह यूरोपीय संघ द्वारा वित्तपोषित परियोजना है। एजेंसी फ्रांस-प्रेस (AFP) और ड्यूश वेले (DW) सहित कई मीडिया संगठनों के साथ इसका कौशल सहयोग तालमेल भी है। ‘वी-वेरिफाई‘ की सुविधाओं में एक ग्लोबल फैक्ट-चेकिंग सर्च फीचर भी शामिल है। फेसबुक के मौजूदा खुदाई उपकरण ‘क्राउडटेंगल‘ के लिए एक प्लेन टेक्स्ट फाइल (सीएसवी) सुविधा भी है। एक ‘चेक-जीआइएफ‘ फंक्शन है, जो आपको असली फोटो के अलावा छेड़छाड़ की गई फोटो को स्वचालित रूप से दिखाने की सुविधा देता है। इससे पाठक किसी भी फर्जीवाड़े को तुरंत समझ सकते हैं।

वी-वेरीफाई ट्विटर एसएनए टूल

WeVerify Twitter SNA – दुष्प्रचार की जांच करने वाले पत्रकारों के लिए यह एक गेम-चेंजर है। जेन लिट्विनेंको के अनुसार यह बेहद महीन तरीके से काम करने वाला शानदार उपकरण है। क्रेग सिल्वरमैन के अनुसार पत्रकारों के लिए यह स्विस सेना के चाकू जैसा उपकरण है।

फोटो: ट्विटर एसएनए टूल पर क्लिक करने योग्य कुछ ग्राफिकल डेटा। इससे छह जनवरी, 2021 को अमेरिका की राजधानी में विद्रोह में चुनावी साजिश की जांच में मदद मिलती है। इमेज: स्क्रीनशॉट

ट्विटर एसएनए टूल के द्वारा आप ट्विटर पर राजनीतिक चर्चा और धोखाधड़ी के अभियानों पर नजर रख सकते हैं। इन चीजों का ग्राफिक रूप से मैप भी बना सकते हैं। ऐसी चीजों में शामिल लोगों की पहचान भी कर सकते हैं। यह उन संगठनों और वेबसाइटों को सूचीबद्ध कर सकता है, जिन्हें इन अभियानों से लाभ हो। यह ट्विटर उपयोगकर्ताओं द्वारा साझा किए गए 25 प्रमुख वेबसाइटों की लिस्ट बनाता है। गलत सूचना के जिन शब्दों की जांच करनी है, उनके आपसी संबंधों को भी मैप करता है।

फ्रांस, कंबोडिया और ट्यूनीशिया में ऑनलाइन जांच विशेषज्ञों के साथ हाल ही में एक वेबिनार हुआ। इसमें जीआईजेएन ने इस 25 सबसे अधिक साझा की गई वेबसाइट की सुविधा का उल्लेख किया। ऐसी सुविधा पर विशेषज्ञों ने हैरानी जताई।

इस टूल का उपयोग करने के लिए आपके पास कोडिंग का तकनीकी कौशल होना जरूरी नहीं। आपको लोकेशन की भी जरूरत नहीं है। यहां तक कि अपना ग्राफिक्स भी नहीं चाहिए। आप सिर्फ किसी शब्द या हैशटैग को सर्च-बार में टाइप करके एक तिथि-सीमा डाल दीजिये। इससे आपको विस्तृत डेटा मिल जाएगा। इसमें डाउनलोड करने योग्य चार्ट, क्लिक करने योग्य सक्रिय उपयोगकर्ताओं और संबंधित वेबसाइट की सूची मिल जाएगी।

यह सिस्टम एक बार में 15,000 से अधिक ट्वीट खोज सकता है। किसी मामले में इससे भी अधिक ट्वीट हों, तो आप दिनांक सीमा को कम करके अपनी खोज को केंद्रित कर सकते हैं। किसी वायरल कीवर्ड के मामले में ऐसा करना पड़ सकता है।

चुनावी जांच में कैसे मदद करता है यह उपकरण

वी-वेरीफाई का ट्विटर एसएनए टूल सामग्री के बजाय उपयोगकर्ताओं और उनके संबंधों पर अधिक ध्यान देता है। इसलिए यह खोजी पत्रकारों के लिए विशेष उपयोगी है। इससे आप यह समझ सकते हैं कि एक राजनीतिक संदेश से किसे लाभ या नुकसान हो रहा है और कौन लोग चुनाव को प्रभावित कर रहे हैं।

भारत में ‘लव जिहाद‘ पर ट्वीट का एक उदाहरण देखें। हिंदू राष्ट्रवादी विचार के तहत ‘लव जिहाद‘ को लेकर कथित साजिश की बात होती है। इसके खिलाफ एक नया कानून भी बना है। भारत में चुनाव के दौरान ऐसे शब्दों का काफी प्रयोग हो रहा है। जीआईजेएन ने ट्विटर एसएनए टूल के सर्च बार में ‘लव जिहाद‘ टाइप किया। दो सप्ताह की समय सीमा के भीतर जांच की गई। टूल ने 4,300 व्यक्तिगत ट्वीट खोज निकाले। उनके साथ बड़ी संख्या में रीट्वीट और लाइक भी मिले। ट्विटर एसएनए टूल ने इस अभियान में प्रमुख भूमिका निभाने वाले ट्विटर खातों की लिस्ट बना दी। इनमें कुछ लोगों ने ‘लव जिहाद‘ पर बड़ी संख्या में पोस्ट डाले थे। कुछ लोगों ने एक-दो पोस्ट ही की थी, लेकिन काफी लोकप्रिय होने के कारण प्रभावशाली थे। इसके अलावा ऐसे ट्रोल, बॉट मशीन या वैचारिक चरमपंथी के ट्विटर एकाउंट थे, जो प्रति घंटे कई संदेश पोस्ट करते हैं। इस अभियान में शामिल कुछ वेबसाइटों में इस्लामोफोबिक कुप्रचार से लाभ उठाकर माल बेचने वाली कंपनियां भी शामिल थीं। जिन 25 सबसे सक्रिय खातों की सूची सामने आई, उनके टॉप-ट्विटर एसएनए टूल पर हमने क्लिक किया। इसमें अधिकांश पोस्ट उग्र हिंदू राष्ट्रवादी विचारों पर आधारित थे।

एएफपी की मीडिया-लैब के प्रमुख और वी-वेरीफाई के संस्थापक डेनिस टेयसौ ने जीआईजेएन को एक डेमो दिया। विषय था- चुनावी दुष्प्रचार की जांच के लिए ट्विटर एसएनए टूल का उपयोग कैसे करें। इस टूल से इन चीजों की जानकारी मिल सकती है।

  • एक बबलमैप चार्ट – इसमें आप गलत सूचना फैलाने वाले एम्पलीफायरों की पहचान कर सकते हैं। इसके ‘ऑरेंज बबल‘ में प्रतिदिन पांच से लेकर 14 बार तक किसी विषय पर पोस्ट करने वाले लोगों या बॉट मशीनों को दिखाया गया है। ‘रेड बबल‘ में प्रतिदिन 15 या अधिक पोस्ट करने वाले दिखेंगे।
  • चुनाव संबंधी चर्चाओं का विवरण आप डाउनलोड कर सकते हैं। इसके जरिए चुनावी दुष्प्रचार की घटनाओं को पिछले समाचारों और घटनाओं से जोड़कर देख सकते हैं। आप अपनी जरूरत के अनुसार इसके लिए समयरेखा का निर्धारण कर सकते हैं। जिस तिथि से जिस तिथि तक के चुनाव संबंधी मामलों की जांच करनी हो, उन्हें आसानी से खोज सकते हैं। इसके ग्राफ में समय के बार के अनुसार घटनाओं को देख सकते हैं।
  • 20 सर्वाधिक रीट्वीट किए गए उपयोगकर्ता की सूची आपको मिल जाएगी। इनमें लोकप्रिय हस्तियों, राजनेताओं से लेकर भड़काऊ पोस्ट डालने वाले लोग मिल सकते हैं।
  • 20 सबसे सक्रिय उपयोगकर्ता की सूची भी आपको मिल जाएगी। इनमें ट्रोल्स, प्रभावशाली लोग, बॉट मशीन और झूठ फैलाने वाले सोशल मीडिया कार्यकर्ता होंगे, जो ट्वीटर में किसी विषय को टॉप-ट्रेंडिंग कराते हैं।
  • उस दुष्प्रचार में जिन 20 लोगों का नाम सबसे ज्यादा आया हो, उनकी सूची भी मिलेगी। इनमें चर्चित नेता तथा प्रमुख लोग होते हैं।
  • किसी चुनावी विषय पर बातचीत में उपयोगकर्ताओं और हैशटैग के बीच संबंध बताने वाला मैप भी आपको मिलेगा। इसमें उनका प्रभाव दिखाने के लिए क्लिक करने योग्य बबल भी मिल जाएगा।
  • एक इंटरैक्टिव हीटमैप भी मिलेगा। इसके जरिए आप स्वचालित बॉट मशीनों की पहचान कर सकते हैं। जैसे, यदि कोई खाता काफी सुबह के वक्त बड़ी मात्रा में पोस्ट कर रहा है, तो वह किसी बॉट मशीन का काम हो सकता है।
  • ऐसी 25 वेबसाइटों की सूची मिलेगी, जिन्हें आपकी सर्च वाले कीवर्ड में ज्यादा पोस्ट किया गया हो। आप उन साइटों को क्लिक करके आसानी से देख सकते हैं। इनके यूआरएल के बगल के बॉक्स ‘सबमिट ट्विटर एसएनए‘ पर क्लिक करें। सिस्टम उस साइट में अन्य ट्वीट्स के लिए पूरी सर्च चलाकर दिखाएगा। हमने अमेरिका में वर्ष 2020 चुनाव से एक सप्ताह पहले ‘एंटीफा‘ और ‘फायर‘ की खोज की। इसमें मिली प्रमुख साइटों की सूची में रूस की सरकारी मीडिया साइटें और ‘ब्लू लाइव्स मैटर‘ साइटें शामिल थीं। यह अमेरिका में ‘ब्लैक लाइव्स मैटर‘ अभियान के खिलाफ एक दक्षिणपंथी अभियान था।

फोटो:  ‘एंटीफा कैपिटल दंगा साजिश‘ – इस हैशटैग से ट्विटर एसएनए सर्च की गई। इससे यह मैप तैयार हुआ है। इसमें आप इंटरेक्टिव नोड्स पर क्लिक करके टूल के भीतर कनेक्शन देख सकते हैं। इमेज: स्क्रीनशॉट

ट्विटर एसएनए टूल तथा अन्य एडवांस्ड टूल कैसे निःशुल्क प्राप्त करें?

ट्विटर एसएनए टूल निःशुल्क पाने के लिए पत्रकारों को वी-वेरीफाई की उन्नत सुविधाओं के लिए आवेदन करना होगा। इसके लिए पंजीकरण के आसान चरण नीचे दिए गए हैं। आपको इसकी मुफ्त सेवा पाने के लिए किसी न्यूज वेबसाइट या शोध संगठन से जुड़ा ई-मेल पता देना होगा। बेहतर होगा कि आप अपना व्यक्तिगत जीमेल या प्रोटॉन मेल खाते न दें।

यह आवेदन करने में मात्र कुछ मिनट लगते हैं। ‘वी-वेरीफाई‘ गलत लोगों को यह सुविधा नहीं देना चाहता। इस टूल को शोधकर्ताओं, मानवाधिकार समूहों और खोजी पत्रकारों के लिए बनाया गया है।

जो पत्रकार ‘क्रोम एक्सटेंशन प्लग-इन‘ के बारे में अच्छी तरह से नहीं जानते हैं, उन्हें इस टूल को सक्रिय करने और पंजीकरण करने की प्रक्रिया में थोड़ी उलझन सकती है। इसलिए निम्नलिखित चरणों का ध्यानपूर्वक पालन करें:

  • इस लिंक से प्लग-इन पेज खोलें।
  • ‘ऐड टू क्रोम‘ आइकन पर क्लिक करें।
  • स्क्रीन के ऊपरी दाएं कोने पर जिग्सा पीस पर क्लिक करें। इसके बाद टूल को पिन करें।
  • आपके टूल-बार में मौजूद ‘इन-विड‘ आइकन पर क्लिक करें। फिर ‘लॉगिन‘ पर क्लिक करें।
  • पॉप-अप के नीचे ‘रजिस्टर‘ आइकन मिलेगा। उसमें पेशेवर पत्रकार के बतौर अपना ई-मेल पता दर्ज करें। यदि आपके पास केवल एक व्यक्तिगत पता है, तो ‘फीडबैक‘ संदेश बॉक्स पर क्लिक करें और बताएं कि आप एक पत्रकार हैं।
  • अपने ई-मेल पर भेजे गए कोड को पुनः प्राप्त करें। इसे उसी लॉगिन आइकन के तहत दर्ज करें। इससे आपके पास ‘ट्विटर एसएनए‘ तथा अन्य एडवास्ड टूल्स तक पूर्ण पहुंच मिल जाएगी। ‘ओपन टूलबॉक्स‘ ड्रॉपडाउन पर क्लिक करके प्रारंभ करें।
ट्विटर एसएनए टूल की सीमाएं

जेन लिट्विनेंको ने कहा – “कई देशों में व्हाट्सएप, फेसबुक, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म प्रमुख हैं। वहां मतदाताओं द्वारा ट्विटर का उपयोग बहुत कम किया जाता है। उन देशों में यह सुविधा कम प्रभावी होगी। हालांकि वैसे देशों में भी ट्विटर एसएनए उपकरण का महत्व है, क्योंकि उन देशों के चुनावों में शामिल विदेशी शक्तियों, जैसे चुनाव पर्यवेक्षक, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया और दुष्प्रचारकर्ता इत्यादि के द्वारा ट्विटर का उपयोग किया जाएगा। उनकी बातचीत को ट्रैक करना उपयोगी होगा। इस उपकरण का उपयोग क्राउडटैंगल के संयोजन में भी किया जा सकता है। यह फेसबुक, रेडिट और इंस्टाग्राम में सर्च कर सकता है।“

जैसा कि पहले बताया है, ट्विटर एसएनए टूल एक बार में 15,000 ट्वीट्स तक खोज सकता है। यह घास के विशाल ढेर में सुई की खोज जैसा काम है। इसलिए किसी वायरल चुनावी दावे पर अपनी खोज के लिए दिनांक की सीमा को यथासंभव सीमित करना बेहतर है। सर्च के लिए ‘की-वर्ड‘ भी सावधानी से चुनें ताकि कम परिश्रम में बेहतर नतीजे मिल सकें।

ट्विटर एसएनए टूल द्वारा निर्मित प्लॉट-ग्राफ और पाई-चार्ट को डाउनलोड करना आसान है। लेकिन हैशटैग ग्राफिक को डाउनलोड करने की सुविधा नहीं हैं। इसलिए यदि आप उन्हें स्टोर या प्रकाशित करना चाहते हैं, उनका तो स्क्रीनशॉट लेना होगा।

UA/Pub टूल : विज्ञापन से आय के जरिये असली लोगों की तलाश करें

रेखांकन: जीआईजेएन के लिए मार्सेले लूव

क्रेग सिल्वरमैन ‘प्रोपब्लिका‘ के मीडिया मैनिपुलेशन विशेषज्ञ हैं। वह प्रमुख ऑनलाइन सर्च विशेषज्ञ हैं। उन्होंने हाल ही में फिलीपींस विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक चुनाव रिपोर्टिंग कार्यशाला में प्रशिक्षण दिया। उन्होंने चुनाव संबंधी वेबसाइट चलाने वाले गोपनीय व्यक्तियों को ट्रैक करने के लिए ‘यूए/पब‘ उपकरण के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में समय बचाने वाले लगभग दो दर्जन रोमांचक उपकरणों का वर्णन किया। लेकिन बहु-चरणीय ‘यूए/पब‘ पद्धति को चुनावों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया।

इसका पहला कारण यह है कि आपके सामने आने वाले जटिल कोड के बावजूद इसके लिए किसी उन्नत कौशल की आवश्यकता नहीं है। दूसरा, यह चुनावी साजिशकर्ताओं के व्यक्तिगत लालच का फायदा उठाता है।

चुनाव से जुड़े कई प्रमुख लोग (जैसे- अभियान कर्मचारी, लॉबिस्ट या दानदाता), नहीं चाहते कि किसी वेबसाइट के पीछे उनका हाथ होने की बात सामने आए। संभव है कि उन वेबसाइटों में अभद्र भाषा या दुष्प्रचार, या विदेशी शक्तियों के अवैध संबंध हों। ऐसे वेबसाइट के पीछे छुपे लोग खुद को गोपनीय रखना चाहते हैं।

यही कारण है कि उन वेबसाइटों के संचालक खुद को छिपाए रखते हैं। वे अपने नाम की क्रेडिट का त्याग कर देते हैं? अपना नाम हटाने के लिए डोमेन गोपनीयता सेटिंग्स में ऐसा कर सकते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग किसी विज्ञापन राजस्व का त्याग नहीं करना चाहते। इसके कारण खोजी पत्रकारों को ऐसे विषाक्त, चुनाव-संबंधी वेबसाइटों के पीछे के छिपे लोगों की पहचान करना संभव हो सकता है।

UA/Pub टूल कैसे काम करता है?
  • वेबसाइट चलाने वाले अधिकांश लोग मुफ्त गूगल ऐड-सेंस सेवा के लिए साइन अप करते हैं। स्वचालित रूप से उनकी साइटों में विज्ञापन आते हैं। उन विज्ञापनों से राजस्व प्राप्त करने के लिए वेबसाइट के मालिक को अपने वेबसाइट स्रोत कोड में अपना ऐड-सेंस कोड स्ट्रिंग जोड़ने की आवश्यकता होती है। यह हमेशा Pub से शुरू होता है।
  • इसी तरह, वेबसाइट के मालिकों ने मुफ्त गूगल एनालिटिक्स सर्विस के लिए साइन-अप किया है। इससे उन्हें अपने दर्शकों की संख्या और अन्य विवरण की जानकारी मिलती है। यह डेटा प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने वेबसाइट एक अलग कोड जोड़ने की आवश्यकता होती है। यह हमेशा UA से शुरू होता है।
  • वेबसाइट के मालिक आमतौर पर एक ही आईडी टैग का उपयोग करते हैं। इसलिए गूगल जानता है कि विज्ञापन का पैसा और विश्लेषण का डेटा किसे भेजना है।
  • आप किसी वेबसाइट के सोर्स कोड में ‘पब‘ या ‘यूए‘ टैग ढूंढ सकते हैं। इसका तरीका नीचे बताया गया है। ऐसा करके उन्हें इन तीन मुफ्त टूल में किसी एक में पेस्ट करें – ‘बिल्टविथ‘ (BuiltWith), ‘स्पाईऑनवेब‘ (SpyOnWeb), या ‘डीएनएसलाईटिक्स‘ (DNSlytics)। ऐसा करके आप वैसे अन्य सभी वेबसाइट को देख सकते हैं, जो उसी राजस्व या डेटा टैग से जुड़े हों। इस तरह आप चुनावी वेबसाइट के पीछे छिपे नेटवर्क और व्यक्तियों को ढूंढ सकते हैं।
  • UA/Pub के जरिए आप लंबे समय से बंद या निष्क्रिय वेबसाइटों की भी जांच कर सकते हैं। आप यह पता लगा सकते हैं कि एक ही अभियान के पीछे छिपे लोगों ने पहले किन चुनाव अभियानों में किस प्रकार अवसरवादी दुष्प्रचार किया और वे किस नेटवर्क का हिस्सा थे। क्रेग सिल्वरमैन का कहना है कि जिन पत्रकारों ने वे-बैक मशीन ब्राउजर एक्सटेंशन  को पूर्व-स्थापित किया है, वे अपनी सामान्य यूए/पब खोज के दौरान स्वचालित रूप से पॉपअप संदेश प्राप्त कर सकते हैं। यह आपको इस तथ्य के प्रति सचेत करते हैं कि उपकरण ने आपकी जांच में पूर्व साइटों की प्रतियां संग्रहित की हैं। फिर आप उसी टैग को खोजने के लिए संग्रहित पृष्ठों पर उसी सरल यूए/पब विधि से खोज सकते हैं। क्रेग सिल्वरमैन के अनुसार यह एक अद्भुत और आसान बात है कि यह आपको तुरंत बताता है। आपके पास एक्सटेंशन इंस्टॉल है और फिर आप उसी स्रोत कोड का उपयोग कर सकते हैं।

क्रेग सिल्वरमैन कहते हैं- “वेबसाइटों को एक साथ जोड़ने के लिए मैं सबसे मौलिक तरीके का उपयोग करता हूं। यह बेहद सरल है। मैं पत्रकारों को उन वेबसाइटों पर अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं जिन्हें आप चुनावों में देखते हैं।“

उनका कहना है कि ऐड-सेंस की पब प्रकाशक आईडी से पता चल सकता है कि वही व्यक्ति या वही समूह किन वेबसाइटों के पीछे है। एक ही प्रकाशक टैग से जुड़े विज्ञापनों का पैसा एक ही खाते में जाता है। यह संभावना बहुत कम है कि कोई अपनी वेबसाइट पर किसी दूसरे की गूगल प्रकाशक आईडी डालेगा, क्योंकि ऐसा करने पर विज्ञापन का सारा पैसा दूसरे के पास चला जाएगा।

UA/Pub टैग कैसे खोजें
  • किसी भी वेबपेज के सफेद स्थान पर राइट-क्लिक करें। फिर ‘सोर्स कोड‘ या ‘पेज सोर्स‘ देखें।
  • सामने आए काफी ‘सोर्स कोड‘ से भयभीत न हों। सोर्स कोड पेज पर “यूए-“ या “पब-“ खोजने के लिए एडिट मेनू में कंट्रोल-एफ या “फाइंड“ का उपयोग करें।
  • यूए या पब और उसके बाद आने वाले नंबरों सहित पूरे टैग को कॉपी करें।
  • डीएनएस-लीटिक्स डॉट कॉम खोलें। उसके सर्च बार में कॉपी किए गए टैग को पेस्ट करें। इस सर्च में ऐसे अन्य वेबसाइट डोमेन की क्लिक करने योग्य सूची दिख सकती है, जिनका उपयोग विज्ञापन के पैसे लेने या विश्लेषण डेटा लेने के लिए किया गया है। इसमें ऐसी निष्क्रिय वेबसाइटें भी शामिल हो सकती हैं जो पहले उस टैग का उपयोग करती थीं।
  • स्पाईऑनवेब (SpyOnWeb) और बिल्टविथ (BuiltWith) टूल्स में भी उसी प्रक्रिया को दोहराएं। संभव है आपको कुछ नई जानकारी मिल जाए। निष्क्रिय साइटों के भी अतिरिक्त परिणाम मिल सकते हैं। क्रेग सिल्वरमैन कहते हैं कि बिल्टविथ उस वेबसाइट के यूआरएल के साथ काम करता है जिसकी आप जांच कर रहे हैं। वेबसाइटों के बीच कनेक्शन को सत्यापित करने के साधन के रूप में यूए और पब नंबरों को मैन्युअल रूप से खोजना भी उपयोगी है।
  • इसके बाद वे-बैक मशीन में मिले संग्रहित पृष्ठों पर यूए/पब खोज को दोहराएं।
  • सामने आए यूआरएल  को DomainBigData.com में डालकर और यूए/पब खोज में प्राप्त जानकारी के लिए उपलब्ध इतिहास की खोज करके अपने निष्कर्षों की पुष्टि करें।

टिप्पणी: यदि आप किसी अच्छे नए उपकरण या डेटाबेस के बारे में जानते हैं जो पत्रकारों को चुनावी रिपोर्टिंग में उपयोगी है, तो कृपया hello@gijn.org पर साझा करें। अगला अध्याय-दो होगा जिसमें चुनावों की तैयारी के विषय में चर्चा होगी।

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रोवन फिलिप  जीआईजेएन के संवाददाता हैं। वे पूर्व में दक्षिण अफ्रीका के संडे टाइम्स के मुख्य संवाददाता थे। एक विदेशी संवाददाता के रूप में उन्होंने दुनिया भर के दो दर्जन से अधिक देशों से समाचार, राजनीति, भ्रष्टाचार और संघर्ष पर रिपोर्ट दी है।

 

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