The 500 euro note and 100 dollar bill are routinely used by money launderers to move large amounts of illicit currency. Image: Shutterstock
मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या दुनिया भर में चिंता का विषय है। इस विषय पर पत्रकार ओलिवर बुलॉफ की नई पुस्तक चर्चा में है। इसमें उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग को ऐसा अपराध बताया है, जिसके कारण कई अन्य अपराधों को बढ़ावा मिलता है। फोन चोरी, धोखाधड़ी, मादक पदार्थों की तस्करी और आतंकवाद जैसे अपराध मनी लॉन्ड्रिंग के कारण संभव हो पाते हैं। उनका आकलन है कि अवैध धन को इधर-उधर ले जाना अब पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है।
वेल्स (यूनाइटेड किंगडम) में जन्मे ओलिवर बुलॉफ 2014 से आर्थिक अपराधों पर लिख रहे हैं। अपनी नई खोजी पुस्तक ‘एवरीबॉडी लव्स आवर डॉलर्स’ में उन्होंने बताया है कि मनी लॉन्ड्रिंग की जीत कैसे हुई।
फैक्ट कोएलिशन के कार्यकारी निदेशक इयान गैरी ने फरवरी 2026 में इस पुस्तक पर एक चर्चा आयोजित की। इसमें ओलिवर बुलॉफ ने बताया कि हर साल मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल अनुमानित राशि चौंकाने वाली है। यह वैश्विक जीडीपी का लगभग 2-5% या 2-5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच है। यह दुनिया के तीसरे से ग्यारहवें सबसे धनी देशों में से एक के समान है। मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए दशकों विभिन्न संधियों, कूटनीति, कानूनों और कार्यबल बनाने के बावजूद इसमें कमी नहीं आई है।
इस किताब में मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी प्रणाली में मौजूद खामियों का पता लगाने और उसे ठीक करने के उपाय बताए। ओलिवर बुलॉफ ने जीआईजेएन को एक अलग साक्षात्कार में कहा कि इस किताब की कहानी दरअसल वकीलों, एजेंसियों और नियामकों के साथ मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों के बीच एक प्रतियोगिता है। मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों पर लगाम लगाने की कोशिशों को तत्काल नए-नए तरीकों से नाकाम कर दिया जाता है। ये लोग काफी शातिर अपराधी हैं। अपने पैसों को इधर-उधर करने के नए-नए तरीके खोजते रहते हैं। ये सभी नए आविष्कार एक के ऊपर एक जुड़ते जाते हैं। इसके कारण यह काम और भी जटिल हो जाता है। इन्हें समझना मुश्किल होता जाता है। जब आप इन सबको एक साथ मिलाते हैं, तो इसे समझना लगभग असंभव हो जाता है।
जब रूस में पुतिन सत्ता हासिल कर रहे थे, उस दौर में ओलिवर बुलॉफ ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की। मॉस्को में रॉयटर्स के लिए काम करते हुउ उन्होंने चेचन्या युद्ध को कवर किया। उनकी कई पुस्तकों को पुरस्कार मिले हैं। इनमें उन्होंने वैश्विक काले धन और इसके पश्चिमी समर्थकों की पड़ताल की है। जैसे, कानूनी फर्म, बैंक और जनसंपर्क कंपनियां, जो नकदी और प्रतिष्ठा को साफ करने में मदद करती हैं।
वह कोडा स्टोरी के लिए ‘ओलिगार्की’ न्यूज़लेटर लिखते हैं। वह लंदन की आलीशान संपत्तियों के ‘क्लेप्टोक्रेसी’ टूर का नेतृत्व कर चुके हैं।
‘ड्रग्स फॉर गुच्ची’
वेबिनार में ओलिवर बुलॉफ ने विस्तार से बताया – “मनी लॉन्ड्रिंग एक बेहद उद्यमशील गतिविधि है। इसमें 1980 के दशक के बाद से काफी अधिक जटिलता आ गई है।” उनकी किताब वैश्विक मनी लॉन्ड्रिंग की पहेली के कुछ दिलचस्प पहलुओं पर प्रकाश डालती है। इस अपराध से पैसा कमाने के ही कारण रूस इतने व्यापार प्रतिबंधों के बावजूद यूक्रेन में ड्रोन तैनात कर पा रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग के ही कारण अपराधी गिरोह दक्षिण-पूर्व एशिया से महिलाओं की तस्करी करके अमेरिका के विभिन्न शहरों में भेजते हैं।

ओलिवर बुलॉफ की नई खोजी पुस्तक – ‘एवरीवन लव्स आवर डॉलर्स’ – यह दुनिया भर में मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते खतरे की पड़ताल करती है। इमेज: बुलॉफ के सौजन्य से
साइपन और टिनियन के प्रशांत द्वीपों पर स्थित एक कैसीनो अब वीरान हो चुका है। लेकिन वहां ओलिवर बुलॉफ को चीनी नकदी की लॉन्ड्रिंग से संबंधित दस्तावेजों का भंडार मिला। इंग्लैंड के उपनगरीय इलाके में स्थित एक आउटलेट मॉल में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक महंगे हैंडबैग खरीदते हैं। यह दोनों जगहें वैश्विक पहेली हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के साथ बातचीत से ओलिवर बुलॉफ को इस पुस्तक की प्रेरणा मिली। उनसे ब्रिटेन के ऑक्सफोर्डशायर में स्थित एक डिजाइनर आउटलेट शॉपिंग सेंटर ‘बिसेस्टर विलेज’ के बारे में बातचीत हुई थी। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह मॉल चीनी खरीदारों के बीच कितना लोकप्रिय है। इस बात का ब्रिटेन के प्रेस ने भी अक्सर उल्लेख किया है।
उक्त पुलिस अधिकारी ने बताया कि लुई विटन हैंडबैग की अंधाधुंध खरीदारी के पीछे बड़ा रहस्य है। बेशक कुछ लोगों को खरीदारी का शौक होता है। लेकिन कुछ अन्य लोगों के लिए यह मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका है। चीन की फैक्ट्रियां ब्रिटिश गैंगस्टरों को ड्रग्स भेजती हैं। वे लोग ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे चीनी छात्रों को नकद भुगतान करते हैं। छात्र या तो नकद लेकर बिसेस्टर विलेज जाते हैं या उसे अपने बैंक खातों में जमा कर देते हैं। फिर वे गुच्ची हैंडबैग या अन्य सामान खरीदकर उन्हें वापस चीन भेज देते हैं। वहां अपराधी फैशन के दीवानों को हैंडबैग बेच देते हैं। यह धंधा वीचैट के जरिए समन्वित होता है। इसे समझना मुश्किल होता है।
अगर मनी लॉन्ड्रिंग जीत गई है, तो पत्रकारों को इसकी रिपोर्टिंग कैसे करनी चाहिए? इस पर ओलिवर बुलॉफ ने पुस्तक चर्चा और जीआईजेएन के साथ एक अलग साक्षात्कार में अपने विचार पेश किए।
-
मनी लॉन्ड्रिंग रोकने के नियम समझें
ओलिवर बुलॉफ ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकने संबंधी प्रयासों के इतिहास का पता लगाया। इसके लिए वह उत्तरपूर्वी टेक्सास और मनी लॉन्ड्रिंग संबंधी सभी कानूनों के जनक कहलाने वाले सांसद राइट पैटमैन के गृह जिले में गए। उनका कार्यकाल 1929 से 1976 तक था। उनके प्रयासों से अमेरिकी कांग्रेस ने 1970 में बैंकिंग गोपनीयता अधिनियम पारित किया। इसके अनुसार अमेरिकी बैंकों को निगरानी और रिपोर्टिंग के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का पता लगाने और उसे रोकने में सरकारी एजेंसियों की सहायता करना अनिवार्य किया गया। बैंकों को 10,000 अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक के लेनदेन की रिपोर्ट करना भी जरूरी बनाया गया। यह गृहयुद्ध के दौरान कर्जों से निपटने के लिए एक निष्पक्ष वित्तीय प्रणाली बनाने की कोशिश थी।
वेबिनार में ओलिवर बुलॉफ ने बताया- “यह एक नया विचार था। वित्तीय संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे अपने द्वारा स्थानांतरित किए जा रहे धन के स्रोत की जांच करें।”
मनी लॉन्ड्रिंग से लड़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। वैश्विक सहयोग मामले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि 1989 में सामने आई। फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) का गठन किया गया। यह एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है। यह अनुशंसा करके, अनुपालन नियम निर्धारित करके, देशों के मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी मानकों का मूल्यांकन करके और उच्च जोखिम वाले क्षेत्राधिकारों की पहचान करके मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद वित्तपोषण का मुकाबला करता है।
ओलिवर बुलॉफ ने साइपान और टिनियन में अपने अनुभवों और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मिले दस्तावेजों का इस्तेमाल करके एफएटीएफ के भीतर ‘हितों के टकराव’ के एक व्यापक मुद्दे को स्पष्ट किया। उत्तरी मारियाना द्वीप समूह (सीएनएमआई) संयुक्त राज्य अमेरिका का एक राष्ट्रमंडल है। यह गुआम के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसके कैसीनो के माध्यम से भारी मात्रा में मनी लॉन्ड्रिंग की गई। जबकि मार्शल द्वीप समूह जैसे अन्य क्षेत्रों को अपतटीय वित्त और बैंकिंग गोपनीयता के लिए एफएटीएफ की अधिक कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ा।
ओलिवर बुलॉफ ने कहा कि सीएनएमआई स्थित कैसीनो पर फिनसेन (अमेरिकी वित्तीय अपराध प्रवर्तन नेटवर्क) और स्थानीय प्रवर्तन उपायों द्वारा भारी जुर्माना लगाया गया। लेकिन सामान्य तौर पर सीएनएमआई एक बड़ी समस्या रही है। अमेरिकी सुरक्षा में एक वास्तविक खामी है। विशेष रूप से चीन से होने वाले मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के मामलों में यह कमी है।
इस साल एफएटीएफ के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। पहली जुलाई 2026 को ब्रिटेन एफएटीएफ की अध्यक्षता संभालेगा। इस साल मूल्यांकनकर्ता वाशिंगटन जाएंगे क्योंकि अमेरिका अपने मनी लॉन्ड्रिंग विरोधी मानकों की समीक्षा प्रक्रिया से गुजर रहा है। अवैध वित्तपोषण रोकने के मामले में अमेरिकी नेतृत्व में गिरावट आई है। अमेरिका ने ऐतिहासिक रूप से अवैध वित्तपोषण से लड़ने और दोषियों को जेल भेजने में अग्रणी भूमिका निभाई है। लेकिन ओलिवर बुलॉफ के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में कॉर्पोरेट पारदर्शिता अधिनियम को कमजोर करके गिरावट का स्पष्ट संकेत दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में होंडुरास के पूर्व राष्ट्रपति जुआन ऑरलैंडो हर्नांडेज़ को क्षमादान प्रदान किया। अमेरिकी सरकार द्वारा क्रिप्टोकरेंसी को बढ़ावा दिया जा रहा है। संदिग्ध कंपनियों को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की अनुमति मिल रही है। यह चीजें मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ आधिकारिक अमेरिकी नीति में नरमी का संकेत हैं।
ओलिवर बुलॉफ ने कहा – “अगर अमेरिका को वित्तीय अपराध से निपटना हो, तो उसे विभिन्न राज्यों में पंजीकृत विभिन्न कॉर्पोरेट संरचनाओं के मालिकों के बारे में अधिक पारदर्शिता बरतनी होगी। कम से कम कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसा करना जरूरी है। एफएटीएफ की स्थापना के समय बनाई गई 40 सिफारिशों को भी अपडेट करने की आवश्यकता है।”
-
बड़े नोटों से मनी लॉन्ड्रिंग को बढ़ावा मिलता है
ओलिवर बुलॉफ लिखते हैं- “डॉलर तथा कुछ हद तक यूरो और पाउंड इस अपराध की अंतरराष्ट्रीय मुद्रा हैं। नोट किसी भी मनी लॉन्डरर के लिए सबसे उपयोगी साधन हैं। बड़े नोटों के मामले में यह बात अधिक लागू होती है। बड़ी रकम को स्थानांतरित करने के लिए इनकी कम संख्या की आवश्यकता होती है। लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस के सहायक आयुक्त डेविड वेनेस ने कहा था कि मेडेलिन और मॉस्को के बीच की कड़ी 100 डॉलर का नोट है।”
ओलिवर बुलॉफ के अनुसार मुद्रित होने वाले डॉलर के मूल्य का अस्सी प्रतिशत 100 डॉलर के नोटों के रूप में होता है। यह अविश्वसनीय है, क्योंकि ये नोट अक्सर देखने को नहीं मिलते। इन 100 डॉलर के नोटों में से लगभग 70-80% विदेशों में जाते हैं। इसके कारण वे दवाओं की तुलना में निर्यात के रूप में अधिक मूल्यवान हो जाते हैं। इनका बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उपयोग किया जाता है।
मनी लॉन्ड्रिंग का संबंध छपे हुए नोटों की अधिक मांग से भी है। अपने अध्याय ‘द बक स्टार्ट्स हियर’ में ओलिवर बुलॉफ ने टेक्सास का उल्लेख किया। इसके फोर्ट वर्थ क्षेत्र में वेस्टर्न करेंसी फैसिलिटी फेडरल रिजर्व के लिए अधिकांश नए डॉलर छापती है। रोजमर्रा के लेन-देन में नकदी के घटते उपयोग के बावजूद भारी मांग को पूरा करती है।
तो फिर देश अपनी आवश्यकता से कहीं अधिक नोट क्यों छाप रहे हैं। अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप, न्यूजीलैंड और सिंगापुर में भी ऐसा क्यों हो रहा है? बुलॉफ के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्येक व्यक्ति पर 7,357 अमेरिकी डॉलर छपे हैं। यूरो क्षेत्र में प्रत्येक निवासी के लिए 4,500 यूरो प्रचलन में है।
ओलिवर बुलॉफ का कहना है कि केंद्रीय बैंक इस ‘गायब’ मुद्रा के बारे में आश्चर्यजनक रूप से कम बोलते हैं। अधिकांश लोग छोटे नोटों का उपयोग करते हैं। इसके बावजूद बड़े नोट इतने लोकप्रिय क्यों हैं? 1970 के दशक में, मैकिन्से के एक सलाहकार ने बताया कि अमेरिका में केवल दो लेनदेन बड़े, पता न चलने वाले, गैर-क्रेडिट लेनदेन पर निर्भर करते हैं। पहला लाभ-प्रेरित अपराध है… दूसरा कर चोरी है।
-
स्टेबल कॉइन्स का उदय
ओलिवर बुलॉफ ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी ने दुनिया भर में काले धन को स्थानांतरित करने के पुराने तरीकों को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं किया है। लेकिन क्रिप्टोकरेंसी अब मनी लॉन्ड्रिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह दुनिया भर में धन को स्थानांतरित करने का एक कम लागत वाला एक तेज़ तरीका है। क्रिप्टोकरेंसी मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों के लिए वरदान है। क्रिप्टोकरेंसी और स्टेबल कॉइन्स वित्तीय प्रणाली से बाहर काम करते हैं। विशेष रूप से स्टेबल कॉइन्स एक बढ़ता हुआ लेकिन कम आंका गया खतरा है।
वेबिनार में ओलिवर बुलॉफ ने कहा- “एक घटना ने मनी लॉन्ड्रिंग और अपराध को बढ़ावा देने वाले राज्यों के खिलाफ लड़ाई को भी आधार प्रदान किया है। वह है डॉलर के एकाधिकार के माध्यम से वैश्विक वित्तीय प्रणाली पर अमेरिकी प्रभुत्व। लेनदेन को न्यूयॉर्क के माध्यम से मंजूरी मिलने के कारण अमेरिका को रूसी शासन की गतिविधियों पर एक हद तक अधिकार क्षेत्र प्रदान किया है। यह पुतिन और अन्य सहयोगी पक्षों के लिए ताकत का एक वास्तविक स्रोत और कमजोरी का एक वास्तविक स्रोत रहा है।”
उन्होंने आगे कहा कि टेथर (यूएसडीटी) और यूएसडीसी जैसे स्टेबल कॉइन अपराधियों को अमेरिकी अधिकार क्षेत्र के बिना अमेरिकी डॉलर में लेनदेन करने की क्षमता प्रदान करते हैं। कोलंबियाई ड्रग कार्टेल और ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड जैसे संगठन स्टेबल कॉइन का इस्तेमाल कर रहे हैं। कंबोडिया में चीनी संगठित अपराध समूहों द्वारा संचालित घोटालेबाज़ी के अड्डे चल रहे हैं। इनके मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क अब बहुत बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं।
-
बताने लायक कहानियां खोजें
ओलिवर बुलॉफ अपनी किताब के अंत में लिखते हैं कि मूल चुनौती यह है कि हम मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार को कैसे उजागर कर सकते हैं ताकि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके?
वे लिखते हैं – “मुझे जो एकमात्र तरीका पता है, वह है कहानियां सुनाना। मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में निष्क्रियता से होने वाले नुकसान को उजागर करना। इस बात पर ज़ोर देना कि अगर सरकारें ज़रूरी कदम उठाएं तो स्थिति कितनी बेहतर हो सकती है।”
जीआईजेएन ने इस बिंदु पर विस्तार से बताने का आग्रह किया। ओलिवर बुलॉफ समझाते हैं – “सबसे बड़ी कठिनाई राजनेताओं को इस समस्या की गंभीरता के बारे में समझाना है। यह केवल वित्तीय प्रणाली तक ही सीमित नहीं है। यह अर्थव्यवस्था के हर पहलू में समाया हुआ है। पत्रकार और शोधकर्ता यह समझने का प्रयास करें कि व्यापार नेटवर्क के माध्यम से आपराधिक धन कैसे स्थानांतरित होता है। यह पता लगाएं कि ये सभी ‘लापता’ नोट कहां पहुंच रहे हैं?”
वे आगे कहते हैं – “मुझे नहीं लगता कि समस्या पत्रकारों के लिए सामग्री की कमी है। मुझे लगता है कि किसी कारणवश इन कहानियों का उतना प्रभाव नहीं पड़ पा रहा है जितना पड़ना चाहिए। हमें कहानियों को बताने के तरीके में अधिक रचनात्मकता की आवश्यकता है। जनता में चिंता पैदा हो, और राजनेताओं के पास सही काम करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।”
एलेक्सा वैन सिकल: एक पत्रकार और संपादक हैं। उन्हें डिजिटल और प्रिंट पत्रकारिता, प्रकाशन, और अंतरराष्ट्रीय थिंक टैंक और गैर-लाभकारी संगठनों में काम करने का अनुभव है। जीआईजेएन में शामिल होने से पहले वह पुरस्कार विजेता विदेशी पत्रकारिता और यात्रा पत्रिका, रोड्स एंड किंगडम्स की वरिष्ठ संपादक और पॉडकास्ट निर्माता थीं।
अनुवाद: डॉ. विष्णु राजगढ़िया