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Ariadne Papagapitos, Lighthouse Reports

सिर्फ एक ईमेल के लहजे से खतरे में पड़ सकती है साझा जांच: सात साल के अनुभव

आजकल साझेदारी आधारित खोजी पत्रकारिता के काफी प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे सहयोग विभिन्न देशों की सीमाओं के पार भी होते हैं जिसके कारण वैश्विक पत्रकारिता संभव हो पाती है। विभिन्न साझेदारों के संसाधनों, अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ मिलता है। ऐसे सहयोग को सर्वोत्तम माना जाता है, जो सहज हों। जिसमें प्रत्येक भागीदार की बात सुनी जाती हो। इसमें सभी भागीदार अपना योगदान देते हैं। उनमें किसी मतभेद पर चर्चा के जरिए जांच को समृद्ध किया जाता है। सबके प्रयासों से अंतिम जांच काफी व्यापक होती है।

GIJN Investigative Journalism Week, October 2026

Upcoming event

खोजी पत्रकारिता सप्ताह: दुनिया भर के पत्रकारों के लिए नया वैश्विक ऑनलाइन आयोजन
26–30 अक्टूबर 2026

जानकारी ↗
Ukrainian refugees at Lviv railway station in 2022, waiting for a train to leave Ukraine. Image: Shutterstock

प्रवासन और विस्थापितों पर रिपोर्टिंग कैसे करें

किसी आपात स्थिति में सुरक्षित आवागमन के अभाव और हताशा में भी लोग पलायन करते हैं। रेगिस्तानों को पार करने वाले सीलबंद मालवाहक ट्रकों से लेकर यूरोप की सीमाओं के पास गोपनीय अस्थायी हिरासत केंद्रों जैसे मुद्दे अहम हैं। विभिन्न देशों के बीच प्रवासियों का आवागमन आज पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

संसाधन गाइड

भुखमरी और खाद्य असुरक्षा की जांच के लिए गाइड

लगातार भूख के कारण लोगों की सेहत और विकास को दीर्घकालिक नुकसान होने का खतरा है। इनकी संख्या भी चौंकाने वाली है। हाल के सालों में कुछ सुधार के बावजूद यूनाइटेड नेशंस का अनुमान चिंताजनक है। इसके अनुसार दुनिया की 67.3 करोड़ यानी 8.2% आबादी अब भी खाने की कमी से जूझ रही है। गरीबी, अक्षम फूड सिस्टम और आर्थिक असमानता इसके लिए जिम्मेवार है।

डिजिटल घोटाले, जानलेवा अस्पताल, भयावह आप्रवासन : 2025 में भारत की सर्वश्रेष्ठ खोजी खबरें

खोजी पत्रकारिता धीरे-धीरे अंग्रेजी मीडिया से निकलकर स्थानीय भाषा के समाचार पत्रों के दफ्तरों की ओर बढ़ रही है। हिंदी अखबार और स्वतंत्र यूट्यूब पत्रकार, खोजी पत्रकारिता को अपना रहे हैं। इनमें खास तौर पर स्थानीय भाषाओं के पत्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

नई तकनीक और एआई पर चर्चा के साथ खोजी पत्रकारों के वैश्विक सम्मेलन की शुरुआत

इन सबके बावजूद, पत्रकारों के सामने एक नाजुक जिम्मेदारी, नफरत को अनजाने में बढ़ावा न देने की है। पैनलिस्टों ने सुझाव दिया कि पत्रकारों को नफरत भरे संदेशों को संदर्भ सहित रिपोर्ट करना चाहिए। उनका प्रसार कम से कम रखना चाहिए। निशाने पर आए समुदायों की आवाज़ को प्रमुखता देनी चाहिए और गालियों या नफरत भरी भाषा को सीधे दोहराने से बचना चाहिए।

संसाधन गाइड

AI का उपयोग करके तैयार किए गए कंटेंट का पता कैसे लगाएं

पहले एआई से बनी फोटो के टेक्स्ट में कुछ अक्षर खराब आते थे। लेकिन अब वह समस्या नहीं रही। अब कई एआई मॉडल में त्रुटिहीन टाइपोग्राफी मिलती है। ओपेन एआइ ने डेल-ई थ्री को विशेष रूप से टेक्स्ट सटीकता के लिए प्रशिक्षित किया है। मिडजर्नी वी-सिक्स ने “सटीक टेक्स्ट” को एक विपणन योग्य विशेषता के रूप में जोड़ा है। पहले टेक्स्ट की खराबी को एआई फोटो पहचानने का आसान तरीका समझा जाता था। लेकिन यह विधि अब शायद ही कभी काम करती है। इसी तरह, किसी फोटो में बेमेल कान, अस्वाभाविक रूप से विषम आंखें, रंगे हुए दांत जैसी समस्या भी अब खत्म होती जा रही है। जनवरी 2023 में उत्पन्न पोर्ट्रेट छवियों में आसानी से पता लगाने योग्य कमियां दिखाई देती थीं। लेकिन अब विश्वसनीय चेहरे उत्पन्न हो रहे हैं।

An illustration shows the shadows of four reporters in the choppy seas of data journalism, making their way towards a lighthouse.

एशिया में डेटा पत्रकारिता : मीडिया, समुदाय और साक्ष्यों के नए रिश्ते

इंडिया-स्पेंड धीमे और धैर्यपूर्ण डेटा कार्य की ताकत को दर्शाता है। लेकिन एल्गोरिदम की गति डेटा पत्रकारिता में एक कमज़ोर बिंदु को उजागर करती है। रॉयटर्स 2025 फ़ेलो और बूम लाइव की उप-संपादक, करेन रेबेलो कहती हैं – “एल्गोरिदम के सामाजिक प्रभाव पर अधिकांश डेटा-संचालित शोध अनुदान-वित्त पोषित हैं। मुख्यधारा के समाचार संस्थान इसमें कोई निवेश नहीं कर रहे हैं।”

एशिया : सरकारी खजाने की लूट पर साझा खोजी पत्रकारिता

एक समय किर्गिज़स्तान की गिनती मध्य एशिया के सबसे लोकतांत्रिक गणराज्यों में होती थी। यहां वास्तविक चुनाव होते थे। एक सशक्त नागरिक समाज और एक जीवंत मीडिया परिदृश्य था। लेकिन एक लोकलुभावन और निरंकुश राष्ट्रपति के शासन में कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों पर भारी दबाव हैं।