Javier Milei, the Argentine President, surrounded by journalists while he was still on the campaign trail. Image: Shutterstock

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जब सरकारें प्रेस के खिलाफ हों तब पत्रकार क्या करें: एक संपादक के सुझाव

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‘ला नेसिओन’ – यह अर्जेंटीना का एक प्रमुख दैनिक अखबार है। ह्यूगो अल्कोनाडा मोन इसके खोजी संपादक हैं। राजनीति में भ्रष्टाचार पर वह एक दशक से अधिक समय से खोजी पत्रकारिता कर रहे हैं। यही कारण है कि अर्जेंटीना की राजधानी ‘ब्यूनस आयर्स’ के सत्ता गलियारों में उन्हें पसंद नहीं किया जाता।

परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय टीवी चैनलों ने उन पर देशद्रोह जैसे आरोप लगा दिए गए। उनके टेलीफोन टैप कराने के प्रयासों की भी बात सामने आई। उनकी पत्नी, बच्चों और माता-पिता का सरकारी एजेंटों द्वारा पीछा किया गया। उन्होंने जिन लोगों की जांच की है, उनके तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। ट्विटर पर भी उन्हें काफी अपमानित किया गया।

‘रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म‘ के एक सेमिनार में ह्यूगो अल्कोनाडा मोन ने मजाकिया लहजे में कहा- “ट्विटर पर मैं अपमान का रोजर फेडरर (टेनिस खिलाड़ी) जैसा हूं। दक्षिणपंथ और वामपंथ, दोनों खेमों की तरफ से मुझ पर मिसाइलें फेंकी जाती हैं।“

अर्जेंटीना के नए राष्ट्रपति जेवियर माइली काफी विवादों में घिरे हैं। वह एक ‘अराजक-पूंजीवादी‘ हैं। उनके अतीत की जांच का प्रयास किया गया। उन्होंने जिन आर्थिक नीतियों को खत्म करने की बात कही थी, उसमें सफल नहीं हो सके।

राष्ट्रपति जेवियर माइली ने पद संभालते ही प्रेस के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने की घोषणा की थी। उनकी योजनाओं में अर्जेंटीना के सरकारी स्वामित्व वाले मीडिया संस्थानों का निजीकरण करना भी शामिल था। अपनी घोषणा के अनुसार उन्होंने मार्च 2024 में देश की सबसे बड़ी प्रेस एजेंसी ‘तेलम‘ को बंद कर दिया

‘रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स‘ ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रपति जेवियर माइली द्वारा पत्रकारों के खिलाफ उग्र जुबानी हमले किए जाने के कारण अर्जेंटीना में मीडिया की स्वतंत्रता पर खतरा है। इस संगठन के नवीनतम विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में अर्जेंटीना 66 वें स्थान पर है। पिछले साल की तुलना में 26 अंकों की चिंताजनक गिरावट आई है।

ह्यूगो अल्कोनाडा मोन कहते हैं- “हमारे देश में प्रेस के लिए काफी प्रतिकूल माहौल है। पत्रकारों को प्रताड़ित करने के मामले में अर्जेंटीना के वर्तमान राष्ट्रपति जेवियर माइली ने अपने सभी पूर्ववर्तियों को पीछे छोड़ दिया है। वह सोशल मीडिया में ट्रोल्स द्वारा पत्रकारों पर हमलों का जश्न मनाते हैं। उन हमलों को लाइक या रीट्वीट करते हैं। वह पत्रकारों को नजरअंदाज कर रहे हैं और अपने ट्विटर में पत्रकारों को ब्लॉक कर रहे हैं।“

जुलाई 2023 में राष्ट्रपति ने ह्यूगो अल्कोनाडा मोन को भी ब्लॉक कर दिया था। चुनाव के पहले ही मोन ने उनके साथ साक्षात्कार के लिए अनुरोध किया गया था। दिसंबर 2023 में राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद भी ऐसा अनुरोध किया गया। लेकिन उन्होंने अब तक इसका अवसर नहीं दिया है।

फोटो: राजधानी ‘ब्यूनस आयर्स‘ में अर्जेंटीना की प्रेस एजेंसी ‘तेलम‘ के समर्थन में प्रदर्शन। सरकार ने मार्च 2024 में इसे बंद कर दिया था। इमेज : शटरस्टॉक

ह्यूगो अल्कोनाडा मोन कहते हैं- “अर्जेंटीना जैसे देश में सार्वजनिक मीडिया पर निशाना बनाना ठीक नहीं। इससे देश में नागरिकों के बड़े हिस्से को मीडिया रेगिस्तान में छोड़ देने जैसा जोखिम है। इससे स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही पर रिपोर्टिंग भी नहीं हो सकेगी। अगर सार्वजनिक मीडिया को खत्म कर दिया गया, तो लाखों अर्जेंटीना वासी किसी भी तरह की जानकारी से वंचित हो जाएंगे। इससे देश भर में सार्वजनिक मीडिया में कार्यरत अच्छे पत्रकारों की खबरों से भी नागरिक वंचित हो जाएंगे। निजी मीडिया संस्थानों के सरकारी विज्ञापन में कटौती से इनके अस्तित्व पर ही खतरा पैदा हो सकता है ।“

उन्होंने कहा- “अर्जेंटीना पिछले एक दशक से लंबी मंदी के दौर से गुजर रहा है। यह ऐसा दौर है, जिसमें निजी विज्ञापनदाता कम हो रहे हैं। मीडिया सब्सक्राइबर भी पर्याप्त रूप से नहीं बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में माइली सरकार निजी मीडिया संस्थानों के सार्वजनिक विज्ञापन में भी कटौती कर रही है। यह एक बड़ी समस्या है।“

माइली की सरकार ने सार्वजनिक मीडिया प्लेटफार्मों पर ‘प्रचार‘ आउटलेट होने का सीधा आरोप लगाया है। साथ ही, पत्रकारिता के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग करने वाली प्रणाली की आलोचना की है। लिहाजा, सार्वजनिक मीडिया के खिलाफ सरकार के ऐसे कदमों को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए लिए खतरनाक समझा जा रहा है।

जाहिर है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारों के लिए यह स्थिति बेहद प्रतिकूल है। लेकिन ह्यूगो अल्कोनाडा मोन के पास खोजी पत्रकारिता का दो दशकों का शानदार अनुभव है। इस दौरान उन्होंने कई उतार-चढ़ाव का सामना किया है। उनके पास खोजी पत्रकारिता के प्रति सरकार के शत्रुतापूर्ण रवैये से निपटने और सुरक्षित रहने के लिए काफी सुझाव हैं। पत्रकार किस तरह अपना काम करें, ताकि उन्हें लोग पढ़ना पसंद करें, इस पर भी उन्होंने कई सुझाव दिए।

फोटो: ह्यूगो अल्कोनाडा मोन (खोजी संपादक, ला नेसिओन)। इमेज: स्क्रीनशॉट, ला नेसिओन

  • कोई बड़ी खबर हो, तो पहले अन्य पत्रकारों को सचेत कर दें

ह्यूगो अल्कोनाडा मोन ने खोजी पत्रकारिता के दौरान किसी जांच में कई महीने और कई वर्ष भी लगाए हैं। रिपोर्टिंग के अंतिम चरण में वह अन्य अखबारों, रेडियो और टीवी के सहकर्मियों को बता देते हैं कि वह एक खास स्टोरी कर रहे हैं। इससे दो उद्देश्य पूरे होते हैं। यदि स्टोरी प्रकाशित होने के बाद उनकी विश्वसनीयता पर कोई हमला हो, तो वह अन्य पत्रकारों से इस बारे में बात करने के लिए उन्हें फोन कर सकते हैं। साथ ही, यह कहानी को प्रचारित करने में भी मदद करता है।

उन्होंने बताया- “जब भी हम कोई संवेदनशील जांच रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले होते हैं, तो मैं कुछ पत्रकारों को बताता हूं कि हम क्या कर रहे हैं। हम उन्हें किसी विशेष विषय और हमारी जांच के खुलासे की जरूरी जानकारी देते हैं। हम उनके टीवी या रेडियो शो में आने का प्रस्ताव भी देते हैं। उनसे कहते हैं कि अगर कोई ऐसी खबर से इंकार करे, या मुझ पर कोई आरोप लगाए, तो आप मुझे कॉल करें।”

  • अपनी सुरक्षा-जाल का नेटवर्क बनाएं

उन्होंने हाल ही में खोजी पत्रकारों का एक राष्ट्रीय गठबंधन गठित होने की जानकारी दी। कहा कि खोजी पत्रकारों के बीच प्रतिस्पर्धा होना स्वाभाविक है। लेकिन यह याद रखना भी महत्वपूर्ण है कि आपको क्या एकजुट करता है। ऐसी नेटवर्किंग का मतलब है कि आपके पास एक बड़ा सुरक्षा-जाल है। इसका मकसद एक-दूसरे की मदद करना है। हम एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। लेकिन हम अपनी भूमिकाओं में अकेले नहीं रहें, या अकेले सैनिक की तरह न रहें। यदि आपको कोई खतरा हो, तो हमें कॉल करें। यदि आप अकेले मुकाबला नहीं कर सकते, तो हमें कॉल करें। यदि आपको धमकी दी जा रही है, तो हमें कॉल करें।

उन्होंने कहा कि नेशनल प्रेस फोरम, एफओपीईए (FOPEA), कोलंबिया के गैबो फाउंडेशन और कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स से जुड़ना काफी सार्थक रहा। एक स्टोरी के लिए जब उन पर हमला किया गया, तो उन्हें सबसे मदद मिली। उन्होंने कहा- “मैं अपना सुरक्षा-जाल बनाने और समुदाय की भावना विकसित करने की कोशिश कर रहा हूं। इसलिए जब कोई परेशानी आती है, तो मैं अनगिनत लोगों से फ़ोन करके मदद मांग सकता हूं।”

  • संबंध बनाएं, विदेशों में भी, जहां भी संभव हो

जिन देशों में प्रेस की आज़ादी पर खतरा बढ़ रहा है, वहां के पत्रकारों के साथ काम करने में भी मदद मिल सकती है। पत्रकारों को स्थानीय या अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संगठनों के साथ गठबंधन बनाकर काम करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा- “आप जिन भौगोलिक सीमाओं तथा अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हों, उन्हें दरकिनार करने का प्रयास करें।“

“आपका लक्ष्य क्या है? आपका लक्ष्य समाचार फैलाना है। यदि आप स्वयं ऐसा नहीं कर सकते है तो अन्य मीडिया संगठनों तथा अन्य पत्रकारों से सहायता लेने का प्रयास करें। कई बार हमलोग सहयोगी मीडिया संगठनों का एक समूह बनाकर ऐसी कहानियाँ प्रकाशित करते हैं जिन्हें कोई मीडिया संस्थान अपने देश में प्रकाशित करने में सक्षम न हो। कुछ अन्य स्थितियों में, हम सीमाओं से बचने के लिए दस अलग-अलग देशों में एक साथ किसी स्टोरी को प्रकाशित करते हैं।“

  • डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म और सोशल मीडिया का लाभ उठाएं

उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्लेटफार्मों के जरिए दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश करें। दर्शकों के पास अपनी स्टोरी भेजने के लिए सभी उपकरणों का उपयोग करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पत्रकारों को राजनीतिक या आर्थिक सीमाओं से निकलने में भी मदद कर सकते हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के नये उभरते प्लेटफ़ार्मों पर महारत हासिल करने को भी जरूरी बताया।

उन्होंने कहा- “आदर्श स्थिति यह है कि पूरी खबर प्रकाशित करने के लिए हमारे पास एक अच्छी वेबसाइट हो। लेकिन अगर हमारे पास वह नहीं है, तो कोई बात नहीं। आइए, हम ट्विटर, थ्रेड्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक और टेलीग्राम, व्हाट्सएप और लिंक्डइन जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करें। मैं अपनी हर स्टारी को सभी सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित कर देता हूं।“

कभी-कभी हमारी ‘ला नेसिओन‘ की वेबसाइट की तुलना में ट्विटर पर अधिक लोग हमारी खबर पढ़ते हैं। कभी-कभी मुझे ट्विटर से लोग ‘ला नेसिओन‘ पर जाते हुए मिलते हैं। कई बार ऐसा होता है जिसकी मैंने कभी उम्मीद नहीं की थी। क्या आप जानते हैं कि मेरे लेखों की ओर पाठकों को किसने आकर्षित किया? यह ट्विटर नहीं है, बल्कि यह इंस्टाग्राम है। इसने मुझे सचमुच हैरान कर दिया। मैंने पाया कि आम तौर पर ट्विटर या थ्रेड्स की तुलना में इंस्टाग्राम से मेरे लेखों पर अधिक लोग आते हैं।

  • याद रहे- ’हम काम पर हैं, युद्ध में नहीं’

उन्होंने कहा कि सत्ता और प्रेस के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। यह किसी एक देश तक सीमित मामला नहीं है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन से निपटने के लिए वाशिंगटन पोस्ट के कार्यकारी संपादक मार्टी बैरन की 2023 की पुस्तक ‘कोलिज़न ऑफ पावर‘ (Collision of Power) पढ़ने योग्य है। ट्रम्प ने खुले तौर पर मीडिया के साथ जारी युद्ध की घोषणा की थी। कुछ पत्रकारों को उन्होंने ‘जनता का दुश्मन‘ करार दिया था। पुस्तक में मार्टी बैरन ने इस रिश्ते को अलग तरीके से प्रस्तुत किया। इसलिए हमें समझना होगा कि “हम काम पर हैं, युद्ध में नहीं।“

संदेश को दोहराते हुए, ह्यूगो अल्कोनाडा मोन ने कहा- “हमें अपना असली काम करते रहना है। आइए, हम पत्रकारिता करें। वे हमारा अपमान करना चाहते हैं। हमें डराने और अदालत में फंसाने की कोशिश करते हैं। लेकिन आइए, हम अपना काम करें। यह आसान नहीं है। कभी-कभी यह अच्छा नहीं होता। कभी-कभी आपका परिवार कष्ट झेलता है। फिर भी आप आगे बढ़ते रहते हैं। लेकिन आपको इसे स्मार्ट तरीके से करना होगा।”

‘रॉयटर्स इंस्टीट्यूट‘ के वेबिनार में ह्यूगो अल्कोनाडा मोन को सुनें:


लौरा डिक्सनLaura Dixon जीआईजेएन में वरिष्ठ संपादक और यूके की स्वतंत्र पत्रकार हैं। उन्होंने कोलंबिया, अमेरिका और मैक्सिको से रिपोर्ट की है। उनका काम द टाइम्स, द वाशिंगटन पोस्ट और द अटलांटिक में प्रकाशित हुआ है। उन्हें आईडब्ल्यूएमएफ और पुलित्जर सेंटर से फ़ेलोशिप मिली है।

अनुवाद : डॉ. विष्णु राजगढ़िया

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