Ariadne Papagapitos, Lighthouse Reports
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Image: Ariadne Papagapitos / Lighthouse Reports

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सिर्फ एक ईमेल के लहजे से खतरे में पड़ सकती है साझा जांच: सात साल के अनुभव

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आजकल साझेदारी आधारित खोजी पत्रकारिता के काफी प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे सहयोग विभिन्न देशों की सीमाओं के पार भी होते हैं जिसके कारण वैश्विक पत्रकारिता संभव हो पाती है। विभिन्न साझेदारों के संसाधनों, अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ मिलता है। ऐसे सहयोग को सर्वोत्तम माना जाता है, जो सहज हों। जिसमें प्रत्येक भागीदार की बात सुनी जाती हो। इसमें सभी भागीदार अपना योगदान देते हैं। उनमें किसी मतभेद पर चर्चा के जरिए जांच को समृद्ध किया जाता है। सबके प्रयासों से अंतिम जांच काफी व्यापक होती है।

अनुभवी संपादक जानते हैं कि ऐसी सहयोग आधारित जांच में कितने प्रयास करने पड़ते हैं। ऐसी जांच में लगातार आने वाली नई जटिलताओं से निपटने के लिए दृढ़ता और संयम की आवश्यकता होती है। ऐसा कोई सार्वभौमिक तरीका नहीं है जिसका पालन किया जा सके। भले ही पत्रकार अन्याय को उजागर करने और बदलाव लाने की इच्छा से एकजुट हों।

लाइटहाउस रिपोर्ट्स की स्थापना 2019 में नीदरलैंड्स में हुई थी। यह अब प्रति वर्ष औसतन 12 जांच प्रकाशित करता है। हमारी इम्पैक्ट टीम के सदस्य प्रत्येक जांच के बाद भागीदारों से संपर्क करके प्रतिक्रिया लेते हैं। इसके आधार पर समीक्षा करके हम उन विवादों का दस्तावेज़ीकरण करते हैं, जिनका महत्व प्रकाशन के बाद अक्सर कम करके आंका जाता हो।

एक दिलचस्प उदाहरण देखें। सांस्कृतिक मतभेदों के कारण एक जांच के दौरान हमारे एक सहयोगी ने अचानक पीछे हटने की बात कही। मेरे एक सहकर्मी द्वारा भेजे गए ईमेल के अटपटे ‘व्यावसायिक’ लहजे से वह नाराज़ थे। अगर हमारे एक अन्य सहयोगी ने हस्तक्षेप न किया होता तो वह निश्चित रूप से काम छोड़ देते। उन्होंने एक समीक्षा बैठक के दौरान अपनी इस निराशा को साझा किया। इससे हमें अपनी संचार शैली को सुधारने और उस पर अधिक ध्यान देने की प्रेरणा मिली।

लेकिन ऐसी समझ विकसित करना कठिन है। सत्ता की गतिशीलता, घटती धनराशि और अत्यधिक काम का बोझ कई पत्रकारों को अपने अनुभव खुलकर बताने से रोकते हैं। इसलिए सितंबर 2025 में हमने समीक्षा प्रक्रिया का विस्तार किया। विगत कुछ जांचों में हमारे साथ सहयोग करने वाले 198 लोगों के बीच एक गुमनाम सर्वेक्षण किया गया। इनमें पारंपरिक मीडिया संस्थानों और निर्वासित न्यूज़ रूम के जुड़े पत्रकार और फ्रीलांसर शामिल थे। हमने स्वतंत्र सलाहकारों रोज़ी मैगुइरे और अन्ना डेंट के साथ मिलकर यह प्रयोग किया। हमने अपने भागीदारों से पूछा कि वे एक सहयोगी जांच से क्या चाहते हैं? हमारी प्रक्रियाओं से उन्हें कैसी मदद की अथवा उन्हें क्या परेशानी आई? हालांकि प्रश्न और उत्तर लाइटहाउस में हमारे काम से संबंधित थे। लेकिन ये उत्तर साझा जांच करने वाले अन्य लोगों के लिए भी उपयोगी हैं।

हमें 76 लोगों ने काफी स्पष्ट और विनम्र तरीके से जवाब दिए। हमने उत्तरदाताओं से सात उद्देश्यों की सूची में से तीन सहयोग उद्देश्यों को चुनने और अन्य सुझाव देने के लिए कहा। प्राथमिकता के क्रम में लक्ष्य इस प्रकार थे:

हमारे भागीदारों ने कहा कि वे ऐसे कार्यों को महत्व देते हैं जिनका वास्तविक दुनिया पर प्रभाव हो। ऐसी सहयोग आधारित जांच, जो एक स्पष्ट और साहसिक दृष्टिकोण पर केंद्रित हों। ऐसी परियोजनाएं, जिनमें रचनात्मकता की गुंजाइश हो। उन्होंने आपसी सम्मान और समानता की कामना की। अधिक व्यावहारिक स्तर पर वे ऐसे विश्वसनीय और उत्तरदायी साझेदार चाहते थे जो स्पष्ट दिशा के साथ जांच का प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि किसी भी जांच में सभी भागीदारों की भूमिका स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।

उत्तरदाताओं के अनुसार उन्होंने हमारे साथ सहयोग आधारित जांच से अपने कई प्रमुख उद्देश्यों को प्राप्त कर लिया है। हम उन मुद्दों पर संतुष्टि दर जानने के लिए और भी गहराई से विश्लेषण करना चाहते थे, जिन्हें साझेदारों ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया था। वहां स्थिति पूरी तरह संतोषजनक नहीं थी।

जिन मीडिया संस्थानों को अपनी खबरों के प्रकार को व्यापक बनाने की परवाह थी, उनमें से आधे से भी कम संस्थानों ने हमारे साथ साझा जांच में अपना लक्ष्य हासिल किया। यही स्थिति उन संस्थानों की थी, जिन्होंने खुद ऐसी जांच नहीं कर पाने के कारण ऐसे सहयोग को महत्व दिया। कई संस्थानों के अनुसार हमारे साथ सहयोग के जरिए उन्हें लाइटहाउस के अलावा अन्य मीडिया साझेदारों से जुड़ने का अवसर मिला।

विचार करने के लिए बहुत कुछ था। लेकिन सौभाग्य से उत्तरदाताओं ने हमें आगे बढ़ने के लिए सुझाव दिए। इसमें से अधिकांश में संवाद करना और अपेक्षाओं का प्रबंधन करना शामिल था। उत्तरदाता चाहते थे कि हमारी तथ्य-जांच प्रक्रिया को पहले से ही साझा किया जाए। उस पर सहमति हो ताकि बाद में अनावश्यक तनाव से बचा जा सके। वे यह स्पष्ट करना चाहते थे कि प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए क्या आवश्यक है। वे अनुवर्ती जांचों में मदद के लिए भी लाइटहाउस की भूमिका के बारे में जानना चाहते थे।

खबर के लिए श्रेय देने और प्रकाशन की समय-सीमा को लेकर विवाद था। उत्तरदाताओं का मानना था कि प्रकाशन समय-सीमा पर छोटे संस्थानों की तुलना में बड़े मीडिया संस्थानों का अधिक नियंत्रण होता है। किसी जांच में देर से शामिल होने वाले स्टाफ पत्रकारों को भी उतना ही श्रेय मिलता है, जितना पहले से गहन परिश्रम करने वाले फ्रीलांसरों को। वे चाहते थे कि लाइटहाउस निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से इसका समाधान करे।

हम इन बिंदुओं पर विचार कर रहे हैं। हर चीज बेहतर करने के तरीकों खोज रहे हैं। हालांकि कुछ चीजें हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। लाइटहाउस के नेतृत्व में होने वाली साझा जांच में हम रेफरी नहीं, बल्कि टीम के कप्तान हैं। हम साझेदारों को प्रोत्साहित करते हैं। उनके बीच मध्यस्थता करते हैं। हम बेहतर व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं। इससे खोजी जांच को सामूहिक रूप से वांछित परिणामों की ओर प्रेरित करना संभव हो पाता है। हमारे लिए समझौते करना सामान्य बात है।

इसका मतलब यह नहीं कि सब कुछ जटिल है। सर्वेक्षण में हमने संचार के प्लेटफार्मों और तरीकों पर भी चर्चा की। हम जानना चाहते थे कि हमारे साझेदार किस तरह सूचना साझा करना चाहते हैं। क्या हम सभी को अपडेट रखने के लिए रिपोर्टिंग मेमो, जांच रोडमैप या सारांश तालिकाओं का उपयोग करें? क्या हम सिग्नल, स्लैक या व्हाट्सएप पर काम का समन्वय करें? सबसे अच्छा तरीका क्या हो?

जवाब था कि कोई भी तरीका चलेगा। उनकी जांच में चाहे जिस तरीके या प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया हो, लगभग सभी साझेदारों ने कहा कि उन्हें नियमित और व्यापक अपडेट मिलते रहे। उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ता था कि हम कैसे सूचित करते हैं। बस उन्हें सूचना मिलती रहे।


हुई यी टैन – लाइटहाउस रिपोर्ट्स की प्रबंध संपादक हैं। इससे पहले, वह द स्ट्रेट्स टाइम्स की बैंकॉक स्थित ब्यूरो प्रमुख थीं। वहां उन्होंने थाईलैंड, म्यांमार, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम की खबरों का नेतृत्व किया। लाइटहाउस रिपोर्ट्स एक गैर-लाभकारी संस्था है। यह अपने साझेदारों के साथ मिलकर कई प्रारूपों में सहयोगी जांच प्रकाशित करती है। यह संस्था सीमा पार की गहन जनहित जांचों पर ध्यान केंद्रित करती है। इसमें सूचना के अधिकार जैसे तरीकों को डेटा साइंस और विजुअल फोरेंसिक्स के साथ मिलाया जाता है।

अनुवाद : डॉ. विष्णु राजगढ़िया

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