A person draws project plans on a see-through meeting room wall in coloured pen.
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Photo: Kvalifik on Unsplash

आलेख

साझा रिपोर्टिंग में ‘समन्वयक’ का महत्व

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आजकल दुनिया भर में साझेदारी पर आधारित खोजी रिपोर्टिंग के प्रयोग हो रहे हैं। ऐसी परियोजनाओं की सफलता में ‘समन्वयक’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उसकी भूमिका एक मध्यस्थ, प्रबंधक और प्रेरक जैसी होती है। ‘खोजी समन्वयक’ की उभरती भूमिका को किसी खास परिभाषा में बांधना मुश्किल है। उसे किसी साझा जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जाता है। उस परियोजना में जितने अधिक भागीदार और देश शामिल होते हैं, उसके अनुसार यह भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। अगर जांच में कई तरह के पहलू शामिल हों, तब भी ‘समन्वयक’ की कुशलता काफी मायने रखती है।

एक खोजी समन्वयक को अक्सर एक ही मीडिया संस्थान अथवा विभिन्न भागीदारों की साझा जांच के प्रबंधन का कार्य सौंपा जाता है। उसके पास संबंधित परियोजना का व्यापक दृष्टिकोण होता है। इसमें जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं से लेकर संभावित प्रकाशन तिथि की जानकारी तक शामिल होती है। जांच के प्रारंभ से लेकर प्रकाशन और उसके बाद तक सभी मामलों में उसकी कार्यकारी भूमिका होती है। जैसे-

  • सीमा पार पत्रकारों का प्रबंधन करना।
  • समय सीमा निर्धारित करना।
  • शोध और साक्ष्यों का आयोजन करना।
  • मीडिया भागीदारों के बीच कानूनी और प्रकाशन समझौते कराना।

हेजल शेफील्ड (खोजी समन्वयक, एरिना फॉर जर्नलिज़्म इन यूरोप) कहती हैं कि जांच और उपलब्ध संसाधनों से समन्वयक की भूमिका काफी हद तक प्रभावित होती है। सीमा पार सहयोग में समन्वयकों की भूमिका पर उनका शोध अप्रैल 2025 में प्रकाशित हुआ था । उन्होंने कई सीमा पार जांचों में समन्वयक के बतौर काम किया है। जैसे-

  • ‘मनी टू बर्न’ – 2020 की इस परियोजना में आठ देशों के 11 न्यूज़ रूम में 16 पत्रकार शामिल थे।
  • ग्रीन टू ग्रे’ – 2025 की इस परियोजना के कारण 11 भाषाओं में 51 कहानियां प्रकाशित हुईं।

हेजल शेफील्ड कहती हैं- “इन समन्वयकों की मदद करने को लेकर हमारी समझ विकसित हो रही है। हर पत्रकार यह काम नहीं करना चाहता। इसके लिए एक प्रकार की व्यवस्थित समझ और काफी संगठनात्मक क्षमता की आवश्यकता होती है।”

जांच के चरणों के साथ समन्वयक के कार्य और चुनौतियों में भी बदलाव आते रहते हैं। स्पेनिश समाचार पत्र elDiario.es की उप-प्रबंध संपादक मारिया रामिरेज़ ने एक प्रसिद्ध गायिका पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने वाली परियोजना में समन्वयक की भूमिका निभाई। दो साल की एकल रिपोर्टिंग परियोजना के बतौर यह जांच शुरू हुई थी। इसे एक प्रकाशन भागीदार की तलाश थी। इसके बाद मारिया रामिरेज़ का काम शुरू हुआ। उनके अनुभव और मजबूत संपर्कों के नेटवर्क ने अमेरिकी स्पेनिश भाषा के समाचार पत्र ‘यूनिविजन’  को शुरू में प्रकाशन भागीदार के रूप में जोड़ा। समाचारपत्रों के बीच साझेदारी और प्रकाशन शर्तों पर सहमति बनाने में काफी समय लगता है। यह काफी महत्वपूर्ण दायित्व होता है। इस प्रक्रिया में समन्वयक अक्सर गहराई से शामिल होते हैं।

बातचीत में यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल पुनर्प्रकाशन तक सीमित समझौता नहीं होगा। इसमें आगे की रिपोर्टिंग से कहानी का विस्तार की संभावना थी। इसके आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जा सकता था। रिपोर्टिंग में ‘यूनिविजन’ के पत्रकारों को शामिल करने से कानूनी समझौते और भी जटिल हो गए। जैसे, मौजूदा स्रोतों तक पहुंच पर सहमति। मारिया रामिरेज़ के शुरुआती समन्वय कार्य का अधिकांश हिस्सा मुख्य रिपोर्टिंग के नए चरण से पहले विवरणों को अंतिम रूप देने संबंधी बैठकों में लगा रहा। हालांकि स्पेन में अभियोजकों ने कहानी के प्रकाशन के बाद जांच शुरू की। लेकिन बाद में उन्होंने यह कहते हुए मामला वापस ले लिया कि स्पेनिश अदालतों के पास विदेशों में कथित रूप से किए गए अपराधों की जांच करने का अधिकार क्षेत्र नहीं है।

इन्वेस्टिगेट यूरोप – यह सीमा पार खोजी पत्रकारिता का केंद्र है। इसमें प्रत्येक परियोजना का एक समन्वयक होता है। जांच संपादक क्रिस मैथ्यूज के अनुसार यदि जांच काफी बड़ी हो, तो एक से अधिक भी समन्वयक हो सकते हैं। समन्वयक प्रारंभिक परिकल्पना से लेकर उत्पादन और प्रकाशन तक परियोजना का मार्गदर्शन करता है। क्रिस मैथ्यूज बताते हैं- “हम किस चीज पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं? हमारा दृष्टिकोण क्या होगा? हम प्रकाशन तिथि का समन्वय कैसे करेंगे ताकि सभी साझेदारों, उनकी जरूरतों और उनकी समय-सारणी को ध्यान में रखना संभव हो?”

रूस पर लगे प्रतिबंधों की जांच – यह 2025 में प्रकाशित हुई थी। क्रिस मैथ्यूज इसके समन्वयक थे। यह जांच एक डेटा लीक से शुरू हुई थी, जिसका मुख्य पहलू साबित नहीं हो सका था। समन्वयक का काम जांच को सही दिशा देने के लिए सवाल पूछना था। उन्हें रूस, भारत और फ्रांस को शामिल करने वाली एक अलग जांच के लिए आवश्यक समय, कौशल और कर्मचारियों की रूपरेखा तैयार करना था। वे कहते हैं। “हमें इन सभी पहलुओं को एक सुसंगत कथा में पिरोना था।”

टाइमलाइन का निर्माण

नेली कालू (संपादकीय परियोजना और उत्पाद प्रबंधक, सेंटर फॉर कोलैबोरेटिव इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म (CCIJ) ने 2023 में एक साझा परियोजना का समन्वय किया। इसके आधार पर ‘डेमोक्रेसी डिफर्ड’ रिपोर्ट सामने आई। इसमें 2023 के नाइजीरियाई राष्ट्रपति चुनाव की वैधता की जांच हुई। CCIJ की अफ्रीका स्थित संपादक एवं अन्य संपादकों के साथ विभिन्न पहलुओं और मल्टीमीडिया दृष्टिकोणों पर चर्चा हुई। इसके बाद नेली कालू ने हर काम की समयरेखा बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।

CCIJ की संपादकीय परियोजना और उत्पाद प्रबंधक नेली कालू। इमेज : कालू के सौजन्य से

उन्होंने जांच को कई अध्यायों में विभाजित किया। जैसे, गलत सूचना, मतदाताओं का दमन इत्यादि। प्रत्येक अध्याय के लिए प्रासंगिक विशेषज्ञता वाले पत्रकारों को नियुक्त करने की योजना बनाई। शुरुआत में चार अध्याय थे। प्रत्येक अध्याय के लिए तीन से चार महीने की आवश्यकता थी। नेली कालू और उनकी टीम ने यह निर्धारित किया कि प्रत्येक विषय दूसरे से किस प्रकार संबंधित या स्वतंत्र हों, ताकि रिपोर्टिंग टीमों को एक-दूसरे के शुरू होने का इंतजार न करना पड़े।

प्रारंभिक चरण में नेली कालू ने CCIJ टीम के अन्य सदस्यों के साथ समन्वय स्थापित किया। उन्होंने संचार प्रबंधक से चर्चा करके जांच के लक्षित दर्शकों को परिभाषित किया। एक प्रभावशाली प्रकाशन रणनीति तैयार की गई। उन्होंने प्रकाशन तिथियों के रूप में दो सार्वजनिक अवकाशों (नाइजीरिया का स्वतंत्रता दिवस और लोकतंत्र दिवस) को ध्यान में रखा। यह निर्धारित किया कि जांच में कितना समय लगेगा?  कितने पत्रकारों और संपादकों की आवश्यकता होगी? दृश्य संपादक को क्या चाहिए होगा? बजटीय मदों का भी निर्धारण किया गया। जैसे, डेटा को सहेजने और स्क्रैप करने में कितना खर्च आएगा।

इस जांच में एक समय में 25 पत्रकार काम कर रहे थे। एक समन्वयक के बतौर उन सबसे नियमित संपर्क बनाए रखना, सहयोग और सहायता प्रदान करना इत्यादि नेली कालू की प्रमुख भूमिका थी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना था कि जांच सही दिशा में चल रही है और परियोजना की समयसीमा का पालन हो रहा है। उन्होंने जांच के प्रबंधन के लिए बेसकैंप नामक प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का उपयोग किया। इसमें प्रत्येक चरण को एक ऐसे कार्य में विभाजित किया गया, जिसे लॉग और ट्रैक किया जा सके। जैसे, किसी साक्षात्कार पूरा होना, किसी रिपोर्ट का फाइनल होना। हरेक काम को ‘पूर्ण’ के बतौर चिह्नित करने से पत्रकारों और संपादकों को प्रगति का पता चलता था।

इस दौरान नेली कालू ने नियमित रूप से साप्ताहिक या पाक्षिक बैठकों का आयोजन किया। इससे फील्ड रिपोर्टिंग से पहले विचार-विमर्श करने का अवसर मिलता था। यह पत्रकारों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ समन्वय के लिए भी महत्वपूर्ण था। वे कहती हैं- “मैं आपको किसी फील्ड में दो बार नहीं भेज सकती। प्रत्येक अध्याय के लिए सीमित बजट होता है।”

इमेज : स्क्रीनशॉट, CCIJ और वेज़ा न्यूज़

परियोजना में प्रत्येक अध्याय पर तथ्य जांच और कानूनी मंजूरी के लिए एक स्पष्ट समयसीमा निर्धारित थी। वे कहती हैं- “मेरे पास समग्र दृष्टिकोण होने के कारण हम पत्रकारों के छोटे-छोटे समूहों को काम पर लगाकर उनकी खामियों को दूर कर सके।”

प्रकाशन से पहले का अंतिम चरण जांच समन्वयकों के लिए काफी व्यस्त समय होता है। खासकर सीमा पार और बहु-भागीदार जांचों में। उन्हें विभिन्न मीडिया संस्थानों के मानकों और हर देश के कानूनों में फर्क को ध्यान में रखना था। सभी भागीदारों के बीच प्रकाशन कार्यक्रम के समन्वय और आंतरिक एवं बाह्य कानूनी टीमों के साथ काम की देखरेख भी बड़ा दायित्व था।

समन्वय की चुनौतियां

हेजल शेफील्ड कहती हैं कि किसी जांच के दौरान उत्साह बनाए रखने में समन्वयक की बड़ी भूमिका होती है। अक्सर लोग आपस में ठीक से संवाद नहीं कर पाते। वे अपने ही विचारों में उलझे रहते हैं। आपको उन्हें एक साथ लाने की कोशिश करनी पड़ती है।

मारिया रामिरेज़ के जिम्मे डिजिटल और टीवी दोनों के समन्वय का दायित्व था। उनके सहयोगी ‘यूनिविजन’ के पास दोनों के लिए अलग-अलग टीमें थीं। स्पेन और अमेरिका के बीच भाषा और पत्रकारिता मानकों में अंतर होने के कारण भी एक बड़ी चुनौती थी। संवेदनशील स्रोतों तक दोनों सहयोगियों की पहुंच का प्रबंधन करना और साक्षात्कारों के लिए संयुक्त रिपोर्टिंग यात्राओं की योजना बनाना एक प्रमुख कार्यभार था। दो अलग-अलग मीडिया संगठनों के पत्रकारों को एकजुट करके टीम में भरोसा जगाना काफी उपयोगी साबित हुआ।

मारिया रामिरेज कहती हैं- “दोनों संगठनों के पत्रकारों के लिए एक साथ रहना और इन महिलाओं की बात सुनने के तरीके पर पहले से चर्चा करना मददगार रहा। प्रकाशन से आरंभिक दिनों में जब नए विभागों और सहयोगियों को शामिल किया गया, तो तनाव का माहौल था। तब मैंने कहा था कि इसे मत भूलना कि हम एक टीम हैं।”

इतने बहुआयामी और महत्वपूर्ण काम में जांच समन्वयकों को स्वयं भी थकावट का सामना करना पड़ सकता है। नेली कालू कहती हैं- “मैंने खुद को इस भूमिका से अलग नहीं रखा। जांच में शामिल सभी लोगों के लिए यह कठिन होता है। लेकिन लोग अक्सर उस बोझ को नहीं समझते जो पर्यवेक्षक पर पड़ता है। आप लेखन कार्य रोककर सप्ताहांत की छुट्टी ले सकते हैं, क्योंकि समन्वयक मौजूद है।”

अपने अनुभव के आधार पर, वह सलाह देती हैं कि जांच समन्वयकों को पूरी टीम के लिए नियमित रूप से जांच से अवकाश की योजना बनानी चाहिए।

अच्छे जांच समन्वयक के गुण

चारों साक्षात्कारदाताओं ने कहा कि जांच समन्वयकों में मजबूत संगठनात्मक और संचार कौशल जरूरी है। शायद एक सामान्य पत्रकार से भी कहीं अधिक। हेजल शेफील्ड कहती हैं- “एक खोजी पत्रकार अक्सर बहुत अकेला होता है। लेकिन समन्वयक को लोगों के साथ काम करने की इच्छा होनी चाहिए। उसे एक भरोसेमंद, समर्थक और मार्गदर्शक के बतौर उपलब्ध रहना चाहिए। इस भूमिका के मानवीय पहलू को कम आंका जाता है।”

नेली कालू ने पत्रकार बनने से पहले इंजीनियर के बतौर प्रशिक्षण लिया था। वह कहती हैं कि उनकी शिक्षा और सांस्कृतिक परवरिश, दोनों ने उनकी सफलता में योगदान दिया है। “मैं एक इग्बो नाइजीरियाई और पहली संतान हूं। हम जन्मजात प्रबंधक हैं।”

मारिया रामिरेज ने पहले अमेरिका में ‘यूनिविजन’ सहित कई जगहों पर काम किया था। उनके पास दोनों मीडिया संस्थानों और देशों की संस्कृति और पत्रकारिता की जानकारी थी। इसके कारण उन्हें जांच के दौरान संचार और सहयोग को सुचारू रूप से चलाने में मदद मिली। इसी वजह से उन्हें समन्वयक की भूमिका मिली। वे कहती हैं- “एक समाचार संगठन से जुड़े होने के बावजूद दूसरे के दृष्टिकोण से चीजों को समझने की कोशिश करें और एक सेतु बनें। बड़े प्रोजेक्ट्स में किसी मौके पर मतभेद होना स्वाभाविक है। मतभेद से ही कुछ बेहतर निकलता है। खासकर जब रिपोर्टर अच्छे हों। लेकिन एक समन्वयक को मध्यस्थ बनकर दोनों पक्षों को समझने की कोशिश करनी होगी।”

जांच समन्वयक को लचीला, लेकिन अपने लक्ष्य के प्रति केंद्रित होना चाहिए। इन्वेस्टिगेट यूरोप के क्रिस मैथ्यूज कहते हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ दृष्टिकोण भी बदलते हैं। ऐसे में समन्वयक को योजनाओं के अनुसार प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें अनुकूलित करना होगा। साथ ही, सबको अंतिम लक्ष्य की ओर काम करते रहना होगा। सीसीआईजे की नेली कालू का कहना है कि उन्होंने ‘डेमोक्रेसी डिफर्ड’ के लिए पत्रकारों को स्पष्ट बताया था कि उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अगर कोई बाधा आए, तो वे मदद के लिए उनके पास आ सकते हैं।

हेजल शेफील्ड के अनुसार एक खोजी समन्वयक के लिए खोजी पत्रकार के रूप में अनुभव होना आवश्यक है या नहीं, यह एक विवादास्पद मुद्दा है। “मैं कॉर्पोरेट जगत के उन परियोजना प्रबंधकों को जानता हूं, जो पत्रकारिता में अपना करियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें अपने कौशल की आवश्यकता दिखती है। लेकिन वहीं कुछ लोगों का मानना ​​है कि इसके लिए पत्रकारिता की दुनिया, सूचना के संचार और प्रसंस्करण के तरीके की जानकारी होना आवश्यक है।”

मारिया रामिरेज और नेली कालू, दोनों के अनुसार जिसने खोजी पत्रकारिता नहीं की हो, उसके लिए खोजी समन्वयक बनना कठिन होगा। नेली कालू के अनुसार इस अनुभव और अनेक कौशलों के बिना यह काम संभव नहीं। उसके लिए आवश्यक तथ्य-जांच प्रक्रिया, टीम के ऊर्जा स्तर और जांच की संभावित परिवर्तनशील दिशा का पूर्वानुमान लगाना, समझना और प्रबंधन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होगा।

खोजी समन्वयकों के लिए समर्थन

खोजी समन्वयक क्या करता है और कौन इस भूमिका को निभाता है, यह निर्धारित करने वाले कई कारक हैं। क्रिस मैथ्यूज कहते हैं कि इन्वेस्टिगेट यूरोप जैसे संगठन इसके महत्व के प्रति तेजी से जागरूक हो रहे हैं। हेजल शेफील्ड के अनुसार समन्वयक को एक विशेषज्ञ भूमिका के रूप में मान्यता मिल रही है। इसलिए खोजी समन्वयकों को समर्थन देने की आवश्यकता बढ़ रही है। उनका कहना है कि समन्वयक की भूमिका को गंभीरता से लेने के लिए उद्योग को प्रोत्साहित करना जरूरी है। फंड देने वाली संस्थाएं हर टीम को अनुदान आवेदन में समन्वयक के लिए बजट प्रावधान रखने की अनुमति दें।

‘एरिना फॉर जर्नलिज़्म इन यूरोप’ ने अपने शोध के माध्यम से समन्वयक की भूमिका को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इसका ‘कोऑर्डिनेटर्स विदाउट बॉर्डर्स’ (Coordinators Without Borders) नामक एक नेटवर्क भी है। यह सीमा पार खोजी समन्वयकों का संगठन है। यह सहयोगियों की मदद लेकर समन्वयकों के लिए एक घोषणापत्र, संसाधन और टेम्पलेट तैयार कर रहा है। जैसे, मीडिया संस्थानों या परियोजना भागीदारों के लिए समझौता ज्ञापन तैयार करना। समन्वयक इनका उपयोग कर सकते हैं।

हेजल शेफील्ड के अनुसार समन्वय की भूमिका पर ध्यान देते हुए इसे समर्थन देना ज़रूरी है। यह खुले विचारों वाले समस्या-समाधानकर्ताओं को आकर्षित करता है। “इन लोगों के साथ काम करना बहुत अच्छा लगता है। ये लोग बेहद दिलचस्प शोध कर रहे हैं। आपके शोध में मदद करना और आपसे सीखना भी चाहते हैं। यह वाकई बहुत अच्छे लोगों का समूह है।”


लौरा ओलिवर: यूके स्थित स्वतंत्र पत्रकार हैं। उन्होंने गार्जियन, बीबीसी, यूरोन्यूज़ और अन्य प्रकाशनों के लिए लिखा है। वह थॉमसन फाउंडेशन और थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन के लिए नियमित पत्रकारिता प्रशिक्षक हैं। वह मीडिया संस्थानों के लिए दर्शक रणनीति सलाहकार के रूप में काम करती हैं।

अनुवाद: डॉ. विष्णु राजगढ़िया

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