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एआई (AI) और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी खोजी पत्रकारिता के लिए कैसे उपयोगी है

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स्वीडन में तेरहवीं ‘ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कांफ्रेंस’ (13th Global Investigative Journalism Conference) के  एक पैनल में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) को समझने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए काम करने पर चर्चा हुई। इससे पत्रकारों को तेजी से विकसित हो रही डिजिटल तकनीक की चुनौतियों का सामना करने में मदद मिल सकती है। इस पर पैनल के तीनों विशेषज्ञों ने सुझाव दिए। पैनल इस प्रकार था:

  • मॉडरेटर – जेनी विइक (Jenny Wiik) – एसोसिएट प्रोफेसर, मीडिया एंड कम्यूनिकेशन स्टडीज, गोथेनबर्ग विश्वविद्यालय
  • गारेंस बर्क (Garance Burke) – खोजी रिपोर्टर, एसोसिएटेड प्रेस
  • जोआचिम डाइफवरमार्क (Joachim Dyfvermark) – खोजी रिपोर्टर और निर्माता
  • हेजल शेफील्ड (Hazel Sheffield) – एरेना फॉर जर्नलिज्म

एआई पर रिपोर्टिंग का प्रारंभ

पैनलिस्ट गारेंस बर्क कहती हैं कि हमारे सैन फ्रांसिस्को में एआई कंपनियों को न केवल लैपटॉप और मोबाइल फोन में, बल्कि आउटडोर बिलबोर्ड विज्ञापन में भी जगह मिल रही है। गारेंस बर्क ने कहा कि खोजी पत्रकारिता के लिए अब एआई की क्षमता का पता लगाने और इसकी ताकत का उपयोग करने का एक रोमांचक समय है। वह एसोसिएटेड प्रेस के लिए एआई तकनीक पर काम करने वाली टीम का नेतृत्व करती हैं।

गारेंस बर्क ने कहा कि एआई मॉडल स्वयं जांच नहीं करने जा रहे हैं। कई देशों में हमारी पत्रकारिता वास्तव में इन उपकरणों से जुड़े कुछ नियमों की तुलना में कहीं अधिक दूरदर्शी है।

कई पत्रकारों को एआई-केंद्रित जांच शुरू करने में संकोच हो सकता है। लेकिन गारेंस बर्क ने कहा कि जो जिज्ञासा किसी भी जांच के लिए प्रेरित करती है, एल्गोरिदम की दुनिया को समझने के लिए वही शुरुआती बिंदु है।

एआई पर रिपोर्टिंग कैसे शुरू करें?

गारेंस बर्क ने एआई के साथ काम शुरू करने के तरीके बताए। इसके लिए कुछ उपयोगी संसाधन भी साझा किए।

  • आगे बढ़ें – गारेंस बर्क ने सुझाव दिया कि एआई को जानने और वर्कफ्लो को आसान बनाने के लिए चैट जीपीटी जैसे एआई तकनीकी टूल का उपयोग करें। एआई के साथ इस जुड़ाव के कारण आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि जांच के विषय के रूप में एआई को अधिक आक्रामक तरीके से कैसे कवर किया जा सकता है।
  • पत्रकारिता के उन्हीं बुनियादी सिद्धांतों को लागू करें – एआई को कवर करते समय पत्रकारों को उन्हीं प्रश्नों पर विचार करना चाहिए, जो वे किसी भी न्यूज स्टोरी के लिए करते हैं। जैसे, यह चीज कैसे काम करती है? यह कितना अच्छा प्रदर्शन करती है? इससे किसको फायदा हो रहा है? पैसा कौन कमा रहा है?
  • एपी स्टाइलबुक (AP Stylebook) पढ़ें – एआई की जांच करना कठिन काम है। इसके लिए आपके पास डेटा साइंस की कुछ समझ होनी चाहिए। लेकिन गारेंस बर्क कहती हैं कि इसकी शुरुआत करने के लिए आपको पीएचडी करने की आवश्यकता नहीं है। एपी स्टाइलबुक के नए संस्करण में एआई पर काम करने का अच्छा गाइड है। इसमें शुरूआत करने के लिए कुछ बुनियादी बातें भी शामिल हैं। गारेंस बर्क के नेतृत्व में यह गाइड तैयार हुआ है। उन्हें स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में एआई पर केंद्रित ‘जॉन एस. नाइट जर्नलिज्म फेलोशिप 2020’ मिली थी।

प्रतियोगिता से लेकर साझेदारी तक

पनामा पेपर्स को अंतरराष्ट्रीय साझेदारी आधारित रिपोर्टिंग का आदर्श उदाहरण समझा जाता है। ऐसी परियोजना के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से आगे जाकर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों ने दिखाया है कि डेटा, संसाधन और विशेषज्ञता को साझा करके काफी प्रभावी पत्रकारिता संभव है।

हेजल शेफील्ड कहती हैं- “सीमा-पार साझेदारी पर आधारित पत्रकारिता के विकसित होते क्षेत्र में अभी भी काफी चुनौतियां हैं। लेकिन अब यह अपनी प्रारंभिक अवस्था में नहीं है। इसमें काफी विकास हो चुका है।”  वह गैर-लाभकारी संस्था ‘एरेना फॉर जर्नलिज्म’ (Arena for Journalism) में सीमा-पार साझेदारी पर आधारित पत्रकारिता में विशेषज्ञता को आगे बढ़ाने वाले कार्यक्रम का नेतृत्व करती हैं।

इस संस्था में काम करने से पहले उन्होंने ‘मनी टू बर्न’ ( Money to Burn) का समन्वय किया था। यह एस्टोनिया में जंगलों पर यूरोप की नवीकरणीय ऊर्जा सब्सिडी के प्रभावों के बारे में आठ देशों में एक अंतरराष्ट्रीय जांच थी। इस न्यूज स्टोरी को गार्जियन, डाई जीट ऑनलाइन और पब्लिको सहित 10 मीडिया पार्टनर्स ने रेडियो, प्रिंट और ऑनलाइन प्रकाशनों में प्रकाशित किया था।

हेजल शेफील्ड ने कहा कि पर्यावरण जैसे विषयों की जटिलता समझने के लिए विविध विषयों के ज्ञान और विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। साझेदारी करने पर पत्रकारों को काफी लाभ हो  सकता है। इसमें वैज्ञानिक भी शामिल हों, तो वह केवल स्रोत के रूप में काम तक सीमित रहने के बजाय सहयोगी के रूप में भी काम करेंगे। इसके कारण किसी अकादमिक शोधपत्र के निष्कर्षों को बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिलेगा।

हेजल शेफील्ड कहती हैं- “संचार करने के एक तरीके के रूप में साझेदारी करना अंतरसांस्कृतिक संचार का एक गुण है। पत्रकारों के लिए यह उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि डेटा या साक्षात्कार तकनीक को खोजने के लिए एआई का उपयोग करना सीखना।”

सीमा-पार साझेदारी रिपोर्टिंग कैसे शुरू करें?

हेजल शेफील्ड ने कई देशों के पत्रकारों की साझेदारी में रिपोर्टिंग परियोजना चलाने संबंधी सुझाव इस प्रकार दिए।

  • सॉफ्टवेयर और तकनीकी समस्याओं में उलझने की जरूरत नहीं। ‘एरेना फॉर जर्नलिज्म’ के पास ऐसे संसाधन हैं जिनमें अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और डिजिटल सुरक्षा की पूरी जानकारी मिल जाएगी।
  • परियोजना शुरू करने से पहले रिपोर्टिंग संबंधी भूमिकाओं, हर पार्टनर के दायित्व और बायलाइन क्रेडिट पर चर्चा कर लें। साझेदारी के लिए समझौते का प्रारूप ‘एरेना फॉर जर्नलिज्म’ के टेम्पलेट से मिल जाएगा। सीमा पार जांच की सुविधाओं और वित्तपोषण संबंधी परामर्श भी आपकी मदद करेगा।

सीमा-पार खोजी पत्रकारिता पर अन्य दो संसाधन

  1. सीमा-पार सहयोगात्मक पत्रकारिता : ब्रिगिट अल्फ्टर (Cross-Border Collaborative Journalism: A Step-By-Step Guide)
  2. सीमा-पार खोजी पत्रकारिता का आलोचनात्मक परिप्रेक्ष्य : स्टीफन कैंडिया (Cross-border Investigative Journalism: a critical perspective)

जोआचिम डाइफवरमार्क एक खोजी रिपोर्टर और निर्माता हैं। वह स्वीडिश पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग (एसवीटी) पर पुरस्कार विजेता टेलीविजन शो ‘अपड्रैग ग्रैनस्किंग’ (मिशन इन्वेस्टिगेट) के निर्माता हैं। वह बड़े लीक और बड़े पैमाने पर डेटा के साथ काम करते हैं। वर्ष 2017 में उन्हें पनामा पेपर्स स्टोरी के कारण एमी हेतु नामांकित किया गया था। इस मामले में आइसलैंड के प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।

जोआचिम डाइफवरमार्क ने कहा कि प्रौद्योगिकी का दुरूपयोग करके दुष्प्रचार और नकली दस्तावेजों के बड़े पैमाने पर उत्पादन के खतरे से हमें सावधान रहना चाहिए। उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग की जगह लेने वाले डिजिटल टूल के खिलाफ भी चेतावनी दी।

उन्होंने कहा- “मैंने लगभग तीस वर्षों की पत्रकारिता में एक बात देखी है। अगर आप किसी एक अच्छे तकनीकी उपकरण को क्लासिक पत्रकारिता और उन्नत स्रोतों के साथ जोड़ते हैं, तब यह काफी शक्तिशाली हो जाता है।”

“पत्रकारों को अपने देश की सीमा से बाहर भी निकलना होगा। दुनिया के अन्य पत्रकारों के ज्ञान का लाभ लेने और इसे अच्छे तकनीकी उपकरणों के साथ संयोजित करने के लिए आपको एक बड़ा नेटवर्क बनाना होगा।”

पत्रकारिता पर भरोसा लौटाने के लिए पारदर्शिता जरूरी

सत्र के बाद, जीआईजेएन ने पैनलिस्टों से पत्रकारिता के प्रति कम होते विश्वास जैसे अन्य खतरों पर बात की। गारेंस बर्क ने पत्रकारिता पर भरोसा लौटाने के लिए पारदर्शिता को जरूरी बताया। वह कहती हैं- “किसी खोजी न्यूज स्टोरी में यह भी बताना चाहिए कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है। इसकी जानकारी देने से दर्शकों में फिर से विश्वास पैदा होगा, क्योंकि पत्रकारिता भविष्य की ओर देखती है।”

गारेंस बर्क कहती हैं- “मुझे लगता है कि पारदर्शिता काफी महत्वपूर्ण है। हमारे शोध, हमारी रिपोर्टिंग, हमारी कार्यप्रणाली, हमारे द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, हमने इसे कैसे किया- इन चीजों के बारे में दर्शकों को बताने के बजाय दिखाएं। इससे वे महसूस कर सकेंगे कि हमने अपनी जांच में जो खुलासा किया है, उसे समझने में खुद उनकी भी कुछ भागीदारी है।”

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