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प्रभावी खोजी रिपोर्टिंग के 7 तरीक़े

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वाटरगेट कांड की खबर, खोजी पत्रकारिता के सबसे उल्लेखनीय संदर्भों में से है जिसने संयुक्त राज्य अमेरिका के तत्कालीन  राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। चार दशक से अधिक समय के बाद भी निडर और जवाबदेही रिपोर्टिंग के प्रतिमान के रूप में उस खबर की आज भी चर्चा की जाती है। उस धमाकेदार स्टोरी को जनता तक पहुँचाने में  वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकारों बॉब वुडवर्ड एवं कार्ल बर्नस्टीन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे सच्चाई को उजागर करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध रहे। उन्होंने एक साल से अधिक समय तक अपने स्रोतों को विकसित किया और उस समय मौज़ूद रिपोर्टिंग के सभी कौशल आज़माए।

बारहवें वैश्विक खोजी पत्रकारिता सम्मेलन (#GIJC21) में, ऐसे खोजी पत्रकार जिनकी खबरें पूरे एशिया/प्रशांत क्षेत्र में धूम मचा रहीं और अपने आस-पास को बदल रही हैं, उन्होंने खोजी खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने के कुछ सुझाव साझा किए:

1. खबरों तक पहुंचने के लिए ‘आउट आफ बॉक्स’ तरीक़े सोचें

गार्डियन के पाकिस्तान संवाददाता शाह मीर बलूच जब बलूचिस्तान की कोयला खदानों में बंधुआ मजदूरी पर छान-बीन कर रहे थे, तब उन्होंने वहां पहुंचने एक गुप्त सुविचारित जोखिम उठाया। जबकि रिपोर्टिंग में छल-कपट और धोखेबाजी का उपयोग करना खतरनाक हो सकता है। इसमें कानूनी और नैतिक जोखिम शामिल हैं, फिर भी कुछ खबरों को केवल इन्ही तरीको से उजागर किया जा सकता है। खदानों तक पहुँचने के लिए बलूच ने तैनात एक स्थानीय निरीक्षक से कहा कि वह एक शोध छात्र है और अपने शोध के लिए उसे खनन मजदूरों से बात करने की आवश्यकता है। निरीक्षक ने शुरू में उसे यह समझाते हुए प्रवेश करने से मना कर दिया कि लोग खदानों में पैसा कमाने में लगे हैं। बलूच ने बताया, “मैंने उससे कहा कि वह मेरी चिंता न करे और उसने मुझे यह विश्वास करते हुए अंदर जाने दिया कि मैं उसे नहीं फंसाऊंगा।” इस तरह उन्होंने मानवाधिकारों के व्यापक हनन व कोयला खदानों के अंदर मजदूरों के अमानवीय रहन सहन व कठोर परिश्रम की स्थिति का खुलासा करते हुए अपनी स्टोरी को उजागर किया ।

2. धैर्य रखें

पेंडोरा पेपर्स लीक में पत्रकारों द्वारा अंतिम प्रकाशन से पहले इसकी पड़ताल में दो वर्ष तक अध्ययन और फाइलों को छांटने में, साक्षात्कार के लिए स्रोतों को ट्रैक करने में व सार्वजनिक रिकॉर्ड का विश्लेषण करने में खपाए गये। इसलिए, यह जरूरी है कि खोजी पत्रकार यह समझें कि उन्हें अपनी स्टोरी को ठीक से बताने के लिए कितना समय लगेगा। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में मैक्ले कॉलेज में पत्रकारिता कार्यक्रम के प्रमुख सू स्टीफेंसन ने कहा कि इस वास्तविकता को स्वीकार करने से पत्रकारों को एक बेहतर स्टोरी देने में मदद मिलेगी। उन्होंने आगे कहा, ” ऐसे में आप आवश्यक शोध करने व अपनी स्टोरी से संबंधित सभी लोगों से बात करने में सक्षम हो सकेंगे।”

3. समयसीमा तय करें

टोक्यो इन्वेस्टिगेटिव न्यूज़रूम तानसा की रिपोर्टर नानामी नाकागावा ने कहा कि पत्रकारों को समय-सीमा तय करनी चाहिए, अपनी प्रगति पर नज़र रखनी चाहिए और हर कदम का दस्तावेज़ीकरण करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें अपनी खबरों में कुछ भी याद रखने की जरूरत नहीं पड़े। “समयसीमा होने से यदि बीच में कुछ विलंब भी हुआ तो उन पर नज़र रखना आसान हो जाता है,” उन्होंने कहा। एक समयसीमा आपको यह समझाने में भी मदद करेगी कि कालानुक्रमिक क्रम में क्या हुआ, जो अक्सर एक जटिल खोजी स्टोरी को बताने का सबसे अच्छा तरीका है।

4. सभी स्तरों पर सम्बन्ध बनाएं

एक अच्छी खोजी खबर बनाने के लिए आपको बड़े संगठनों, निगमों से लेकर श्रमिक संघों व राजनेताओं के साथ संबंध और नेटवर्क बनाना सीखना होगा। इनके साथ ही सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले ऐसे लोग जिन्हें कभी-कभी अनदेखा या खारिज कर दिया जाता है जैसे: चपरासी, बाबू, निज सचिवों व दरबानों के साथ संबंधों को बढ़ावा देना भी महत्वपूर्ण है। अक्सर इस प्रकार के स्रोतों की अप्रत्याशित रूप से महत्वपूर्ण जानकारी तक अच्छी पहुंच होती है जो स्टोरी को गति दे सकती है। बलूच ने फिक्सरों (स्थानीय सम्पर्कों) के साथ काम करने की भी सिफारिश की, खासकर जब कामकाजी पत्रकार स्थानीय भाषा नहीं बोल सकते हैं या अपरिचित स्थानों में होते हैं। उन्होंने कहा, “वे जानते हैं कि आपको अपनी स्टोरी  के लिए कहाँ ले जाना है और जब आप पर नज़र रखी जा रही है तो कैसे बचना है”

5. परंपरागत रिपोर्टिंग को कभी न छोड़ें

हालांकि ओपन सोर्स रिपोर्टिंग ने हमेशा खोजी पत्रकारिता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, पुराने जमाने की रिपोर्टिंग को एक बड़ी स्टोरी को उजागर की क्षमता के रूप में प्रयोग करना चाहिए। स्रोतों का पता लगाना, कागजी दस्तावेज़ एकत्र करना, व्यक्तिगत रूप से तथ्यों की पुष्टि करना: यह  सभी रणनीतियाँ एक रिपोर्टर की सबसे अच्छी दोस्त हो सकती हैं। साथ ही ऐसी जानकारी को उजागर कर सकती हैं जो अक्सर कुछ नई खबर मिलने की प्रतीक्षा में होती है। बलूच ने कहा कि शारीरिक रूप से धरातल पर जाने पर एक पत्रकार को अपनी खबरों के तथ्यों की समझ मिल सकती है। उसके फ़ील्ड पर जाने से कौन, क्या और कहां के उत्तर मिल सकते हैं, जिन्हें वह बाद में अपनी खबर में डिजिटल रूप से दोहरा सकता है।

6. सूत्रों के साथ विश्वास बनाएं, दोस्ती नहीं

अपने स्रोतों के साथ सतत सम्पर्क में रहें। स्रोतों के साथ ज़रूरत से अधिक वादा न करें या उनके साथ संभावित जोखिमों को कम आंकें। क्योकि स्पष्टवादिता का मतलब पूर्ण प्रकटीकरण नहीं है। ऑस्ट्रेलिया के न्यूकैसल हेराल्ड की एक खोजी पत्रकार डोना पेज बताती हैं: सूचनाओं को विभाजित करना और स्रोतों से महत्वपूर्ण विवरणों को कम से कम साझा करना ठीक रहता है, खासकर जब संवेदनशील व्हिसलब्लोअर या लीक के माध्यम से खबर की जा रही है। मीडिया डाइवर्सिटी के डिजिटल निदेशक और ऑस्ट्रेलिया के एबीसी न्यूज के खोजी रिपोर्टर केविन गुयेन ने कहा कि कड़ाई से पेशेवर संबंध बनाए रखना महत्वपूर्ण है। “आप अपने स्रोतों के दोस्त नहीं हैं, भले ही आप उनकी मदद करने के लिए स्टोरी  कर रहे हैं,” उन्होंने कहा। “हो सकता है कि वे आपसे पूरी तरह खुश न हों।”

7. तथ्यों की रिपोर्ट करें, लेकिन उसमें कहानी भी हो

बहुत सी बड़ी खोजी रिपोर्टों का कोई दीर्घकालिक प्रभाव नहीं होता है क्योंकि रिपोर्टर तथ्यों को एक कथा के रूप में बुनने में विफल होते हैं। ऐसी खबर जो अपने पाठकों को आकर्षित नहीं करती और उन्हें अपने से जोड़ती नहीं है वह ज़्यादा दिनों तक याद नहीं रखी जाती। भले आपकी स्टोरी एक जटिल विषय के बारे में है लेकिन यदि वह रुचिकर नहीं है तो उसका प्रभाव नहीं होगा। इसलिए, तथ्यों का उपयोग करें और सबूतों का हवाला दें, लेकिन नाटकीय संरचना का उपयोग करने और प्रभाव को निजीकृत करने की कोशिश करें। पाठकों को आकर्षित करें उन्हें अपनी कहानी से जोड़ें और विचार करें कि क्या प्रत्येक वाक्य उनको आपके साथ आगे बढ़ाता है।

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