आलेख

जीआईजेएन वेबिनार:  इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सूचना के अधिकार (RTI) का बेहतर उपयोग कैसे करें

इस लेख को पढ़ें

पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी जीवित लोकतंत्र की महती आवश्यकता है। इसके बिना लोकतंत्र खत्म होने की दिशा में आगे बढ़ जाता है। पूरी दुनिया में स्वतंत्र मीडिया हमेशा ही पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए मजबूती से संघर्ष करता रहा है। स्वतंत्र मीडिया और खोजी पत्रकार हमेशा सरकारों की गलत नीतियों और अनियमितताओं को जनता के समक्ष रखते रहे हैं। आरटीआई इसके लिए बेहद महत्वपूर्ण उपकरण है।

भारत में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 ने खोजी पत्रकारों को बड़ी ताकत दी है। सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों से रिकॉर्ड पाने के लिए भारत में बड़ी संख्या में पत्रकार RTI का उपयोग कर रहे हैं। इसके कारण काफी इन्वेस्टिगेटिव खबरें आ रही हैं। इस कानून के बावजूद पत्रकारों को सरकारी जानकारियां प्राप्त करने में कई मुश्किलें आ रही हैं। आरटीआई कार्यकर्ता और पत्रकार अक्सर एक स्तर के बाद सूचनाओं को प्राप्त करने में सरकारी अवरोधों का सामना करते हैं।

इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग में सूचना के अधिकार का बेहतर उपयोग कैसे करें इस विषय पर ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क ने हिंदी में इस वेबिनार का आयोजन किया है। इसमें RTI के तीन शीर्ष विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। वे बताएंगे कि पत्रकारों को किस तरह आरटीआई लगाना चाहिए ताकि उन्हें चाही गई जानकारी मिल जाए। तीनों विशेषज्ञ आरटीआई से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तकनीक के बारे में आप से चर्चा करेंगे।

वेंकटेश नायक प्रसिद्ध आरटीआई कार्यकर्ता और मीडिया स्तंभकार हैं। वे सूचना के अधिकार पर विशेषज्ञता रखते हैं। उन्होंने भारत के कई राज्यों में आरटीआई पर प्रशिक्षण दिया है। उन्हें अफगानिस्तान के लिए आरटीआई कानूनों को डिजाइन करने के लिए एक विशेषज्ञ के रूप में कार्य किया है। वे बांग्लादेश, कनाडा, फिजी, घाना, केन्या, मलेशिया, माल्टा, मालदीव, श्रीलंका, तंजानिया और ज़ाम्बिया में भी सूचना के अधिकार संबंधी क़ानूनों को बनाने वाले दलों में शामिल रहे हैं। वर्तमान में वह कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव (सीएचआरआई), भारत के निदेशक हैं।

पूनम अग्रवाल स्वतंत्र खोजी पत्रकार हैं। उन्होंने टेलीविजन रिपोर्टर के रूप में अपनी पत्रकारिता आरंभ की और एनडीटीवी और टाइम्स नाउ जैसे भारत के प्रमुख मीडिया चैनलों के लिए काम किया। उन्होंने द क्विंट और बीबीसी के लिए भी काम किया जहाँ उनकी खोजी खबरें प्रकाशित हुईं। उनकी खबरें दुनिया के प्रतिष्ठित मीडिया प्लेटफॉर्म प्लेटफार्मों पर प्रकाशित हुईं हैं। पत्रकारिता के अनेकों पुरस्कार प्राप्त पत्रकार पूनम, खोजी पत्रकारिता में सूचना के अधिकार का उपयोग करने में विशेषज्ञता के लिए जानी जाती हैं।

विष्णु राजगढ़िया एक पत्रकार और मीडिया शिक्षक हैं। उन्होंने हिंदी दैनिक प्रभात खबर में स्थानीय संपादक के रूप में काम किया है। उन्होंने भारत में सूचना का अधिकार, भोजन का अधिकार और जनसंचार सिद्धांतों पर किताबें लिखी हैं। वह पत्रकारों के बीच आरटीआई के प्रयोग को बढ़ावा देने के विशेषज्ञ वक्ता हैं।

 

वेबिनार के मॉडरेटर दीपक तिवारी जीआईजेएन (हिंदी) के संपादक हैं।

वेबिनार के लिए यहां रजिस्टर करें।

आगामी जानकारी के लिए हमारे ट्विटर @gijn @gijnHin और  न्यूज़लैटर को सब्स्क्राइब करें।
 
दिनांक : शुक्रवार  24th June 2022

समय: वेबिनार आपके शहर में कितने बजे होगा

07:00  (वॉशिंगटन )

16:30 (दिल्ली )

16:45 (काठमांडू )

क्रिएटिव कॉमन्स लाइसेंस के तहत हमारे लेखों को निःशुल्क, ऑनलाइन या प्रिंट माध्यम में पुनः प्रकाशित किया जा सकता है।

आलेख पुनर्प्रकाशित करें


Material from GIJN’s website is generally available for republication under a Creative Commons Attribution-NonCommercial 4.0 International license. Images usually are published under a different license, so we advise you to use alternatives or contact us regarding permission. Here are our full terms for republication. You must credit the author, link to the original story, and name GIJN as the first publisher. For any queries or to send us a courtesy republication note, write to hello@gijn.org.

अगला पढ़ें

Ukrainian refugees at Lviv railway station in 2022, waiting for a train to leave Ukraine. Image: Shutterstock

प्रवासन और विस्थापितों पर रिपोर्टिंग कैसे करें

किसी आपात स्थिति में सुरक्षित आवागमन के अभाव और हताशा में भी लोग पलायन करते हैं। रेगिस्तानों को पार करने वाले सीलबंद मालवाहक ट्रकों से लेकर यूरोप की सीमाओं के पास गोपनीय अस्थायी हिरासत केंद्रों जैसे मुद्दे अहम हैं। विभिन्न देशों के बीच प्रवासियों का आवागमन आज पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।

GIJN Academy collage

जीआईजेएन ने खोजी पत्रकारिता की अकादमी आरंभ की

इसके अंतर्गत प्रशिक्षण लेने वालो के लिए खोजी पत्रकारिता का परिचय, ऑनलाइन ठगी, सैटेलाइट इमेजरी, सहयोगात्मक रिपोर्टिंग, खाद्य असुरक्षा, तकनीक और एआई, पर्यावरण अपराध, लीक और डेटा पत्रकारिता आदि विषयों से परिचित कराया जाएगा।

GIJC25 - Investigating War Crimes Using Satellite Imagery panel

युद्ध अपराधों की जांच के लिए सैटेलाइट चित्रों का उपयोग

सैटेलाइट के जरिए लाइट स्पेक्ट्रम के अलग-अलग हिस्सों से डेटा इकट्ठा किए जाते हैं। इनसे पत्रकार उन बदलावों का पता लगा पाते हैं जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। रडार सैटेलाइट के जरिए बादलों के पार भी देखा जा सकता है। इसका इस्तेमाल 2021 के अंत में यूक्रेन की सीमा के पास रूसी सैन्य शिविरों का पता लगाने के लिए किया गया। भले ही अलग-अलग वाहन दिखाई नहीं दे रहे थे, लेकिन रडार सैटेलाइट डेटा के पैटर्न से सैन्य कार्रवाई की तैयारी संबंधी बदलाव देखने को मिले। हम इन सैन्य शिविरों को अपनी आंखों से नहीं देख सकते थे। लेकिन अगर ऐसे पैटर्न अचानक दिखाई देते हैं, जो पहले नहीं थे, तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि ये मिलिट्री वाहन हैं।