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जीआईजेएन टूलबॉक्स की यह नई कड़ी है। इसमें तीन नए इन्वेस्टिगेटिव टूल्स की जानकारी दी गई है। ये काफी दमदार उपकरण हैं। इनका उपयोग भी बेहद आसान है। इन्हें पत्रकारों की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इन्हें मार्च 2026 में अमेरिका में आयोजित NICAR-26 डेटा जर्नलिज़्म समिट में दिखाया गया था। यहां प्रस्तुत है तीन नए इन्वेस्टिगेटिव टूल्स – मीनिंगफुली, विजुअल पिंग और आर्काइव डॉट आइआरई डॉट ओआरजी की जानकारी।
मीनिंगफुली (Meaningfully)

स्प्रेडशीट में संदर्भ-आधारित टेक्स्ट खोजने के लिए ‘मीनिंगफुली’ टूल का इस्तेमाल हो सकता है। इमेज : NICAR-26 का स्क्रीनशॉट
सरकारी डेटा वाली किसी बड़ी स्प्रेडशीट में कोई संदर्भ खोजने के लिए आप क्या करेंगे? जैसे, कर्मचारियों को नौकरी से निकालने संबंधी डेटा। समस्या यह है कि सरकारी एजेंसियां अपने लोगों को नौकरी से निकालते समय कई तरह के पर्यायवाची और घुमा-फिराकर शब्दों का इस्तेमाल करती हैं। टाइपिंग की गलतियां भी होती हैं। यही बात कई अन्य खोजों पर भी लागू होती है। जैसे, कॉन्ट्रैक्ट्स संबंधी डेटा। वे स्प्रेडशीट में टेंडर और बिड जैसे शब्दों के विवरण में छिपे हो सकते हैं।
ऐसी स्थितियों में कीवर्ड या ‘कंट्रोल एफ’ सर्च ठीक से काम नहीं करते। एआई चैटबॉट का इस्तेमाल करने में गलतियों और गलत जानकारी का जोखिम होता है। इस तरह के एनालिसिस के लिए एक अच्छा और बीच का रास्ता निकालने वाला समाधान है। वह है, पत्रकारों द्वारा बनाए गए ओपन-सोर्स टूल्स का इस्तेमाल करना। ऐसे उपकरण, जो डेटा एंट्रीज़ का मतलब समझते हैं।
‘मीनिंगफुली’ ऐसा ही एक उपकरण है। यह फ्री सिमेंटिक सर्च टूल है। इसे ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के डेटा रिपोर्टर जेरेमी मेरिल ने बनाया है। पत्रकारों द्वारा बनाया गया एक अन्य फ्री टूल, ‘सीमांत्रा’ (Semantra) भी यही काम करता है।
जेरेमी मेरिल ने NICAR डेटा जर्नलिज़्म कॉन्फ्रेंस में एक प्रयोग किया। नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों का पता लगाने का उदाहरण दिखाया। इसके लिए उन्होंने एक सिक्योरिटीज़ फाइलिंग से डेटासेट अपलोड किया। फिर अपने टूल के सर्च बार में बस ‘he got fired’ (उसे नौकरी से निकाला गया) टाइप किया। टूल को ऐसे डेटा मिले- “मिस्टर एबीसी को नौकरी छूटने पर देय रकम नहीं मिलेगी। वह अपनी सारी इक्विटी खो देगा, जो उसकी नौकरी खत्म होने की तारीख तक खत्म नहीं हुई थी।” इसमें नौकरी से निकाले जाने अथवा बर्खास्त करने जैसे शब्दों का सीधा ज़िक्र नहीं था। लेकिन ‘मीनिंगफुली’ ने यह समझ लिया कि उस व्यक्ति को नौकरी से निकाला गया ।
जेरेमी मेरिल ने ‘मीनिंगफुली’ के जरिए पता लगाया कि अमेरिकी फ़ेडरल सरकार एआई टूल का इस्तेमाल किस तरह कर रही है। यह ट्रंप प्रशासन में एआई टेक्नोलॉजी के प्रयोग की ताजा जांच का हिस्सा था। उदाहरण के लिए, उन्होंने यह पता लगाना चाहा कि व्हेल का पता लगाने के लिए क्या अमेरिकी सरकार एआई का इस्तेमाल कर रही है। इसके लिए उन्होंने अपने टूल में ‘Looking for whales’ टाइप किया। टूल को व्हेल और डॉल्फ़िन की गिनती के लिए आठ इस्तेमाल के तरीके मिले। इनमें कुछ सीधे तौर पर थे। जैसे ‘ऑटोमेटेड व्हेल-ब्लो डिटेक्शन।’ कुछ अर्थ के आधार पर थे। जैसे- ‘समुद्री स्तनधारी जीवों का सर्वे।’
उन्होंने कहा- “अगर आपके स्प्रेडशीट में काफी टेक्स्ट है, और उस टेक्स्ट के बारे में कुछ अनुमान भी है, तो ‘मीनिंगफुली’ इसमें आपकी मदद करेगा।”
जेरेमी मेरिल के अनुसार, ‘मीनिंगफुली’ की प्रोसेसिंग धीमी हो सकती है। एक लाख से भी ज़्यादा लाइनों वाले किसी बड़े डेटासेट के लिए शायद यह उपयोगी न हो। लेकिन एक बार इंस्टॉल हो जाने के बाद इसे इस्तेमाल करना, अपलोड और सर्च करना बेहद आसान है। यह एक निशुल्क टूल है। ‘मीनिंगफुली’ को इंस्टॉल करने का तरीका इस पेज में बताया गया है।

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के डेटा रिपोर्टर जेरेमी मेरिल ने ट्रंप प्रशासन में एआई टेक्नोलॉजी के उपयोग की पड़ताल के लिए ‘मीनिंगफुली’ टूल का सहारा लिया। इमेज : स्क्रीनशॉट
विजुअल पिंग (Visualping) का मुफ़्त जर्नलिस्ट प्लान
दुनिया भर के सैकड़ों पत्रकारों और शोधकर्ताओं ने ‘विजुअल पिंग’ टूल के मुफ़्त पब्लिक लेवल का इस्तेमाल किया है। इससे उन्हें अपनी जांच से जुड़ी वेबसाइटों पर आए अपडेट का ऑटोमैटिक अलर्ट मिल जाता है।
एआई-संचालित यह टूल पत्रकारों का समय बचाता है। यह एक ऑनलाइन पहरेदार की तरह काम करता है। यह टारगेट साइट्स पर नज़र रखता है। वेबसाइट में किसी बदलाव या अपडेट्स के बारे में अलर्ट भेजता है, जिनके बारे में शायद आपको पता भी न चल पाता।
इसका इस्तेमाल बेहद आसान है। इस सर्विस में अब नए फ़ीचर्स जुड़ गए हैं। जैसे, किसी वेबसाइट के सिर्फ़ एक छोटे हिस्से पर नज़र रखना। किसी वेबसाइट पर नए विज्ञापनों या रूटीन अपडेट्स के लिए बेकार के अलर्ट्स से बचना भी संभव है। अब इसमें पत्रकारों के लिए एक फ़्री प्लान भी है।
इसकी कमर्शियल वैल्यू सालाना 120 डॉलर है। पत्रकारों के लिए इसमें बेहतर एक्सेस की सुविधा है। पब्लिक फ़्री लेवल पर मिलने वाले 150 चेक के मुकाबले पत्रकारों को हर महीने 1,000 चेक की सुविधा मिलती है। एक बार में पांच के बजाय 25 वेब पेजों की मॉनिटरिंग करने की सुविधा है। आप किसी भी पब्लिक साइट और किसी भी भाषा के लिए अलर्ट कस्टमाइज़ कर सकते हैं। किसी नेता के सोशल मीडिया पेज से लेकर सरकारी खरीद-फरोख्त वाली साइट के लिए भी इसका उपयोग कर सकते हैं।
इस सर्विस के जर्नलिस्ट प्रोग्राम की मैनेजर कायला झू ने NICAR में इसकी जानकारी दी। बताया कि इसका बहुत असरदार इन्वेस्टिगेटिव इस्तेमाल हो सकता है। आप ‘बिग टेक’ कंपनियों के ‘टर्म्स ऑफ़ सर्विस’ पेज में किसी भी बदलाव के लिए अलर्ट सेट कर लें। इससे आपको प्राइवेसी या इस्तेमाल से जुड़े नए जोखिमों का पता चल सकता है।
कायला झू कहती हैं, “मुझे खोजी पत्रकारों के लिए यह एप्लीकेशन बहुत पसंद है। इन पेजों पर बहुत सारा टेक्स्ट होता है। कहीं एक शब्द बदलने से भी बड़ा असर पड़ सकता है। इस पर सामान्यत: किसी का ध्यान नहीं जाता।”
आप स्लाइडर फ़ंक्शन का इस्तेमाल करके डैशबोर्ड पर टेक्स्ट में किए गए बदलावों को साफ़-साफ़ और अलग-अलग रंगों में देख सकते हैं। जैसे, क्या जोड़ा गया या क्या हटाया गया।

ओपेन एआई की प्राइवेसी पॉलिसी में हुए बदलावों का विजुअल पिंग एनालिसिस। इमेज : विजुअल पिंग का स्क्रीनशॉट
पहले आप एक पत्रकार के तौर पर अपना अकाउंट बना लें। इसके बाद “New Job” पर क्लिक करके शुरुआत करें। अपना टारगेट URL डालें। सर्च क्राइटेरिया सेट करें। आखिर में यह तय करें कि आप कितनी बार पेज चेक करवाना चाहते हैं।
कायला झू ने इन्वेस्टिगेशन के लिए इस टूल का बेहतर इस्तेमाल करने के बारे में कुछ खास सुझाव इस प्रकार दिए :
- आप दिए गए सुझावों की लिस्ट से आसानी से सर्च ऑप्शन चुन सकते हैं। लेकिन कायला झू के अनुसार पत्रकारों को अपनी ज़रूरत के अनुसार एआई स्टाइल प्रॉम्प्ट टाइप करना चाहिए। जैसे, “जब अमुक कंपनी के बारे में कोई नई फाइलिंग हो, तो मुझे अलर्ट करें” या “जब फलां व्यक्ति से जुड़ी कोर्ट फाइलिंग में कोई बदलाव हो, तो मुझे अलर्ट करें।”
- खरीद-बिक्री, कोर्ट के मामलों की जानकारी और पर्यावरण से जुड़े एक्शन वाली साइट्स के लिए आप इसका उपयोग कर सकते हैं। यह ओपन डेटा पोर्टल्स पर होने वाले अपडेट्स की भी जानकारी देगा। कोई स्टोरी पब्लिश करने से पहले जानकारी की पुष्टि करने का यह एक उपयोगी तरीका है।
- खास प्रोजेक्ट से जुड़ी रिक्वेस्ट के लिए विजुअल पिंग जर्नलिस्ट प्रोग्राम के स्टाफ़ से संपर्क करें।
- टूल का टिप्स पेज देखें।
हाल ही में लॉन्च हुआ आर्काइव डॉट आइआरई डॉट ओआरजी (Archive.ire.org) सर्च इंजन
जीआईजेएन के सदस्य ‘इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टर्स एंड एडिटर्स’ (आईआरई) ने कई दशकों में हज़ारों रिसोर्स तैयार किए हैं। इनमें डिजिटल टिप्सशीट से लेकर अवॉर्ड एंट्रीज़ और कॉन्फ्रेंस की ऑडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। ये रिसोर्स दुनिया भर के खोजी पत्रकारों के काम आते हैं।
फरवरी 2026 में, वॉलंटियर्स और आईआरई स्टाफ़ के बीच एक जॉइंट आर्काइविंग प्रोजेक्ट के तहत एक शानदार सर्च इंजन टूल लॉन्च किया गया। यह टूल इन रिसोर्स को ऑनलाइन दिखाता है। साथ ही यह सिमेंटिक और एआई फीचर्स का इस्तेमाल करके ऐसी मिलती-जुलती सामग्री भी सुझाता है। इसके कारण आज चल रहे इन्वेस्टिगेटिव प्रोजेक्ट्स के लिए आसानी से नई लीड्स, टूल के इस्तेमाल के नए तरीके और सहयोग के लिए नए संपर्क मिल सकते हैं।
एक उदाहरण के लिए देखें। आप आईआरई रिसोर्स सेंटर के सर्च बॉक्स में “oligarchs” (ओलिगार्क्स) टाइप करें। यह आपको 2019 के आईआरई पैनल की एक टिप्सशीट दिखाता है। उसका शीर्षक है- “Dirty Money, European Banks and Russian Organized Crime” (गंदा पैसा, यूरोपीय बैंक और रूसी संगठित अपराध)। साथ ही, बाल्टिक देशों में मनी लॉन्ड्रिंग पर स्वीडन के एसटीवी न्यूज़ की आईआरई अवार्ड एंट्री और सीएनएन की रूसी ट्रोल फैक्ट्रियों पर रिपोर्ट भी दिखाता है। जब आप उस टिप्सशीट पर क्लिक करते हैं, तो सर्च इंजन – जो कीवर्ड सर्च के साथ सिमेंटिक फीचर्स का भी इस्तेमाल करता है – आपको पांच और रिसोर्स दिखाता है। यह चीजें शायद आपकी असल खोज के ज़्यादा करीब हों।
इनमें ‘ऑर्गनाइज़्ड क्राइम एंड करप्शन प्रोजेक्ट’ (OCCRP) के कॉम्पिटिशन एंट्री फ़ॉर्म का लिंक भी शामिल है। उसमें विस्तार से बताया गया है कि उन्होंने पूर्वी यूरोप के उन बिज़नेस एजेंटों की जांच कैसे की, जो मनी लॉन्ड्रिंग का पूरा समाधान देते हैं। इस नतीजे से आगे और सुझाव भी मिलते हैं। जैसे “Inside the Global Offshore Money Maze” (ग्लोबल ऑफ़शोर मनी भूलभुलैया के अंदर) नाम के आईआरई पैनल की ऑडियो रिकॉर्डिंग आपको मिल जाएगी। मैक्सिको के जीसस इबारा और जीआइजेएन के संस्थापक डायरेक्टर डेविड ई. कपलान जैसे वक्ताओं का सीमा-पार संगठित अपराध पर प्रेजेंटेशन भी मिल जाएगा।
NICAR में इस लॉन्च की घोषणा करते हुए, रॉयटर्स के एडिटर और Archive.ire.org की डेवलपमेंट टीम के सदस्य बेन वेल्श ने बताया कि इस डेटाबेस में 33,449 रिसोर्स शामिल हैं। इनमें से ज़्यादातर रिसोर्स आईआरई की पिछले कई सालों की 25,000 कॉन्टेस्ट एंट्रीज़ से जुड़े हैं। साइट पर मौजूद एंट्री फ़ॉर्म पत्रकारों के लिए उपयोगी हैं। इनमें काम करने के विस्तृत तरीके, लोगों से जानकारी जुटाने के तरीके, सभी योगदानकर्ताओं के नाम और जनहित के अहम मुद्दों की गहराई से पड़ताल करने से जुड़ी चुनौतियां और मौके शामिल हैं। इन मुद्दों पर दूसरे देशों के पत्रकार भी काम करना चाह सकते हैं।
इस आर्काइव को बनाने में मदद करने वाले डेटा जर्नलिस्ट डेरेक विलिस ने कहा। “मैंने पहले आईआरई के रिसोर्स का इस्तेमाल ज़्यादातर कॉन्फ़्रेंस की टिप्सशीट के लिए किया है। लेकिन मुझे लगता है कि कॉन्टेस्ट एंट्रीज़ भी कई तरह से बहुत काम की हो सकती हैं।”

नए आईआरई रिसोर्स सेंटर आर्काइव सर्च पेज के नतीजे। इमेज: स्क्रीनशॉट, आईआरई
बेन वेल्श ने बताया- “लगभग तीन-चौथाई रिसोर्स के साथ कोई न कोई अटैचमेंट जुड़ा है। चाहे वह पीडीएफ हो, ऑडियो फ़ाइल हो या कोई और बढ़िया चीज़। हमने सभी चीज़ों के लिए एक कॉमन इंडेक्स बनाने की कोशिश की। हालांकि यह पूरी तरह सही नहीं है। लेकिन इनमें शीर्षक, श्रेणी और विवरण मौजूद हैं। ज़्यादातर में लेखक का नाम भी दिया गया है।”
उन्होंने माना कि नई साइट में कुछ कमियाँ हैं। जैसे, लगभग एक-चौथाई डेटासेट के लिए तारीख की जानकारी का न होना। डेटाबेस का इस्तेमाल करने के लिए पत्रकारों को आईआरई मेंबर लॉगिन का इस्तेमाल करना होगा। हालांकि टिप्सशीट और स्लाइड में सहयोग आधारित काम करने के कई मौके हैं। इनमें इन्वेस्टिगेटिव एडिटर्स के काम के कॉन्टैक्ट डिटेल्स भी शामिल हैं। कॉन्टेस्ट की एंट्रीज़ और साइट को रैंडम तरीके से खंगालने से भी इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी के कई आइडिया मिल सकते हैं।
रोवन फिलप : जीआईजेएन के ग्लोबल रिपोर्टर और इम्पैक्ट एडिटर। वह पहले साउथ अफ्रीका के ‘संडे टाइम्स’ में चीफ रिपोर्टर थे। एक फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट के तौर पर उन्होंने दुनिया भर के दो दर्जन से ज़्यादा देशों से न्यूज़, पॉलिटिक्स, करप्शन और संघर्ष से जुड़ी खबरें कवर की हैं।
अनुवाद : डॉ. विष्णु राजगढ़िया