व्यक्तिगत संबंधों को प्रभावित करने वाली खोजी ख़बरें कैसे करें?
अक्सर कहा जाता है कि जब पत्रकार का किसी कहानी से करीबी रिश्ता होता है, तो किसी व्यक्ति या संस्था से उसका व्यक्तिगत संबंध उसकी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
अक्सर कहा जाता है कि जब पत्रकार का किसी कहानी से करीबी रिश्ता होता है, तो किसी व्यक्ति या संस्था से उसका व्यक्तिगत संबंध उसकी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है।
वैश्विक बाजार के लगभग 90% हिस्से को तीन कंपनियां नियंत्रित करती हैं। इनके नाम हैं- नोवो नॉर्डिस्क, एली लिली और सैनोफी। उनके नए, एनालॉग संस्करण नए पेटेंट और उपकरण सुरक्षा की परतों के नीचे दबे हुए हैं। फैबियोला टॉरेस के अनुसार किसी पुरानी दवा के चारों ओर एक ‘नए पेटेंट की बाधा’ बना दी जाती है।
VVOJ उन संस्थानों में से है जो न्यूज़रूम में इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग को प्राथमिकता दिलाने की वकालत करता है। संस्था का एक अन्य पुरस्कार “फ्लाइवील अवॉर्ड” विशेष रूप से उन संपादकों को सम्मानित करता है जो रिपोर्टरों को रोज़मर्रा की खबरों से समय निकालने और गहन जांच पर काम करने का अवसर देते हैं।
इन सबके बावजूद, पत्रकारों के सामने एक नाजुक जिम्मेदारी, नफरत को अनजाने में बढ़ावा न देने की है। पैनलिस्टों ने सुझाव दिया कि पत्रकारों को नफरत भरे संदेशों को संदर्भ सहित रिपोर्ट करना चाहिए। उनका प्रसार कम से कम रखना चाहिए। निशाने पर आए समुदायों की आवाज़ को प्रमुखता देनी चाहिए और गालियों या नफरत भरी भाषा को सीधे दोहराने से बचना चाहिए।
पहले एआई से बनी फोटो के टेक्स्ट में कुछ अक्षर खराब आते थे। लेकिन अब वह समस्या नहीं रही। अब कई एआई मॉडल में त्रुटिहीन टाइपोग्राफी मिलती है। ओपेन एआइ ने डेल-ई थ्री को विशेष रूप से टेक्स्ट सटीकता के लिए प्रशिक्षित किया है। मिडजर्नी वी-सिक्स ने “सटीक टेक्स्ट” को एक विपणन योग्य विशेषता के रूप में जोड़ा है। पहले टेक्स्ट की खराबी को एआई फोटो पहचानने का आसान तरीका समझा जाता था। लेकिन यह विधि अब शायद ही कभी काम करती है। इसी तरह, किसी फोटो में बेमेल कान, अस्वाभाविक रूप से विषम आंखें, रंगे हुए दांत जैसी समस्या भी अब खत्म होती जा रही है। जनवरी 2023 में उत्पन्न पोर्ट्रेट छवियों में आसानी से पता लगाने योग्य कमियां दिखाई देती थीं। लेकिन अब विश्वसनीय चेहरे उत्पन्न हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पर एल्गोरिदम बेहद जटिल होते हैं। उन्हें बनाने वाली कंपनियां यह नहीं बतातीं कि यह कैसे काम करता है। इसलिए खोजी पत्रकारों को इन प्लेटफ़ॉर्म के बारे में जवाबदेही पत्रकारिता करते समय एल्गोरिदम के हानिकारक परिणामों पर ध्यान देना चाहिए। इसमें इन प्लेटफार्मों पर वायरल होने वाली सामग्री के प्रकारों को देखना होगा। यह समझना होगा कि कुछ कमजोर आबादी को किस प्रकार के वीडियो दिखाए जा रहे हैं। एल्गोरिदम कैसे काम कर रहा है?
आज ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ में छह पूर्णकालिक कर्मचारी कार्यरत हैं। स्वतंत्र पत्रकारों का एक अच्छा नेटवर्क है। यह हर महीने दो से तीन लंबी जांच-पड़ताल पर ध्यान केंद्रित करता है। इसकी कार्यप्रणाली ‘मितव्ययी’ है। यह पूरी तरह से पाठकों द्वारा वित्त पोषित है। यह उनके दान पर निर्भर है। नितिन सेठी कहते हैं- “पहले दिन से ही हमारी 85% राशि का उपयोग खबरों के उत्पादन में लग रहा है।”
एक समय किर्गिज़स्तान की गिनती मध्य एशिया के सबसे लोकतांत्रिक गणराज्यों में होती थी। यहां वास्तविक चुनाव होते थे। एक सशक्त नागरिक समाज और एक जीवंत मीडिया परिदृश्य था। लेकिन एक लोकलुभावन और निरंकुश राष्ट्रपति के शासन में कई स्वतंत्र मीडिया संस्थानों पर भारी दबाव हैं।
पर्यावरण संबंधी ज़रूरी मुद्दे स्वाभाविक तौर पर देशों की सीमाओं से परे होते हैं। इसलिए अच्छी जांच के लिए विभिन्न देशों में काम करना आवश्यक है। लेकिन भाषा, दूरी, प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों और संसाधनों की कमी के कारण साझा पत्रकारिता काफी चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद, स्थानीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण विषयों पर खोजी पत्रकारिता के उदाहरण देखने को मिलते हैं।