ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क की ओर से नववर्ष की शुभकामनाएँ
ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क की ओर से सभी पाठकों और खोजी पत्रकारों को नये साल की शुभकामनाएँ। ये साल 2023 दुनिया में और ज़्यादा पारदर्शी व्यवस्थाओं को मज़बूत करे, इस विश्वास के साथ खोजी पत्रकारों को सहयोग करने के लिए हम तैयार हैं।
यह कार्य लाइसेंस के अन्तर्गत है क्रिएटिव कॉमन्स एट्रिब्यूशन-नोडेरिवेटिव्स 4.0 अंतर्राष्ट्रीय लाइसेंस
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सिर्फ एक ईमेल के लहजे से खतरे में पड़ सकती है साझा जांच: सात साल के अनुभव
आजकल साझेदारी आधारित खोजी पत्रकारिता के काफी प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे सहयोग विभिन्न देशों की सीमाओं के पार भी होते हैं जिसके कारण वैश्विक पत्रकारिता संभव हो पाती है। विभिन्न साझेदारों के संसाधनों, अनुभवों और विशेषज्ञता का लाभ मिलता है। ऐसे सहयोग को सर्वोत्तम माना जाता है, जो सहज हों। जिसमें प्रत्येक भागीदार की बात सुनी जाती हो। इसमें सभी भागीदार अपना योगदान देते हैं। उनमें किसी मतभेद पर चर्चा के जरिए जांच को समृद्ध किया जाता है। सबके प्रयासों से अंतिम जांच काफी व्यापक होती है।
डेटा पत्रकारिता
कैसे एक व्हाट्सऐप समुदाय भारत में डेटा प्रस्तुतीकरण के परिदृश्य को बदल रहा है
समय के साथ यह एक व्हाट्सऐप समूह से आगे बढ़कर कई विशेष समूहों का नेटवर्क बन गया है। इनमें नौकरी, शिक्षा-जगत, किताबों के पढ़ने वालों, D3 (डेटा-ड्रिवन डॉक्यूमेंट) सीखने वालों, एआई, साउंड विजुअलाइज़ेशन और विजुअलाइज़ेशन पर फीडबैक जैसे अलग-अलग समूह हैं। इन समूहों में सरकारी डेटा खोजने से लेकर जटिल स्प्रेडशीट को साफ करने, चार्ट की समीक्षा करने, कोड साझा करने और करियर से जुड़े सवालों तक पर चर्चा होती है।
साझा रिपोर्टिंग में ‘समन्वयक’ का महत्व
एक खोजी समन्वयक को अक्सर एक ही मीडिया संस्थान अथवा विभिन्न भागीदारों की साझा जांच के प्रबंधन का कार्य सौंपा जाता है। उसके पास संबंधित परियोजना का व्यापक दृष्टिकोण होता है। इसमें जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं से लेकर संभावित प्रकाशन तिथि की जानकारी तक शामिल होती है। जांच के प्रारंभ से लेकर प्रकाशन और उसके बाद तक सभी मामलों में उसकी कार्यकारी भूमिका होती है।
प्रवासन और विस्थापितों पर रिपोर्टिंग कैसे करें
किसी आपात स्थिति में सुरक्षित आवागमन के अभाव और हताशा में भी लोग पलायन करते हैं। रेगिस्तानों को पार करने वाले सीलबंद मालवाहक ट्रकों से लेकर यूरोप की सीमाओं के पास गोपनीय अस्थायी हिरासत केंद्रों जैसे मुद्दे अहम हैं। विभिन्न देशों के बीच प्रवासियों का आवागमन आज पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण विषय बन चुका है।