The Peruvian investigative journalist Fabiola Torres discusses investigating the global pharamaceutical industry at GIJC25. Image: Zahid Hassan for GIJN
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दवाइयों की दुनिया में प्रचलित एकाधिकार की जांच कैसे करें

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दुनिया भर में आवश्यक दवाओं का उत्पादन वैज्ञानिक आविष्कारों के कारण होता है। लेकिन जनता तक इन दवाओं तक पहुंच कैसे होगी, इसे कुछ चुनिंदा कंपनियों की बाज़ार शक्तियां तय करती है। दवा बाज़ार यदि अत्यधिक केंद्रित हो, तो उत्पादन लागत की तुलना में कीमतें कहीं बहुत अधिक हो सकती है। एकाधिकार के जरिए प्रतिस्पर्धा को बाधित किया जाता है। रोगियों को महंगे ब्रांडों पर निर्भर बनाया जाता है। इसका परिणाम अस्पतालों और सामान्य जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। लोगों को आवश्यक दवा की सीमित मात्रा पर निर्भर होने तथा अधूरे उपचार के लिए विवश होना पड़ता है। बहुत से परिवार अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा केवल जीवित रहने के लिए खर्च कर रहे हैं।

नवंबर 2025 में कुआलालंपुर (मलेशिया) में चौदहवीं ग्लोबल इन्वेस्टगेटिव जर्नलिस्ट्स कांफ्रेंस (GIJC25) (14th Global Investigative Journalism Conference ) का आयोजन हुआ। इसमें खोजी पत्रकार फैबियोला टोरेस ने ऐसे एकाधिकार को उजागर करने के व्यावहारिक तरीके बताए। वह पेरू के स्वास्थ्य संबंधी जांच पर केंद्रित मीडिया संगठन ‘सलूड कॉन लूपा’ की संस्थापक हैं।  उन्होंने ‘आपका पैसा या आपका स्वास्थ्य’ परियोजना का नेतृत्व किया था। इसमें यह जांच की गई थी एक सदी से अधिक पुराना आविष्कार होने के बावजूद पेरू में इंसुलिन अब भी इतनी महंगी क्यों है।

उनका मुख्य संदेश स्पष्ट था – “फार्मा उद्योग के एकाधिकार की जांच करना इंसान की जिंदगी से जुड़ा मामला है। यह असमानता के बारे में है। दवा कंपनियां भले ही यह कानूनी तौर पर कर रही हों, लेकिन यह एक घोटाला है।”

पेरू में इंसुलिन की समस्या

फैबियोला टॉरेस ने कार्यशाला की शुरुआत इंसुलिन संबंधी एक चर्चित केस स्टडी से की। मानव इंसुलिन 100 साल पुराना, पेटेंट-मुक्त आविष्कार है। इसे सस्ता और आसानी से उपलब्ध होना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों में इसे प्राथमिक उपचार की श्रेणी में रखा गया है। लेकिन कंपनियां नए पेटेंट प्राप्त ‘एनालॉग’ और उपकरण-आधारित संस्करणों को बढ़ावा देती हैं। इसके कारण मूल, सस्ती दवा तक पहुंच कठिन हो जाती है।

वैश्विक बाजार के लगभग 90% हिस्से को तीन कंपनियां नियंत्रित करती हैं। इनके नाम हैं- नोवो नॉर्डिस्क, एली लिली और सैनोफी। उनके नए, एनालॉग संस्करण नए पेटेंट और उपकरण सुरक्षा की परतों के नीचे दबे हुए हैं। फैबियोला टॉरेस के अनुसार किसी पुरानी दवा के चारों ओर एक ‘नए पेटेंट की बाधा’  बना दी जाती है।

पेरू में इंसुलिन निर्माताओं और आयातकों को टैक्स में छूट मिलती है। लेकिन कीमतें कम नहीं होती। सरकारी अस्पतालों में अक्सर इसकी कमी रहती है। मरीजों को इंसुलिन खरीदना पड़ता है। कुछ लोगों के लिए यह उनकी मासिक आय का 10-20% होता है। अस्पतालों में इंसुलिन नहीं मिलने पर कुछ लोग सीमित मात्रा में खुराक लेते हैं। कुछ लोग बिना इंसुलिन के ही गुजारा करते हैं। इसके कारण उनका स्वास्थ्य खराब होता है। उनमें विकलांगता या मृत्यु की नौबत आती है।

फैबियोला टोरेस की टीम ने पाया कि 2024 में पेरू में एक नया नैदानिक दिशानिर्देश जारी किया गया था। उसमें इंसुलिन एनालॉग को प्राथमिक उपचार बनाया गया था। लेकिन अंतिम समय में मसौदा बदल दिया गया। विवरण नोवो नॉर्डिस्क के इंसुलिन एनालॉग के लिए था।

दिशानिर्देश बनाने वालों में एक अग्रणी मधुमेह विशेषज्ञ शामिल थे। वह नोवो नॉर्डिस्क द्वारा वित्तपोषित बाल चिकित्सा मधुमेह कार्यक्रम के प्रमुख भी हैं। लेकिन उनका यह वित्तीय संबंध सार्वजनिक रूप से प्रसारित दस्तावेजों में नहीं दर्शाया गया था।

इस मामले ने दिखाया कि बाज़ार की शक्तियां किस तरह स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण को प्रभावित करती हैं। पत्रकारों को इन पहलुओं को समझने का प्रयास करना होगा।

कुआलालंपुर में आयोजित सत्र। चित्र: जीआईजेएन के लिए ज़ाहिद हसन

महंगी दवा के पीछे अदृश्य ‘दीवारें‘

फैबियोला टॉरेस ने बताया कि कैसे दवा कंपनियों का एकाधिकार कई तरह की दीवारें खड़ी करता है। इससे निर्धारित होता है कि किसे दवा मिलेगी और किसे नहीं।

फैबियोला टॉरेस ने कहा कि एकाधिकार बाज़ार की ताकतें कुछ ही कंपनियों को शर्तें तय करने की सुविधा देती है। बाज़ार में कौन-सी किस कीमत पर दवा आएंगी,  इसे कंपनियां तय करती हैं। एकाधिकार के कारण सस्ती, पुरानी या जैव-समान विकल्पों को रोगियों तक पहुंचने से रोक दिया जाता है। इसका खामियाजा अंततः रोगियों को भुगतना पड़ता है। इसके कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

  1. मामूली बदलाव के साथ नए पेटेंट लेना

फैबियोला टॉरेस ने बताया कि जब किसी दवा का पेटेंट समाप्त होने वाला होता है, तो कंपनियां कुछ मामूली बदलाव करके नए पेटेंट हासिल कर लेती हैं। इस तरह वे मामूली संशोधनों के साथ अपना पेटेंट अधिकार बनाए रखती हैं। इसके लिए खुराक में कुछ बदलाव, उपकरणों को अपडेट करना या विनिर्माण में कोई मामूली सुधार करना जैसे तरीके अपनाए जाते हैं।

  1. नियम संबंधी खामियां

कई देशों में जटिल जैविक दवाओं की कम लागत वाले विकल्पों का अभाव है। वहां बायोसिमिलर्स को मंजूरी देने संबंधी समुचित व्यवस्था नहीं है। पेरू में 2016 से एक बायोसिमिलर इंसुलिन को मंजूरी मिल गई है। लेकिन नियम संबंधी खामियों के कारण यह अभी भी सीमित है। फैबियोला टोरेस ने बताया कि स्पष्ट मार्गदर्शन के अभाव में डॉक्टर किसी अन्य विकल्प का उपयोग करने से बचते हैं।

  1. दिशा-निर्देश संबंधी कमियां

प्रत्येक देश के नैदानिक दिशा-निर्देश के अनुसार दवा लिखने की आदतों और दवाओं की खरीद संबंधी निर्णयों का निर्धारण होता है। पेरू के दिशा-निर्देश संशोधनों ने दिखाया कि कंपनियों के गोपनीय हितों का टकराव किस तरह राष्ट्रीय नीति को प्रभावित करता है। इसके जरिए कॉरपोरेट हितों को पूरा करने वाले अधिक कीमत वाले उत्पादों को बढ़ावा मिलता है।

  1. खरीद नीतियों संबंधी बाधा

कई मामलों में दवाओं की कमी, अपर्याप्त खरीद और बजट कटौती के कारण दवाओं की निरंतर उपलब्धता मुश्किल हो जाती है। फैबियोला टोरेस ने सार्वजनिक प्रणाली के माध्यम से इंसुलिन पाने में असमर्थ परिवारों की लंबी कतारों, सिरिंजों के दुबारा उपयोग और अपनी जेब से भुगतान करके इंसुलिन खरीदने की स्थिति का दस्तावेजीकरण किया।

  1. प्रभाव की दीवार

चिकित्सा कार्यक्रमों, प्रशिक्षणों और दान कार्यक्रमों को कंपनियों द्वारा वित्तपोषित किया जाता है। अक्सर इसमें पारदर्शिता का अभाव होता है। फैबियोला टॉरेस के अनुसार अधिकांश चिकित्सा कार्यक्रमों का वित्तपोषण दवा कंपनियों द्वारा किया जाता है। कंपनियों के दान कार्यक्रम अक्सर डॉक्टरों को प्रभावित करने और अपने पेटेंट उत्पादों को प्राथमिक बनाने की एक व्यावसायिक रणनीति के रूप में कार्य करते हैं। यह रणनीति दवा लिखने के मानदंडों को अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर सकती है। इसके कारण कम लागत वाले विकल्पों को अपनाने में बाधा आती है।

ऐसी खबरों का क्या महत्व है?

फार्मास्युटिकल एकाधिकार दरअसल जीवन रक्षक उपचारों तक जनता की पहुंच को प्रभावित करते हैं। विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में। फैबियोला टॉरेस ने कहा कि इन संरचनाओं को उजागर करना जरूरी है। इसके लिए पेटेंट और नियमों के साथ ही प्रत्येक बाधा के कारण होने वाले ‘नागरिकों पर प्रभाव’ को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

पत्रकार क्या कर सकते हैं

फैबियोला टॉरेस ने दवा बाजारों की जांच करने वाले पत्रकारों के लिए व्यावहारिक कदम सुझाए:

  • एक दवा से शुरुआत करें: किसी एक आवश्यक दवा की पहचान करें। ऐसी दवा, जो महंगी हो या जिसकी अक्सर कमी रहती हो। इसका अंतर्राष्ट्रीय गैर-स्वामित्व नाम (आईएनएन) (International Nonproprietary Names (INN)) देखें। इससे उस दवा के पेटेंट परिवार का पता चलेगा।
  • पेटेंट डेटाबेस का उपयोग करें: डब्ल्यूआइपीओ पेटेंटस्कोप (WIPO Patentscope), यूएसपीटीओ (USPTO) और एस्पेसेनेट (Espacenet) में खोज करके प्राथमिक और द्वितीयक पेटेंट की जांच करें। इनमें विस्तार और निरंतरता को भी शामिल करें।
  • दिशानिर्देश के मसौदे की तुलना करें: नैदानिक दिशानिर्देश के मसौदे और अंतिम संस्करणों की जांच करें। इनमें अस्पष्ट परिवर्तनों की पहचान करें।
  • खरीद और मूल्य निर्धारण का विश्लेषण करें: सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेजों के लिए अनुरोध करें। इसके आधार पर राष्ट्रीय कीमतों की तुलना स्वतंत्र उत्पादन-लागत अनुमानों से करें। जैसे, मधुमेह और इंसुलिन लागत पर एमएसएफ का ताजा अध्ययन।
  • हितों के टकराव की जांच करें: चिकित्सा विशेषज्ञों और दवा कंपनियों के बीच संबंधों की जांच करें। इनमें से कई बातें आधिकारिक दस्तावेजों में मौजूद नहीं होती हैं।
  • इंसानों पर प्रभाव का दस्तावेजीकरण करें: रोगियों और डॉक्टरों का साक्षात्कार लें। कई जांच एक ही मामले से शुरू होती हैं जो व्यापक संरचनात्मक गड़बड़ियों को उजागर करती हैं।

फैबियोला टॉरेस के अनुसार पत्रकार इन बाजारों को समझकर इन्हें चुनौती दे सकते हैं। पत्रकार सही उपकरणों के साथ उच्च कीमतों और सीमित प्रतिस्पर्धा के पीछे की संरचना को उजागर कर सकते हैं। इस तरह आप जनता को जागरूक कर सकते हैं। इसके लिए बेहद सरल तरीका है । कोई एक दवा चुनें। सिस्टम के माध्यम से उसके मार्ग का अनुसरण करें। देखें कि यह आपकी जांच को कहां ले जाता है।

अनुवाद : डॉ. विष्णु राजगढ़िया

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