रिपोर्टर संगठित आर्थिक अपराधों की जांच कैसे करें: एक गाइड।

Print More

Image: Shutterstock

संपादकीय टिप्पणी : नवंबर 2021 में जीआईजेएन की ‘ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कांफ्रेंस’ होने वाली है। इस मौके पर ‘संगठित अपराध की रिपोर्टिंग’ के लिए पत्रकारों के लिए एक गाइड प्रस्तुत किया जाएगा। उसी गाइड से जुड़े प्रमुख आलेख आने वाले कई हफ्तों तक प्रस्तुत किए जाएंगे। यह आलेख ‘धन-शोधन’पर केंद्रित है, यानी काले धन को सफेद करना। इसे ‘आर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट’ के सह-संस्थापक पॉल राडू ने लिखा है।

पिछले दो दशकों में मैंने अनगिनत बड़े आर्थिक अपराधियों की जांच की है। उनमें से अधिकांश लोग दुनिया के सर्वश्रेष्ठ उद्यमी होने की क्षमता रखते थे। उनके पास पर्याप्त संसाधन और रचनात्मकता थी। उनमें तेजी से सोचने, नेटवर्क बनाने और नेतृत्व की क्षमता भी थे। उनमें जोखिम लेने की क्षमता भी थी। उन्होंने कानूनी दायरे में रहकर काम किया होता, तो व्यापारिक दुनिया के बादशाह हो सकते थे। लेकिन इसके बजाय उन्होंने आर्थिक अपराध को चुना। अपने कौशल का दुरूपयोग करने के कारण ऐसे लोग इस दुनिया के लिए खतरनाक साबित हुए।

ऐसे आर्थिक अपराधी काफी बड़ा सोचते हैं। उनकी व्यावसायिक योजनाएँ काफी सरल होती हैं। जितने अधिक लोग उनका शिकार होंगे, उतना अधिक पैसा आएगा। ऐसे आर्थिक अपराधियों का काम काफी बड़े भौगोलिक क्षेत्र में फैला होता है। कई मामले अंतरराष्ट्रीय होने के कारण उन्हें राष्ट्रीय कानूनों से बचाव के रास्ते भी आसानी से मिल जाते हैं।

प्रथम खंड: यह कैसे काम करता है

अपराध का वित्तीय ब्लूप्रिंट

हर देश के अलग कानून होते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के आर्थिक अपराध मामलों में जांच एजेंसियों के सामने काफी जटिलता आती है। ऐसे मामलों में पत्रकारों और कार्यकर्ताओं को ज्यादा कारगर समझा जाता है। इनके पास सीमाओं के पार नेटवर्क बनाकर जनहित में काम करने के ज्यादा अवसर होते हैं। लेकिन आर्थिक अपराध के रूप में दुनिया पर सबसे शक्तिशाली खतरे से जूझने के इच्छुक मीडिया संस्थानों की संख्या बेहद सीमित हैं। ऐसे संस्थानों के पास आमतौर पर संसाधनों की भी कमी होती है।

आर्थिक अपराध के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खोजी पत्रकारों ने आपसी सहयोग का नेटवर्क बनाकर जांच की है। इसके कारण उन्हें आर्थिक अपराध का पैटर्न समझने का अवसर मिला है। आर्थिक अपराध के मामलों में हर जगह कई सामान्य पैटर्न देखने को मिलता है। इसके कारण इसे पहचानना और उजागर करना आसान हो जाता है। जो आपराधिक योजना किसी एक देश में काम करती है, उसी मॉडल को अन्य देशों में भी अपनाया जाता है। इसलिए इनके आपराधिक तरीकों को समझना जरूरी है, ताकि इनका भंडाफोड़ किया जा सके।

अवैध गतिविधियों की प्रभावी ढंग से जांच करने के लिए हमारे पास आर्थिक अपराधियों के बारे में पूरी समझ जरूरी है। आइए, सबसे पहले अपराधियों द्वारा अवैध ढंग से पैसे जुटाने, उसे छिपाने और निवेश करने के लिए मुख्य उपकरणों को समझ लें। इसके बाद द्वितीय खंड में हम इनकी जाँच और भंडाफोड़ के उपकरणों पर बात करेंगे।

आपराधिक सेवा उद्योग:  दुनिया भर में ऐसे लोगों का बड़ा नेटवर्क है, जो विभिन्न सेवाएं देकर आर्थिक अपराधियों की मदद करते हैं। इसे ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ कह सकते हैं। अपराधी चाहे बिलकुल नए हों, या फिर लंबे समय से कार्यरत, सबके लिए ऐसी सेवाएं उपलब्ध हैं। इस ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ का विभिन्न देशों तथा दुनिया भर में बुनियादी ढांचा है। इसमें विभिन्न किस्म के बिचैलिए, बैंकर, वकील, एकाउंटेंट्स, कंपनी निर्माण एजेंट, हैकर, प्रचार प्रबंधक इत्यादि शामिल हैं। ये लोग अपराधियों को अपराध करने तथा उनके अवैध धन का निवेश करने में मदद करते हैं। इसलिए हमें अपराध के मामलों में धन संबंधी पहलुओं को समझना होगा।

Organized Crime and Corruption Reporting Project (OCCRP) पत्रकारों के लिए यह बहुत अच्छा रिसोर्स है। संगठित अपराधों और भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की यह रिपोर्टिंग परियोजना है। इसमें ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ के काम के तरीकों की जानकारी मिलती है। इसकी वेबसाइट पर जाकर आप ऐसे संगठित अपराधों और भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की काफी उपयोगी जानकारियां पा सकते हैं।

आफशोर कंपनियां

आफशोर वित्तीय उद्योग का बड़ा खेल है। ऐसी गुप्त कंपनियों के माध्यम से अपराधियों को भारी मात्रा में धन खपाने और स्थानांतरण करने की सुविधा मिलती है। ऐसी आफशोर कंपनियां अवैध धन को वैध धन में बदलने में मदद करती हैं। ऐसी कंपनियों को प्रायः अपने मूल कार्यस्थल से दूर किसी अन्य देश में पंजीकृत कराया जाता है। Offshore Crime, Inc., Panama Papers जैसी परियोजनाओं ने इस अवैध धन-शोधन उद्योग को सुर्खियों में ला दिया।

ओसीसीआरपी की OpenLux परियोजना ने खुलासा किया कि ‘लक्जमबर्ग‘ जैसे कई देशों में भी आॅफशोर कंपनियों को गोपनीय तरीके से अवैध काम का भरपूर अवसर मिल रहा है। एक पत्रकार के बतौर क्या आप ऐसे संगठित अपराध और भ्रष्टाचार की जांच करना चाहते हैं? अगर हां, तो यह समझना जरूरी है कि ऐसे अपराधी अपने व्यवसाय की संरचना कैसे करते हैं। इस दौरान उनसे होने वाली त्रुटियों की पहचान करना भी जरूरी है।

प्रॉक्सी लोग

संगठित अपराध को छिपाने के लिए किसी अन्य पहचान की जरूरत पड़ती है। इसके लिए प्रॉक्सी लोगों या कंपनियों का उपयोग किया जाता है। आॅफशोर कंपनियां इनके माध्यम से लेनदेन करके असल अपराधियों की पहचान छुपा लेती हैं। ओसीसीआरपी में अपने खोजी कार्य के दौरान हमने तीन प्रकार के प्रॉक्सी की पहचान की है-  पूर्णतः अंजान, अर्द्ध-जागरूक और जटिल प्रॉक्सी।

1. पूर्णतः अनजान प्रॉक्सी: यह ऐसे लोग हैं, जिनकी पहचान चोरी की गई है। कई बार इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से बड़े पैमाने पर सूचनाओं की चोरी कर ली जाती है। ऐसे लोगों को पता भी नहीं चल पाता है कि उनके नाम का उपयोग करके कोई कंपनी बनाई गई है, या कोई बैंक खाता खोला गया है।

2. अर्द्ध-जागरूक प्रॉक्सी: ये ऐसे साधारण लोग होते हैं, जो मामूली पैसों के बदले में कोई कंपनी बनाने या बैंक खाता खोलने के लिए अपने दस्तावेज दे देते हैं। इनमें कुछ लोग कोई पैसा लिए बिना ही महज भरोसे में आकर अपनी पहचान का उपयोग करने की अनुमति दे देते हैं। इन्हें यह पता नहीं होता कि उनके नाम पर किस तरह का और कितने बड़े स्तर का अपराध हो रहा है।

3. सचेत प्रॉक्सी: ये ऐसे लोग होते हैं, जिन्हें आपराधिक योजना की पूरी जानकारी होती है। ऐसे लोग सचेत रूप से अपने नाम के गलत उपयोग की इजाजत देते हैं। इसके बदले उन्हें मुनाफे का एक हिस्सा मिलता है।

एक खोजी रिपोर्टर को यह जानना जरूरी है कि आपराधिक योजना में किस प्रकार के प्रॉक्सी शामिल हैं। इसी आधार पर आप यह निर्धारित पाएंगे कि जांच के लिए कौन-से कदम उठाने की जरूरत है।

फोटो कैप्शन: Unsplash पर जेफरसन सैंटोस

बैंक की मिलीभगत

वित्तीय क्षेत्र में क्रिप्टोकरेंसी जैसे नवीन उत्पादों के बावजूद दुनिया की वित्तीय प्रणालियों में अब भी बैंकों का महत्वपूर्ण स्थान कायम है। संगठित अपराध समूहों के लिए बैंक स्वाभाविक निशाना हैं। ऐसे गिरोह विभिन्न तरीकों से बैंकिंग क्षेत्र का लाभ उठाते हैं। प्रॉक्सी लोगों की ही तरह कुछ बैंक की भी प्राॅक्सी भूमिका होती है। कुछ बैंक ऐसे अपराधों की पूरी जानकारी के बावजूद उसमें शामिल होकर मदद करते हैं। कुछ बैंक ऐसी किसी आपराधिक साजिश से अनजान होते हैं। कुछ बैंकों के पास उनके खातों के माध्यम से अवैध धन का प्रवाह रोकने की तैयारी नहीं हैं।

बैंकिंग प्रणाली विभिन्न छोटे, मध्यम, बड़े बैंकों और उनकी सहायक कंपनियों से बनी है। छोटे बैंक अगर वैश्विक वित्तीय प्रणाली में शामिल होना चाहें तो उन्हें बड़े बैंकों में इससे संबंधित बैंक खाते खोलने पड़ते हैं। इनके जरिए किसी राशि का विश्वव्यापी वायर ट्रांसफर संभव हो पाता है। हमने कई ऐसे छोटे और मझोले बैंकों की जांच की है, जो पूर्णतः या आंशिक रूप से अपराधियों के स्वामित्व और संचालन में थे। लेकिन ऐसे बैंक भी अपनी बड़ी काली रकम को अन्यत्र भेजने के लिए बड़े बैंकों का ही सहारा लेते हैं।

ऐसे स्मार्ट अपराधियों को मालूम है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों की तरह बैंकों की भी कई तरह की सीमाएं हैं। इन्हें अक्सर अधिकार क्षेत्र की बाधाओं के कारण ऐसे आर्थिक अपराध रोकना मुश्किल होता है। ऐसे मामलों में बैंकों के बीच सहयोग की भी कमी है। संदिग्ध लेनदेन के व्यक्तिगत या कई हिस्सों में तोड़कर किए गए लेनदेन की शिनाख्त के लिए वित्तीय अनुपालन प्रणाली में समुचित व्यवस्था नहीं है।FinCENFiles ने खुलाया किया है कि उच्च मात्रा में मनी लॉन्ड्रिंग की पहचान करने में बैंक किस तरह विफल होते हैं। अपराधियों ने बड़ी मात्रा में धन को कई बैंकों और अनगिनत बैंक खातों में विभाजित कर दिया। इसके कारण किसी एक बैंक को ऐसे बड़े पैमाने पर धन-शोधन कार्यों की जानकारी नहीं मिल पाती है।

फर्जी अनुबंध और चालान

‘मनी लॉन्ड्रिंग‘ में कई तरह के जाली दस्तावेजों का उपयोग होता है। फर्जी अनुबंध और नकली चालान का उपयोग करके बैंकिंग लेनदेन किया जाता है। एक ऑफशोर कंपनी फर्जी बिल बनाकर दूसरी ऑफशोर कंपनी के नाम पर किसी सामान की फर्जी बिक्री दिखाती है। लेकिन वास्तव में कोई व्यापार नहीं होता है। सिर्फ इस बैंक से उस बैंक के खाते में पैसे भेजे जाते हैं।

इस अवैध प्रथा को व्यापार-आधारित ‘मनी लॉन्ड्रिंग‘ कहा जाता है। दुनिया भर में ऐसा वित्तीय अपराध बड़े पैमाने पर हो रहा है। बैंक अधिकारियों के लिए ऐसे वित्तीय लेनदेन से जुड़ी सामग्री की जांच करना असंभव है। इसी तरह, अन्य किस्म के फर्जीवाड़े में नकली कागजी कार्रवाई करके फर्जी ऋणों और सेवाओं के एवज में बैंकिंग लेनदेन किया जाता है।

इस तरह, मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आपराधिक समूहों और भ्रष्ट राजनेताओं के लिए इन चार चीजों को पूर्ण पैकेज पेश किया जाता है- 1. आफशोर कंपनियां, 2. प्राॅक्सी लोग, 3. बैंक की मिलीभगत, 4. फर्जी अनुबंध और चालान।

यहां तक कि ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ द्वारा अपनी ‘धोखाधड़ी नियमावली‘ भी जारी की जाती है। इसमें बताया जाता है कि बैंक अधिकारियों या कानूनी एजेंसियों को घोखे में रखकर किस तरह प्रॉक्सी लोगों के नाम पर फर्जी कंपनी बनाएं, कैसे बैंक खाते खोलें, नकली चालान कैसे बनाएं और धन-शोधन कैसे करें। ओसीसीआरपी ने लातविया में एक बैंक के ऐसे मनी लॉन्ड्रिंग मैनुअल को उजागर किया। इसमें ग्राहकों को यह सलाह दी गई थी:

“अनुबंध या चालान में डिलीवरी की शर्तें यथार्थवादी होनी चाहिए। जब आप किसी सामान का नाम लिखें, तो यह सोचना होगा कि उसे कैसे भेज रहे हैं। कार्गो का वजन, मात्रा, कारखाने का पता, परिवहन का प्रकार, सड़क, रेल या जहाज इत्यादि स्पष्ट होना चाहिए। अगर माल की मात्रा अधिक हो या बड़े आकार वाला माल हो, तो कृपया रेलमार्ग या बंदरगाह के नजदीक के कारखाने का नाम दें।”

ओसीसीआरपी में ऐसे ‘टर्नकी’ मनी लॉन्ड्रिंग सिस्टम को हम ‘लॉन्ड्रोमैट्स’ कहते हैं। इसके तहत एक ही एजेंसी सारे काम कर देती है। किसी एक बैंक या अन्य वित्तीय सेवा कंपनी द्वारा ग्राहकों को अपराध से आए धन का प्रबंधन करने, संपत्ति के स्वामित्व को छिपाने, टैक्स बचाने, मुद्रा प्रतिबंधों से बचने और दूसरे शहरों या दूसरे देशों में पैसे भेजने जैसी मदद की जाती है। ओसीसीआरपी ने 2014 में अपनी जांच ‘रूसी लॉन्ड्रोमैट’ “The Russian Laundromat” के साथ इस शब्द को गढ़ा था।

‘लॉन्ड्रोमैट‘ की तुलना ‘टीओआर नेटवर्क ब्राउजर‘ से कर सकते हैं। ‘टीओआर‘ में उपयोगकर्ता को इंटरनेट में पूर्ण गोपनीयता मिलती है। ‘लॉन्ड्रोमैट‘ भी अवैध धन को अलग-अलग बैंकों के बीच विभाजित करके भेजने की सुविधा देता है। इसके कारण गोपनीयता बरकरार रहती है। किसी भी बैंकिंग या कानूनी संस्थान को पूरी तस्वीर की जानकारी नहीं मिल पाती है, कि क्या हो रहा है।

‘लॉन्ड्रोमैट‘ दुनिया भर में असंख्य कंपनियों के रूप में बिखरे होते हैं। यह स्वतंत्र दिखाई देते हैं। लेकिन वास्तव में इन्हें एक ही पार्टी नियंत्रित करती है। आमतौर पर कोई बैंक ही वह एक पार्टी है।

मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब कोई क्लाइंट इस नेटवर्क में पैसे भेजता है। इसके लिए नकली कागजी कार्रवाई का उपयोग करके कोई वस्तु या सेवा की खरीद या बिक्री दिखाई जाती है। इसके बाद वहां से उन पैसों को किसी अन्य कंपनी के खाते में भेज दिया जाता है। फिर वह धन किसी आफशोर कंपनी या अन्य गंतव्य को भेज दिया जाता है। इसमें लॉन्ड्रोमैट के ऑपरेटरों के लिए तयशुदा कमीशन घटा लिया जाता है। ऐसे फर्जी लेनदेन के बीच धन के स्वामित्व का मामला ऐसे भ्रमजाल में उलझ जाता है, जिसे कानूनी एजेंसियां भी नहीं पकड़ पातीं। यह सिस्टम कैसे काम करता है, इसकी अधिक जानने के लिए ओसीसीआरपी का ‘लॉन्ड्रोमैट एफएक्यू’ देखें।

दुनिया के बड़े बैंकों की जांच से भी लॉन्ड्रोमैट बच जाते हैं। इसका एक उदाहरण ‘ड्यूश बैंक‘ के एक दस्तावेज में स्पष्ट रूप से देखने को मिलता है। ‘ड्यूश बैंक‘ का यह आंतरिक दस्तावेज लीक हो गया था। इसमें बताया गया है कि ‘रूसी लॉन्ड्रोमैट‘ ने उस बैंक के वैश्विक वित्तीय ढांचे को झकझोर किया। इसके बावजूद सही समय पर बैंक उस फर्जीवाड़े को समझने में नाकाम रहा।

फोटो कैप्शन: मनी लॉन्ड्रिंग पर ड्यूश बैंक का आंतरिक दस्तावेज। ड्यूश बैंक की आंतरिक स्लाइड, जो ओसीसीआरपी में लीक हो गई थी। इसमें बताया गया था कि बड़े पैमाने पर रूसी मनीलॉन्ड्रिंग योजना में बैंक किस तरह अनजाने में भागीदार बना।

संगठित अपराधी किस तरह दुनिया की वित्तीय प्रणालियों में फर्जीवाड़ा करते हैं, इसके अनगनित उदाहरण हैं। यहां तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से तीन उदाहरण दिए गए हैं। इन तीनों में कुछ सामान्य पैटर्न देखने को मिलते हैं। उपरोक्त ‘रूसी लॉन्ड्रोमैट‘ साजिश में जो पैटर्न था, वह कमोबेश इन तीनों उदाहरणों में भी दिखता है।

अजरबैजानी लॉन्ड्रोमैट: इन लॉन्ड्रोमैट ने बाकू और अजरबैजान के अमीर लोगों को यूरोपीय राजनेताओं को रिश्वत देने और देश से अरबों रूपये भेजने में मदद की थी। ओसीसीआरपी ने अपनी जांच में पाया कि इसी ‘मनी लॉन्ड्रिंग‘ गिरोह का इस्तेमाल ईरान द्वारा अमेरिका और यूरोपीय प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए भी किया गया था। इसमें एक ईरानी-तुर्की अपराधी रेजा जराब के गिरोह ने मदद की थी। वह तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन का करीबी अपराधी था। रेजा जराब द्वारा की गई मनी लॉन्ड्रिंग में ऊपर वर्णित सभी क्लासिक तत्व शामिल थे।  यह मामला तुर्की, अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक विवाद में बदल गया। यह दर्शाता है कि अशांति के समय में संगठित अपराध कैसे पनपता है और राजनीतिक विभाजन का फायदा उठा सकता है।

ट्रोइका लॉन्ड्रोमैट:  इसमें एक जटिल वित्तीय प्रणाली शामिल थी। इसके तहत रूसी कुलीन वर्गों और राजनेताओं को गुप्त रूप से भारी निवेश करने, टैक्स बचाने, सरकारी कंपनियों में शेयर हासिल करने, रूस और विदेशों में अचल संपत्ति खरीदने जैसे कई फर्जी कारनामे हुए। ट्रोइका लॉन्ड्रोमैट ने अवैध लेनदेन के करने वाले ऐसे लोगों की पहचान छिपाने में मदद की। ओसीसीआरपी ने अपने सहयोगी संगठनों की मदद से सावधानीपूर्वक ऐसे डेटा का विश्लेषण किया। इस जांच में 2,38,000 कंपनियों द्वारा लगभग 1.3 मिलियन लीक लेनदेन के मामले सामने आए। इसे सबसे बड़ी बैंकिंग रिलीज समझा जाता है। इस मामले की पूरी जानकारी के लिए वीडियो देखें।

भारी मात्रा में बैंकिंग लेनदेन के डेटा की व्यापक जांच के कारण ‘ट्रोइका लॉन्ड्रोमैट‘ का पर्दाफाश हुआ था। हमने ‘ट्रोइका लॉन्ड्रोमैट‘ के रूप में परिभाषित किए गए इस लेन-देन के खास पैटर्न की भी तलाश की। हमने इसमें त्रुटियों और खराब लिंक्स की तलाश करते हुए इस घोटाले के आयोजकों और सिस्टम के उपयोगकर्ताओं का पता लगाया।

हमने काफी सावधानीपूर्वक सारे डेटा का विश्लेषण किया। अंततः हमें पता चला कि बैंकों ने एक छोटी, लेकिन घातक गलती की थी। उन्होंने दर्जनों अन्य आफशोर कंपनियों के एजेंटों को भुगतान करने के लिए लगातार केवल तीन मुखौटा कंपनियों का बार-बार उपयोग होने दिया। इसमें अरबों डॉलर के लेन-देन शामिल थे। देखने में ऐसे भुगतान महज कुछ सौ डॉलर में थे, लेकिन इनके आधार पर अरबों का बड़ा लेन-देन हो गया। इसलिए हमें पता चला कि वे एक बड़े पैटर्न का हिस्सा थे। इस कॉमन पैटर्न को पहचानने के बाद पूरा ‘ट्रोइका लॉन्ड्रोमैट‘ समझ में आ गया।

रिवेरा माया गैंग (आरएमजी):  यह एक क्रूर और हिंसक सीमा-पार संगठन था। इस उदाहरण से पता चलता है कि संगठित अपराध कैसे विभिन्न व्यवसायों में बढ़ता है। इस मामले में अपराधियों ने यूरोप में स्किमर्स के रूप में छोटी शुरुआत की। ऐसे लोग, जो एटीएम में अवैध उपकरण या सॉफ्टवेयर लगाकर डेबिट और क्रेडिट कार्ड नंबर चुराते हैं।

इन अपराधियों ने एक मैक्सिकन बैंक के साथ भागीदारी करके ‘रिवेरा माया‘ में 100 से अधिक एटीएम लगा लिए। यह दक्षिणी मेक्सिको में कैनकन और टुलम के बीच का पर्यटन क्षेत्र है। इस गिरोह ने प्रति वर्ष 200 मिलियन डाॅलर से भी अधिक का फर्जीवाड़ा किया। रिवेरा माया गैंग ने नकली दस्तावेजों, नकली पहचान और प्रॉक्सी का इस्तेमाल करके अपना व्यवसाय खड़ा किया। साथ ही, उन्हीं दस्तावेजों का उपयोग करके मेक्सिको के भगोड़े अपराधियों को अमेरिका में छुपने का ठिकाना दिया।

द्वितीय खंड : जांच कैसे करें ?

ऊपर के उदाहरणों से स्पष्ट है कि संगठित अपराध समूह काफी परिष्कृत हैं। इनके पास आर्थिक अपराध करने, छिपाने और अपने पैसे का निवेश करने के कारगर उपाय हैं। लेकिन वे एक चीज को नियंत्रित नहीं कर सकते, और वह है- ‘समय‘। हर गुजरते दिन के साथ पत्रकारों तथा अन्य जांचकर्ताओं को काफी अनुभव मिल रहे हैं। ऐसे मामलों की अतंरराष्ट्रीय रिपोर्टिंग हो रही है। दुनिया भर की सरकारें पारदर्शिता, कंपनी के स्वामित्व और संपत्ति के बारे में नए एवं कठोर नियम लागू कर रही हैं।

बैंक और कोर्ट रिकॉर्ड

संगठित आर्थिक अपराध की जांच में बैंक रिकॉर्ड सबसे जरूरी साधन हैं। लेकिन बैंक रिकॉर्ड गोपनीय और निजी दस्तावेज हैं। इन्हें प्राप्त करना मुश्किल है। बैंक रिकॉर्ड पाने के लिए रिपोर्टर हमेशा किसी ‘लीक‘ या ‘व्हिसलब्लोअर‘ का इंतजार नहीं कर सकते। बैंक रिकॉर्ड प्राप्त करने का एक और तरीका है। ऐसे दस्तावेज अक्सर संगठित अपराध के खिलाफ अदालती मामलों से जुड़े होते हैं। अमेरिका के पास वैश्विक बैंकिंग रिकॉर्ड का शानदार स्रोत है। इसके द्वारा Public Access to Court Electronic Records (PACER) के तहत काफी रिकाॅर्ड्स सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हैं।

उदाहरण के लिए, ओसीसीआरपी ने PACER के माध्यम से हजारों बैंकिंग रिकॉर्ड प्राप्त किए। साथ ही, अमेरिका की विभिन्न अदालतों से सूचना का अधिकार के तहत आवेदन करके भी काफी बैंकिंग रिकॉर्ड प्राप्त किए। अजरबैजानी लॉन्ड्रोमैट रेजा जराब के खिलाफ कानूनी मामला खुलने के बाद ऐसी सूचना लेना संभव हुआ। हमने दुनिया के अन्य हिस्सों की अदालतों से भी इसी तरह के रिकॉर्ड प्राप्त किए हैं। अक्सर कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा ऐसे बैंकिंग रिकॉर्ड थोक में अदालत में पेश किए जाते हैं। खोजी पत्रकारों के लिए यह एक वरदान है।

वित्तीय संस्थानों से लीक हुई ‘संदिग्ध गतिविधि रिपोर्ट‘ (एसएआर) से भी आर्थिक अपराधों के बैंकिंग दस्तावेज मिल सकते हैं। इसका अच्छा उदाहरण है FinCENFiles जांच में प्राप्त हुए ऐसे दस्तावेज। ऐसे लीक दस्तावेजों से आपकी जांच की गुणवत्ता बढ़ेगी। पत्रकार अगर अदालती रिकॉर्ड के साथ इसे जोड़कर जांच करें, तो वे जनता के लिए बेहद मूल्यवान सेवा कर सकते हैं।

दो आपराधिक पक्षों के बीच वाणिज्यिक मुकदमे के मामले में भी अदालत के रिकॉर्ड पत्रकारों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं। ऐसे मामलों में दोनों आपराधिक पक्ष सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की पोल खोलते हैं। इसके आधार पर पत्रकारों को गहन जांच का अवसर मिलता है।

संपत्तियों के दस्तावेज

अवैध कमाई करने वाले लोग विभिन्न चीजों का मालिक होना पसंद करते हैं। उन्हें लक्जरी कारें, महंगी घड़ियां इत्यादि पसंद हैं। ये लोग अक्सर अचल संपत्ति में अपनी काली कमाई का निवेश करते हैं। जैसे- लक्जरी मकान, विशाल कृषि भूमि, बड़े शाॅपिंग माॅल में दुकानें इत्यादि। खोजी पत्रकार किसी संगठित अपराध की जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग के पैमाने और निवेश की जानकारी के लिए ऐसी संपत्तियों के रिकॉर्ड पर अपना ध्यान केंद्रित करें। अधिकांश देशों में अचल संपत्ति के दस्तावेज सार्वजनिक रिकॉर्ड होते हैं। इसमें किसी अचल संपत्ति के वर्तमान मालिक, पिछले मालिकों के साथ ही उसके मूल्य इत्यादि की भी जानकारी मिल जाती है।

कंपनी रिकॉर्ड

कंपनियों के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय रजिस्ट्रेशन दस्तावेज प्राप्त करना बेहतर उपयोगी है। इनमें कंपनियों के शेयरधारकों और बोर्ड के सदस्यों के साथ ही वित्तीय डेटा भी मिल जाते हैं। कई बार ऐसे रिकॉर्ड से बैंकिंग लेनदेन, संपत्ति के रिकॉर्ड, और यहां तक कि आफशोर कंपनियों के शेयरधारक और स्वामित्व की जानकारी मिल जाती है। अक्सर हमें कंपनियों या संपत्ति के रजिस्ट्रेशन कार्यालयों से इन कंपनियों के अवैध धन के निवेश की जानकारी मिल जाती है। साथ ही, यह भी ध्यान में रखें कि डेटाबेस में सभी जानकारी डिजीटल रूप में उपलब्ध नहीं होती है। इसलिए इनके रजिस्ट्रेशन कार्यालय जाकर या फोन कॉल करके पर्याप्त डेटा पाने का प्रयास करें।

उच्चस्तरीय मनीलॉन्ड्रिंग उजागर करने में एक महत्वपूर्ण को ऐसे बैंकों के स्वामित्व का पता लगाना भी है। बैंकों को भी एक व्यावसायिक कंपनी की तरह समझें। यह पताएं कि बैंक का मालिक कौन है। नए, छोटे और मध्यम बैंकों के मामले में यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

आयात-निर्यात डेटाबेस

आयात-निर्यात पर नजर रखने के लिए हम ImportGenius या Panjiva जैसे डेटाबेस का उपयोग करते हैं। ये महंगे डेटाबेस हैं। इम्पोर्टजेनियस से किसी कंपनी के यूएस आयात का एक साल का डेटा डाउनलोड करने में 199 डाॅलर का खर्च आता है। लेकिन व्यापार-आधारित मनी लॉन्ड्रिंग और इससे जुड़ी कंपनियों की जांच में यह काफी उपयोगी है। हमने इन डेटाबेस का उपयोग करके लॉन्ड्रोमैट से जुड़ी कंपनियों के अन्य नकली वाणिज्यिक कार्यों की जांच के लिए किया। ध्यान दें कि कई देशों में वार्षिक आयात-निर्यात संबंधी लेनदेन के मामलों की जानकारी ‘सूचना का अधिकार‘ के तहत उपलब्ध हैं। संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट ‘कॉमट्रेड‘ United Nations Comtrade site पर वैश्विक व्यापार का उपयोगी डेटा मिलता है। इससे आयात-निर्यात पैटर्न की पहचान की जा सकती है।

Aleph

टोसीसीआरपी में हमने Aleph नामक खोजी रिपोर्टिंग के लिए शोध सामग्री का एक वैश्विक संग्रह बनाया है। इसमें हम कंपनियों, उनकी संपत्ति और बैंक खातों, अदालती मामलों, लीक जैसी महत्वपूर्ण जानकारी सार्वजनिक करते हैं। यह अभी एक शुरुआत है। इससे पत्रकारों को डेटा की समझ बनाने और आपराधिक पैटर्न की पहचान करने में मदद मिलती है। यह सार्वजनिक हित में एक सार्थक जांच शुरू करने के लिए महत्वपूर्ण है।

अलेफ में उपलब्ध ‘पर्सन आफ इंट्रेस्ट‘ की निगरानी सूची भी पत्रकारों के लिए उपयोगी है। हमारा सिस्टम अन्य डेटा के साथ सूचियों में नामों का लगातार मिलान करता है। यह हमारे वर्कफ्लो को स्वचालित करता है। इससे ताजा और उपयोगी खोजी रिपोर्टिंग में भी मदद मिलती है।

फोटो कैप्शन: ओसीसीआरपी एलेफ स्क्रीनशॉट/ ओसीसीआरपी ने एलेफ विकसित किया है। यह एक उपयोगी संसाधन है। यह खोजी पत्रकारों को सार्वजनिक रिकॉर्ड और लीक की खोज में मदद करता है।

भविष्य क्या है?

कुछ दशकों पहले तक अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराधियों की पहचान काफी मुश्किल थी। ये लोग कानून प्रवर्तन एजेंसियों, खोजी पत्रकारों और कार्यकर्ताओं से कई कदम आगे थे। लेकिन अब स्थिति बदल गई है। पत्रकारों ने अपने देशों की सीमा पार अंतरराष्ट्रीय सहयोगी अभियान शुरू किए हैं। इसके कारण चीजें धीरे-धीरे बदलने लगी हैं। हालांकि अपराधियों को अब भी विशाल संसाधनों का लाभ मिलता है। वे नई तकनीक को तत्काल अपनाते हैं। इसके कारण ऐसे अपराधी कई मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों से एक कदम आगे रहते हैं।

एक और समूह पर ध्यान देना जरूरी है। ऐसे निवेशक, जो अन्य अपराधियों को वित्तपोषित करते हैं। ऐसे निवेश से उन्हें बहुत अच्छा लाभ मिलता है। ऐसी जीवनशैली के आदी लोगों के लिए अपराध अधिक अवसर लाता है। खोजी पत्रकारों को अपराध के इर्द-गिर्द बने वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर ढंग से समझने की जरूरत है। ऐसे ही परिवेश में ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ फलता-फूलता है। मनी लॉन्ड्रिंग और गुप्त निवेश की नई तकनीकों का विकास भी यहीं होता है।

खोजी पत्रकारों को संगठित अपराध की नई तकनीक की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्हें क्रिप्टोकरेंसी, ब्लॉकचेन, नन-फंजिबल टोकन (एनएफटी) और अन्य नए उपकरणांे को समझना जरूरी है। इसके लिए समय और धन का निवेश करना होगा। इन चीजों का ‘आपराधिक सेवा उद्योग‘ के व्यवसाय मॉडल में उपयोग होता है।

‘फाॅलो द मनी‘ के बदले जल्द ही ‘फाॅलो द कोड‘ (एल्गोरिदम के रूप में) बन जाएगा। लेकिन अंततः यह पूरी अवैध कमाई किसी ‘संपत्ति‘ और ‘विलासितापूर्ण जीवनशैली‘ के रूप में दिखाई देती है। अपराध अपने साथ यही लाता है।

ये भी देखें :

How to Follow the Money: Tips for Cross-border Investigations

A 10-Step Program to Fight Kleptocracy Around the World

GIJN Series: How to Uncover Corruption


पॉल राडू, ओसीसीपीआर के सह-संस्थापक और नवाचार के प्रमुख।  उन्होंने 2007 में ड्रू सुलिवन के साथ यह संगठन बनाया। वह ओसीसीपीआर की प्रमुख खोजी परियोजनाओं का नेतृत्व करते हैं। क्षेत्रीय विस्तार का दायरा बढ़ाने और सीमाओं के पार संगठित अपराध और भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए नई रणनीति और तकनीक विकसित करने में भी उनकी प्रमुख भूमिका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *