GIJN में सदस्यता

ग्लोबल इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म नेटवर्क की सदस्यता खोजी पत्रकारिता और डेटा जर्नलिज्म के क्षेत्र में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों, गैर-लाभ की संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों या उनके समकक्ष संगठनों के लिए है। सदस्यता के लिए केवल वही संस्थाएं पात्र होंगी जो किसी न किसी रूप से खोजी पत्रकारिता और डेटा जर्नलिज्म से जुड़ी हों। शासकीय संस्थाएं सदस्यता नहीं ले सकेंगी इसी तरह व्यक्तिगत स्तर पर पत्रकार और लाभ कमाने वाले संस्थान सदस्यता नहीं ले सकेंगे। हालांकि नेटवर्क सभी क्षेत्रों के खोजी पत्रकारों को सहयोग करने से पीछे नहीं हटेगा।

जनहित और सामाजिक न्याय के मुद्दे को उजागर करने वाली किसी खबर को जब व्यवस्थित तरीके से गहन पड़ताल और सार्वजनिक अभिलेखों तथा उपलब्ध आंकड़ों के आधार लिखा जाए तब उसे खोजी पत्रकारिता या इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के रूप में परिभाषित किया जाता है। ज्यादा जानने के लिए GIJN Resource Center को देखें। 

GIJN में सदस्यता, आवेदन और उसके बाद बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मंज़ूरी कर बाद ही दी जाती है। सामान्य रूप से GIJN के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की मीटिंग साल में तीन बार होती है। यदि आपको लगता है की आपकी संस्था सदस्यता के लिए निश्चित अर्हताएं पूरी करती है तो इस पृष्ठ के अंत में दिए गए फार्म को भरें।

GIJN की सदस्यता के लिए गैर-लाभ की संस्थाएं जैसे स्वयंसेवी संगठन, ट्रस्ट, एनजीओ, शैक्षणिक संस्थाएं, विश्वविद्यालयों के पत्रकारिता विभाग या समकक्ष संस्थाएं पात्र होंगी। वर्तमान में GIJN के 80 देशों में 203 संगठन सदस्य हैं।
GIJN की सदस्यता इनके लिए उपलब्ध है 

खोजी पत्रकारों के वे समूह जो रिपोर्टरों के संगठन या नेटवर्क के रूप में इकट्ठा हैं
वह संगठन या संस्थाएं जो मौलिक इन्वेस्टिगेटिव रिर्पोटिंग स्वयं करते हैं या उन्हें स्पॉन्सर करते हैं, जिससे कि वे उनके स्वयं के प्रकाशन प्लेटफार्म पर या किसी सहयोगी मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित या प्रसारित हो सकें। 
ऐसे समूह, सेंटर या संस्थाएं जो खोजी पत्रकारों को प्रशिक्षण देने का कार्य अपनी मुख्य गतिविधि के रूप में करते हों।

संभावित सदस्यों को उनके द्वारा इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के क्षेत्र में आयोजित ट्रेनिंग, प्रमोशन, सहयोग, रिपोर्टिंग, प्रकाशन या प्रसारण के कार्य के प्रमाण उपलब्ध कराना होंगे।  यह जानने के लिए की संस्था एक सतत चलने वाली संस्था है इसके लिए अपने रजिस्ट्रेशन का प्रमाण पत्र, पूर्णकालिक स्टाफ की सूची, बजट की रूपरेखा, वेबसाइट और सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति के प्रमाण बताना होंगे।

GIJN में बतौर सदस्य शामिल होने के लिए कोई फीस या शुल्क नहीं है। सदस्य संगठनों से अपेक्षा की जाती है कि वह GIJN में सक्रिय रुप से हिस्सेदारी करते हुए पत्रकारिता के प्रोफेशनल एवं उच्च मानदंडों का पालन करेंगे। उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी पत्रकारिता में  शुद्धता (सटीकता), स्वतंत्रता, पारदर्शिता एवं बराबरी के सिद्धांतों का पालन करेंगे। सदस्य संगठन हर दो वर्ष में होने वाली Global Investigative Journalism Conference में अपने स्टाफ को भेज कर नेटवर्क का सहयोग करेंगे।

वे सभी सदस्य जो अब सक्रिय नहीं हैं या पत्रकारिता तथा नॉनप्रॉफिट संस्थाओं के मैनेजमेंट में पालन किये जाने वाले उच्च आदर्शों की प्रतिपूर्ति नहीं करते, उनकी सदस्यता संचालक मंडल द्वारा वोटिंग करके समाप्त की जा सकती है।
GIJN सदस्य होने पर

संचालक मंडल के सदस्यों के चुनाव में वोटिंग का अधिकार तथा ग्लोबल कॉन्फ्रेंस के स्थान चयन में वोटिंग।
GIJN की कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप और हेल्पडेस्क में विशेष वरीयता।
सहयोग राशि एवं फंड प्राप्त करने, सतत सक्रिय रहने, रिपोर्टिंग एवं नवीन टेक्नालॉजी के संबंध में निशुल्क सलाह। 
अनेकों भाषाओं में सदस्य संगठन के काम का प्रमोशन।
डिस्काउंट पर या निशुल्क सॉफ्टवेयर।
 अंतरराष्ट्रीय स्तर के खोजी पत्रकारों के ग्लोबल नेटवर्क में हिस्सेदारी करने का अवसर।
 जब सदस्यों पर संकट आए तब आपस में सहयोग करना।

GIJN क्या करता है

खोजी पत्रकारिता और डेटा जर्नलिज़्म की विधा पर मार्गदर्शिकाएँ, टिप-शीट, नए वित्तीय और रिपोर्टिंग मॉडल, सुरक्षा और वैधानिक विषयों पर नवीनतम और आधुनिक परिवर्तनों पर लेखों का प्रकाशन। वर्ष 2018 में हमने 272 लेखकों/पत्रकारों के 385 लेख/खबरें सात भाषाओं में प्रकाशित किए।
खोजी पत्रकारों के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए ऑनलाइन तथा व्यक्तिगत तरीके से आपसी मेलजोल को बढ़ावा देना। यह कार्य 80 देशों के 203 संगठनों के माध्यम से हो रहा है।
हर 2 वर्ष में वैश्विक इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म पत्रकारिता सम्मेलन का आयोजन। GIJN ने साल 2001 से अब तक 140 देशों के 8000 पत्रकारों को एक साथ लाने का काम किया है। 
हर 2 वर्ष में एक बार एशियन इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म कॉन्फ्रेंस का आयोजन तथा अफ्रीका, लैटिन अमेरिका एवं विश्व के अन्य इलाकों में क्षेत्रीय सम्मेलनों और वर्कशॉप के आयोजन में सहयोग।
विश्व भर के पत्रकारों के लिए इन्वेस्टिगेटिव टूल्स और तकनीकों का प्रशिक्षण। इस तरह के प्रशिक्षण समय-समय पर आयोजित होने वाली वर्कशॉप, सेमिनार, प्रबोधन, ऑनलाइन वीडियो और वेबिनार के माध्यम से किए जाते हैं।
प्रतिदिन दर्जनों सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से 8 भाषाओं में खोजी पत्रकारों के लिए विभिन्न उपयोगी सामग्री का वितरण।
खोजी पत्रकारिता के संबंध में प्रतिदिन नवीनतम लेखों और जानकारियों का प्रकाशन। हमारी वेबसाइट जो 120 से अधिक देशों में प्रतिदिन देखी जाती है उस पर इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग से संबंधित खबरें, नए मॉडल, भविष्य की रिपोर्टिंग, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के टिप्स और टूल्स इत्यादि प्रकाशित किए जाते हैं।
हमारे बहुभाषी रिसोर्ट सेंटर में हजारों टिप-शीट, कैसे करें – गाइड, रिपोर्टिंग पर वीडियो, फैलोशिप, अवार्ड, फंडिंग और नेटवर्किंग जैसे अनेकों विषयों पर जानकारी उपलब्ध है।
एक हेल्प-डेस्क के माध्यम से इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म से जुड़े प्रश्नों के उत्तर 100 से अधिक विषय-विशेषज्ञ समय-समय पर देते हैं। नॉनप्रॉफिट संस्थाओं, सिक्योरिटी, डाटा एवं अन्य संबंधित विषयों पर हमारे विशेषज्ञ जानकारी उपलब्ध कराते हैं। स्थापना से लेकर अब तक 8500 से ज्यादा इस तरह के प्रश्नों का समाधान किया जा चुका है।
पत्रकारिता के क्षेत्र में हो रहे नवीनतम प्रयोग और नवाचारों के संबंध में प्रतिवर्ष 50 से अधिक आयोजन।
हर 2 वर्ष में एक बार “ग्लोबल शाइनिंग लाइट अवार्ड” किसी ऐसे खोजी पत्रकार को प्रदान किया जाता है जो मुश्किल हालातों में काम कर रहे हैं।
अपने सदस्य संगठनों के कामों के प्रमोशन के अलावा सदस्यों को  संचालक मंडल के सदस्यों के चुनाव में वोटिंग का अधिकार कॉन्फ्रेंस, वर्कशॉप और हेल्पडेस्क में विशेष वरीयता, डिस्काउंट या निशुल्क सॉफ्टवेयर एवं जब सदस्यों पर संकट आए तब सहयोग करना।

GIJN का सदस्य बनने के लिए आवेदन 

GIJN में सदस्यता

GIJN में सदस्यता के लिए केवल वही संस्थाएं पात्र होंगी जो किसी न किसी रूप से खोजी पत्रकारिता और डेटा जर्नलिज्म से जुड़ी हों। शासकीय संस्थाएं सदस्यता नहीं ले सकेंगीं। इसी तरह व्यक्तिगत स्तर पर पत्रकार और लाभ कमाने वाले संस्थान सदस्यता नहीं ले सकेंगे।

हमारे बारे में…

ग्लोबल इनवेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म नेटवर्क (GIJN) दुनिया के मीडिया संगठनों का अंतर्राष्ट्रीय संघ है। हमारा मुख्य उद्देश्य वाच-डॉग यानि निगरानी की भूमिका निभा रहे इनवेस्टिगेटिव और डेटा जर्नलिज़्म करने वाले पत्रकारों के लिए प्रशिक्षण और उनके बीच जानकारी का सहजता से आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।

Help Us Strengthen Investigative Reporting Around the World

Dear Friends of GIJN,

As this difficult year comes to a close, we want to take a couple minutes to ask for your support. GIJN’s core mission is to strengthen and spread investigative journalism around the world. Nearly every service we offer is free – our workshops, webinars, tip sheets, reporting guides, Help Desk, and Resource Center. We do this because we believe that investigative journalism is a force for good in the world – because watchdog journalism that bolsters freedom, transparency, and accountability is worth fighting for. Our global staff comes from 14 countries, many of them – Pakistan, Bangladesh, Uganda, South Africa, Mexico, Venezuela, Hungary, Jordan, Russia, Ukraine – on the front lines of the struggle for democracy and human rights.

নিখোঁজের খোঁজে: গুম, অপহরণ ও হারানো মানুষ নিয়ে অনুসন্ধানের গাইড

English

এই বিশ্বে প্রতি বছর লাখ লাখ মানুষ নিখোঁজ হয়ে যান। ইন্টারন্যাশনাল কমিশন অন মিসিং পিপল বলছে, এসব ঘটনার বেশিরভাগের সাথেই জড়িয়ে আছে সংঘবদ্ধ অপরাধী চক্র। বিশেষ করে, মাদক পাচারকারীরা।  এছাড়াও বন্যপ্রাণী চোরাচালান, মানব পাচার, প্রাকৃতিক সম্পদ চুরি – এমন আরো অনেক অপরাধী চক্র মানুষের এভাবে হারিয়ে যাওয়ার পেছনে বড় ভূমিকা রাখছে।

এমন অপরাধ ঠেকাতে সাংবাদিকদের বড় ভূমিকা আছে; বিশেষ করে যেসব জায়গায় রাষ্ট্র ও আইনের শাসন ভেঙে পড়েছে। সেটি হতে পারে লেখালেখির মাধ্যমে নিরুৎসাহিত করে, অথবা ঘটনার গভীর অনুসন্ধানের মাধ্যমে।সবচেয়ে ডাকসাইটে অপরাধী গোষ্ঠীগুলোর কর্মকান্ড, সাধারণত হয় বিশ্বজোড়া। তারা খুবই সুসংগঠিত, আর তাদের কারবারও বেশ নিয়মতান্ত্রিক। তাদের চোখে পড়বে আমাদের চারপাশে, নিত্যদিনের জীবনে; কখনো কখনো তারা ঢুকে পড়ে সিস্টেমের একেবারে গভীরে; তাদের দেখা যায় গুরুত্বপূর্ণ সব সামাজিক সংগঠনে।

যখন সব জায়গায় দুর্নীতি প্রবলভাবে জেঁকে বসে, তখন সংঘবদ্ধ গোষ্ঠীর কারণে নিখোঁজ হয়ে যাওয়া এসব মানুষ নিয়ে কোনো অনুসন্ধান হয় না। জাতীয় বা আঞ্চলিক – কর্তৃপক্ষকে তারা প্রায়ই চুপ করিয়ে রাখে অর্থের বিনিময়ে। আবার কখনো অপরাধী গোষ্ঠীর ক্ষমতা ও ব্যাপ্তি এতো-ই বড় হয়ে ওঠে যে, কোথাও অপরাধের কোনো তথ্যই পাওয়া যায় না। যেসব গুমের সাথে কোনোভাবে রাষ্ট্র জড়িত –  যেখানে একজন মানুষকে কেউ তুলে নিয়ে গেছে, গোপনে আটকে রেখেছে অথবা মেরে ফেলেছে, এবং লাশটাকে লুকিয়ে ফেলেছে – তাদের বেলায়ও একই কথা প্রযোজ্য।

এই অপরাধের ধরন অনেক রকম হতে পারে: একটি বিচ্ছিন্ন ঘটনা, একসাথে অনেক মানুষের গুম হয়ে যাওয়া, অথবা নির্দিষ্ট সময়ে পরস্পর সংযুক্ত একাধিক ঘটনা। অনেকে আবার নিখোঁজ হন, নিজের ইচ্ছাতেও।

এমন অপরাধ ঠেকাতে সাংবাদিকদের বড় ভূমিকা আছে; বিশেষ করে যেখানে রাষ্ট্র ও আইনের শাসন ভেঙে পড়েছে। সেটি হতে পারে লেখালেখির মাধ্যমে নিরুৎসাহিত করে, অথবা ঘটনার গভীর অনুসন্ধানের মাধ্যমে। কিন্তু নিখোঁজ ব্যক্তিদের নিয়ে ঘাঁটাঘাটি করতে গিয়ে একজন সাংবাদিক নিজেও এ ধরনের অপরাধের শিকার হতে পারেন। তারা কোনোভাবেই ঝুঁকির বাইরে নন।

এসব কারণে সংঘবদ্ধ অপরাধ ও নিখোঁজ ব্যক্তিদের নিয়ে অনুসন্ধান করার কাজটি হয়ে ওঠে জটিল ও সূক্ষ। এই বিষয় নিয়ে কাজ করতে গেলে একজন সাংবাদিককে সবসময় সতর্ক থাকতে হয়, এবং চিন্তা করে এগুতে হয়। বিশ্বের অনেক দেশেই হারিয়ে যাওয়া মানুষ নিয়ে বড় বড় অনুসন্ধান হয়েছে। আমরা এই গাইডে তুলে ধরেছি তেমন কিছু উদাহরণ, গবেষণাসূত্র, প্রাসঙ্গিক সংগঠনের পরিচিতি এবং মাঠপর্যায়ে রিপোর্টিংয়ের পরামর্শ।

গাইডটি প্রকাশিত হয়েছে জিআইজেএন ও রেজিলিয়েন্স ফান্ড আয়োজিত “ডিগিং ইনটু ডিজঅ্যাপিয়ারেন্স” ওয়েবিনার সিরিজের অংশ হিসেবে। এই সিরিজের বিষয় ছিল সংঘবদ্ধ অপরাধ ও নিঁখোজ ব্যক্তিদের নিয়ে অনুসন্ধান। এটি দেখতে পাবেন ইংরেজি ও স্প্যানিশ ভাষায়। ফরাসি ভাষায় আয়োজিত ওয়েবিনারে উঠে এসেছে নির্দিষ্ট কিছু ঘটনার কথা। এবং বিভিন্ন ভাষায় প্রচারিত হয়েছে: কিভাবে খৃুঁজবেন নিখোঁজদের।

সূচিপত্র

কেইস স্টাডি
দরকারি গাইড ও সংগঠন
রিপোর্টিং টিপস

ঘটনাস্থল সম্পর্কে জানুন
নিরাপদ থাকা ও রাখা
তথ্য দেবে কারা
সূত্র খুঁজবেন কী করে
সাক্ষ্য-প্রমাণ বিশ্লেষণ
যখন কাজ কর্তৃপক্ষের সাথে
মানসিকভাবে বিপর্যস্তদের নিয়ে কাজ
নিজের যত্ন

কেইস স্টাডি
নিখোঁজ হয়ে যাওয়া মানুষদের নিয়ে সাম্প্রতিক কিছু অনুসন্ধানী প্রতিবেদন বাছাই করা হয়েছে এখানে।

সার্চিং উইথ দ্য মাদারস অব মেক্সিকো’স ডিজঅ্যাপিয়ার্ড (২০২০)। এই প্রতিবেদনে, মেক্সিকোতে গুম বা নিঁখোজ হয়ে যাওয়া ব্যক্তিদের পরিবারের সদস্যদের সাথে কথা বলেছে দ্য নিউ ইয়র্কা, যারা এখনো হারানো স্বজনকে খুঁজে পেতে মরিয়া।
মিসিং ইন ফ্রান্স: দ্য প্লাইট অব ভিয়েতনামিজ চিলড্রেন হু আর ট্রাফিকড ইনটু ইউরোপ (২০২০)। ভিয়েতনামের শিশুরা কিভাবে নিখোঁজ হচ্ছে, তা নিয়ে এই অনুসন্ধান করেছেন সাংবাদিকরা। এতে দেখা গেছে: ফ্রান্সের একটি বিমানবন্দর থেকে তুলে নিয়ে এই শিশুদের ইউরোপের অন্য দেশে পাচার করা হয়েছে।
রুয়ান্ডায় গণহত্যা, ফ্রান্সে আত্মগোপন ও পিছে লেগে থাকা এক সাংবাদিক (২০২০)। এই লেখায় জিআইজেএন কথা বলেছে থিও এঙ্গেলবার্টের সাথে। যিনি বেশ কয়েক বছর ধরে অনুসন্ধান চালিয়ে খুঁজে বের করেছিলেন রুয়ান্ডার সাবেক সেনা কর্মকর্তা অ্যালোয়েস নিউইরাগাবোকে। যিনি দীর্ঘ সময় ধরে আত্মগোপন করে ছিলেন।
সাংবাদিকদের অনুসন্ধানে যেভাবে বেরিয়ে এলো ২০০০ গুপ্ত কবর (২০১৯)। তথ্য অধিকার আইন প্রয়োগ, ডেটা বিশ্লেষণ ও পরিবারের সদস্যদের সাহায্য নিয়ে মেক্সিকোতে নিখোঁজ হওয়া মানুষদের ওপর অনুসন্ধান চালিয়েছিলেন মার্সেলা তুরাতি ও তাঁর দল। এই লেখায় তিনি সেই অনুসন্ধান নিয়ে কথা বলেছেন জিআইজেএন-এর সঙ্গে।
মিসিং অ্যান্ড মার্ডারড: দ্য আনসলভড কেসেস অব ইনডিজিনাস ওমেন অ্যান্ড গার্লস (২০১৭-১৮)। সিবিসি নিউজের এই পুরস্কারজয়ী পডকাস্টে উন্মোচিত হয়েছে, কানাডার আদিবাসী নারীদের ব্যাপকহারে নিখোঁজ হওয়ার ঘটনাগুলো কেন অমীমাংসিত থেকে গেছে।
জোনাস বার্গোস: ট্র্যাপড ইন আ ওয়েব অব লাইভস (২০১৩)। ফিলিপিনো বিদ্রোহী জোনাস বার্গোসকে নিয়ে এই অনুসন্ধানটি করেছেন র‌্যাপলারের গ্লোরিয়া গ্লেন্ডা।
দ্য সার্চ: মিসিং অ্যান্ড মার্ডারড ইনডিজিনাস ওমেন (২০১৯)। মার্কিন যুক্তরাষ্ট্রে আদিবাসী নারীদের নিরুদ্দেশ হয়ে যাওয়া নিয়ে এই তথ্যচিত্রটি তৈরি করেছে আল জাজিরা।
দ্য এনফোর্সড ডিসঅ্যাপিয়ারেন্স অব দ্য আয়োজিনাপা স্টুডেন্টস (২০১৭)। ডেটা মাইনিং ও থ্রিডি ইন্টারঅ্যাকটিভ মডেলিং ব্যবহার করে ২০১৪ সালে মেক্সিকোতে নিখোঁজ হয়ে যাওয়া ৪৩ জন শিক্ষার্থীকে নিয়ে অনুসন্ধান করেছে ফরেনসিক আর্কিটেকচার ।
হাউ দ্য ইউএস ট্রিগার্ড এ ম্যাসাকার ইন মেক্সিকো (২০১৭)। মেক্সিকোর আলেন্দে-তে মাদক সংশ্লিষ্ট গণহত্যা ও তার ফলস্বরূপ কয়েকশ মানুষ নিখোঁজ হয়ে যাওয়া নিয়ে এই রিপোর্ট করেছিলেন জিনজার থম্পসন ও আলেক্সান্দ্রা জানিক ভন বারট্রাব।
হোয়াই আর ১০,০০০ মাইগ্রান্ট চিলড্রেন মিসিং ইন ইউরোপ? (২০১৬)। এখানে শিশু পাচার ও হারিয়ে যাওয়া অভিবাসীদের নিয়ে তৈরি ইউরোপোলের পরিসংখ্যান খতিয়ে দেখেছে বিবিসি।
দ্য রুম অব বোনস (২০১৫)। এল সালভাদরে তিন দশকের সামাজিক অস্থিরতা ও সহিংসতার মধ্যে চার মা খুঁজে বেড়াচ্ছেন তাদের সন্তানদের মৃতদেহ। এমন এক পরিস্থিতি নিয়ে নির্মিত হয়েছে এই তথ্যচিত্র।
লস্ট গার্লস অব ইন্দোনেশিয়া অ্যামং ৬১,০০০ ডেড অ্যান্ড মিসিং মাইগ্র্যান্টস (২০১৮)। এই প্রতিবেদনে উঠে এসেছে ইন্দোনেশিয়ার সেসব মেয়েদের কথা, যাদের বিদেশে চাকরি দেবার লোভ দেখিয়ে ঘরছাড়া করা হয়েছে এবং আর কখনো দেখা যায়নি।

দরকারি গাইড ও সংগঠন
ইন্টারন্যাশনাল কমিশন অন মিসিং পিপল (আইসিএমপি) বিশেষভাবে নজর দেয় নিখোঁজ ব্যক্তিদের মামলাগুলোর দিকে। এই বিষয় সংশ্লিষ্ট আন্তর্জাতিক আইনকানুন সম্পর্কে তাদের ভালো দখল আছে।

অফিস অব দ্য ইউনাইটেড নেশনস হাই কমিশনার ফর হিউম্যান রাইটস (ওএইচসিএইচআর) কাজ করে অভিবাসী ও অপরাধের শিকার ব্যক্তিদের সাথে হওয়া মানবাধিকার লঙ্ঘন নিয়ে। গুম বা অপহরণের শিকার হয়ে যারা হারিয়ে গেছেন, তাদের জন্য একটি কমিটিও আছে এই প্রতিষ্ঠানের।
অভিবাসন প্রক্রিয়ার মধ্যে থাকা শরণার্থী ও আশ্রয়প্রার্থীদের কেউ মারা গেছে কিনা বা নিখোঁজ হয়েছে কিনা, তার খবর রাখছে ইন্টারন্যাশনাল অর্গানাইজেশন ফর মাইগ্রেশন (আইওএম)-এর দ্য মিসিং প্রজেক্ট।
অ্যামনেস্টি ইন্টারন্যাশনালও বলপূর্বক নিখোঁজ বা গুম হওয়া ব্যক্তিদের ঘটনা নিয়ে কাজ করে।
রিপোর্টার্স উইদাউট বর্ডার্স জার্নালিস্টস গাইড টু অর্গানাইজড ক্রাইম। এই গাইড থেকে জানা যাবে, সংঘবদ্ধ অপরাধী চক্র কিভাবে সাংবাদিকদের কাজ বাধাগ্রস্ত করতে পারে।
অর্গানাইজড ক্রাইম অ্যান্ড করাপশন রিপোর্টিং প্রজেক্ট (ওসিসিআরপি) নিখোঁজ সাংবাদিকদের নিয়ে বেশ কিছু অনুসন্ধান ও রিপোর্ট করেছে।
কমিটি টু প্রটেক্ট জার্নালিস্টস (সিপিজে) নিখোঁজ সাংবাদিকদের নিয়ে প্রকাশিত সব প্রতিবেদন এক জায়গায় সংরক্ষণ করে। এবং তাদের এই বিষয়ে তাদের একটি ডেটাবেজও আছে।
মেক্সিকোতে, ডেটা ব্যবহার করে গণকবর খুঁজে পাওয়ার ক্ষেত্রে সহায়তা করেছে হিউম্যান রাইটস ডেটা অ্যানালাইসিস গ্রুপ (এইচআরডিএজি)। তারা গুম বা অপহরণের কারণে নিখোঁজ হওয়া ব্যক্তিদের নিয়ে অনুসন্ধান করে এবং নির্দিষ্ট দেশ ধরে ধরে প্রতিবেদন প্রকাশ করে।
আর্জেন্টাইন ফরেনসিক অ্যানথ্রোপোলজিস্টস টিম (ইএএএফ), নিখোঁজ ব্যক্তিদের সনাক্ত ও খুঁজে বের করতে বিজ্ঞান-ভিত্তিক ফরেনসিক কৌশল ব্যবহার করে।
ইন্টারন্যাশনাল কমিটি অব দ্য রেড ক্রস (আইসিআরসি) বিশ্বজুড়ে গুম বা নিখোঁজ হওয়ার ঘটনার দিকেও নিবিড় নজর রাখে।

রিপোর্টিং টিপস
এলাকাটি সম্পর্কে জানুন
কোনো নির্দিষ্ট কেস নিয়ে কাজ করার সময়, সেই এলাকা সম্পর্কে ভালোমতো জেনে নেওয়া জরুরি। এতে করে আপনি কাজের ঝুঁকি সম্পর্কে ধারণা নিতে পারবেন। একই সঙ্গে বুঝতে পারবেন: সেখানে কী ধরনের সংগঠিত অপরাধী চক্র সক্রিয় আছে এবং কারা জড়িত থাকতে পারে। একই ধরনের ঘটনা আগেও ঘটলে, সেই মামলাগুলো থেকে আপনার অনুসন্ধান শুরু করতে পারেন।  সেই এলাকায় আগে কাজ করেছে, এমন বিশেষজ্ঞদের সাথে কথা বলুন। স্থানীয় সংবাদমাধ্যমে খোঁজাখুঁজি করুন এবং সেখানকার অপরাধ জগতের কর্মকাণ্ড বোঝার চেষ্টা করুন।

বিশ্বস্ত কোনো সূত্রের সঙ্গে যোগাযোগ না করে ঝুঁকিপূর্ণ স্থানে যাবেন না। এবং প্রয়োজন হলে কিভাবে দ্রুত সেই এলাকা ছেড়ে যাবেন, তার একটি বাস্তবসম্মত পরিকল্পনা তৈরি রাখুন।

নিরাপদ থাকা ও রাখা
সংঘবদ্ধ অপরাধী চক্র নিয়ে অনুসন্ধান শুরুর সময়, আপনার নিজের ও সূত্রদের নিরাপত্তার দিকে সবচে বেশি গুরুত্ব দেওয়া উচিৎ। এজন্য আপনার প্রয়োজন হবে একটি শক্তিশালী নিরাপত্তা পরিকল্পনা। প্রথমত, আপনাকে ঠিক করতে হবে: আপনি কী ধরনের অনুসন্ধান করতে চান, এবং আপনিই এই নির্দিষ্ট অনুসন্ধানটি করার জন্য সঠিক সাংবাদিক কিনা।

এরপর, আপনাকে সিদ্ধান্ত নিতে হবে: আপনি কিভাবে নিরাপদে তথ্য সংরক্ষণ করবেন এবং আপনার দল ও সাক্ষাৎকারদাতাদের সাথে যোগাযোগ করবেন। আপনার কম্পিউটার বা ফোনে সংবেদনশীল কোনো তথ্য নিয়ে চলাচল করবেন না। কোথাও যাওয়ার সময় অবশ্যই নিশ্চিত করতে হবে: আপনি কোথায় যাচ্ছেন, তা যেন আপনার দলের অন্য সদস্যরা জানে। কোনো বিপদের মুখে পড়লে কিভাবে তাদের সতর্ক সংকেত দেবেন, তাও আগে থেকে ঠিক করে রাখুন।

অনুসন্ধান প্রকাশিত হওয়ার পর সোর্সদের সঙ্গে নিয়মিত যোগাযোগ রাখাটা খুব গুরুত্বপূর্ণ। কারণ, তারা হয়তো আপনার এই কাজের জন্য ঝুঁকিতে পড়তে পারে। তাদেরকে হামলার লক্ষ্য বানানো হতে পারে। বিষয়-সংশ্লিষ্ট সংগঠনগুলোর (যেমন: কোনো এনজিও) সাথে জোট বেঁধে কাজ করলে আপনার সূত্রের সুরক্ষা নিশ্চিত করা সহজ হতে পারে। তখন আপনিও সিদ্ধান্ত নিতে পারবেন, কখন প্রতিবেদনটি প্রকাশ করলে ভালো হয়। সাধারণভাবে, আপনার প্রতিবেদনে সূত্রের এমন কোনো ব্যক্তিগত তথ্য রাখবেন না, যাতে করে তিনি বা তাঁর স্বজনেরা ঝুঁকির মুখে পড়তে পারেন। বিশেষভাবে, এমন ছবি ও ভিডিও-র ব্যাপারে সতর্ক থাকুন, যেখান থেকে বোঝা যেতে পারে: কারা আপনার সূত্র এবং তারা কোথায় আছে। সাক্ষাৎকারদাতা কেমন পোশাক পরে ছিলেন, সেখান থেকেও তার পরিচয় সম্পর্কে ধারণা মিলতে পারে। আরো তথ্য লুকিয়ে থাকতে পারে আপনার ছবির মেটাডেটায়।
তথ্য দেবে কারা
অন্য যে কোনো অনুসন্ধানের মতো, এখানেও আপনাকে শুরু করতে হবে সূত্র চিহ্নিত করা ও গড়ে তোলা দিয়ে। কী ঘটেছিল – এই প্রশ্নকে সামনে রেখে যাবতীয় তথ্য সবার আগে একজায়গায় করুন। তারপর আপনার কাজ শুরু করুন। বেশ কয়েকটি জায়গা থেকে আপনি প্রাথমিক তথ্য পেতে পারেন:

সংবাদমাধ্যমের প্রতিবেদন
আদালতের নথিপত্র
তথ্য অধিকার আইনের আবেদন
প্রত্যক্ষদর্শী
এনজিও
আইনজীবী
পুলিশ
নিখোঁজ ব্যক্তির বন্ধুবান্ধব ও পরিবার

বেশিরভাগ ক্ষেত্রে, নিখোঁজ ব্যক্তির পরিবারের সদস্যদের কাছে স্থানীয় অপরাধ কর্মকাণ্ড সম্পর্কে তথ্য থাকে। হয়তো দেখবেন, সেই এলাকায় অপরাধী চক্রগুলো কিভাবে কাজ করে, সে সম্পর্কেও তাদের জানাশোনা আছে। আবার কখনো কখনো নিখোঁজ ব্যক্তিকে রক্ষা করার জন্য তার প্রিয়জনেরা অনেক তথ্য বাদ দেয় বা গোপন করে। সব খুঁটিনাটিই সাংবাদিকদের বিবেচনা করতে হবে গুরুত্বের সাথে। গুম বা অপহরণের শিকার ব্যক্তিদের আত্মীয়স্বজন ও ঘনিষ্ট বন্ধুরা অবশ্যই গুরুত্বপূর্ণ সূত্র হিসেবে কাজ করবে। তবে তাদের দেওয়া সেই তথ্যগুলো আপনাকে যাচাই করে নিতে হবে বিশ্লেষণী দৃষ্টি দিয়ে।

অন্যান্য স্থানীয় সূত্র

আপনার অনুসন্ধানের এলাকা ছেড়ে অন্য কোথাও চলে গেছে, এমন ব্যক্তিরা হয়তো আরো বেশি খোলামেলা কথা বলতে আগ্রহী হবে। কারণ তাদের ঝুঁকি তুলনামূলক কম। এমন সূত্র ও তথ্যদাতাদের একটি ম্যাপ তৈরি করে নিলে আপনার সুবিধা হতে পারে। কারাগারের বন্দীরাও আপনার গুরুত্বপূর্ণ সূত্র হতে পারে। কারণ, অপরাধী চক্রের সাথে প্রত্যক্ষভাবে কাজ করার অভিজ্ঞতা তাদের আছে। তবে তাদের কাছ থেকে পাওয়া প্রতিটি তথ্য সবসময় ক্রসচেক করে নেওয়া উচিৎ।

সোশ্যাল মিডিয়া

ঘটনার সঙ্গে সম্পর্কিত (নিখোঁজ বা সন্দেহভাজন ব্যক্তি) মানুষদের কর্মকাণ্ড নজরে রাখার ক্ষেত্রে সোশ্যাল মিডিয়া থেকে প্রায়ই অনেক সহায়তা পেতে পারেন। এখান থেকে আপনি সেই অঞ্চলের অপরাধী কর্মকাণ্ড সম্পর্কেও অনেক প্রাসঙ্গিক তথ্য পেতে পারেন। মাঠপর্যায়ের সূত্রদের কাছ থেকে সংগ্রহ করা তথ্য যাচাই করে নেওয়ারও একটি ভালো মাধ্যম সোশ্যাল মিডিয়া।

সূত্র খুঁজবেন কোথায়
কিছু ক্ষেত্রে, নিখোঁজ ব্যক্তিরা তাদের সোশ্যাল নেটওয়ার্কে অনেক গুরুত্বপূর্ণ ইঙ্গিত বা সূত্র রেখে যায়। পরিবার ও বন্ধুবান্ধবদের মধ্যে তারা শেষ কার সঙ্গে কথা বলেছে, তা খুঁজে বের করার মাধ্যমে আপনি আপনার কাজ শুরু করতে পারেন, বিশেষভাবে আধুনিক দাসপ্রথা ও মানবপাচারের ঘটনাগুলোর ক্ষেত্রে।

আপনি যদি নিখোঁজ ব্যক্তির সেলফোন বা অন্য কোনো মোবাইল ডিভাইস ট্র্যাক করতে পারেন, তাহলে তার অবস্থান সম্পর্কে অনেক মূল্যবান তথ্য পাবেন। ব্যাংক অ্যাকাউন্ট বা সোশ্যাল মিডিয়া অ্যাকাউন্টের তথ্য থেকেও বেরিয়ে আসতে পারে যে: নিখোঁজ ব্যক্তিটি কোথায় আছেন বা তাদের ভাগ্যে কী ঘটেছে।

আরো তথ্য পাওয়ার জন্য এবং নতুন সূত্রদের আকৃষ্ট করার জন্য, আপনি প্রাথমিক কিছু তথ্য দিয়েও একটি প্রতিবেদন প্রকাশ করতে পারেন। কিন্তু এও মাথায় রাখবেন: এমন প্রতিবেদন বাড়তি ঝুঁকিও তৈরি করবে।
সাক্ষ্য-প্রমাণ বিশ্লেষণ
কখনো কখনো আপনার অনুসন্ধান চলার সময়ই কর্তৃপক্ষ বা অন্য কোনো গ্রুপ একটি মৃতদেহ খুঁজে পেতে পারে। আপনি যে নিখোঁজ ব্যক্তিকে নিয়ে অনুসন্ধান করছেন, মৃতদেহটি তারই কিনা, তা যাচাই করে দেখা খুবই গুরুত্বপূর্ণ। যদি লাশের গায়ে থাকা জামাকাপড় বা ট্যাটুর বর্ণনা মিলে যায়, বা তার সাথে সঠিক সনাক্তকরণ কাগজপত্র পাওয়া যায়, তারপরও আপনার সেটি ভালোমতো যাচাই করা উচিৎ। কারণ, দুজন মানুষের মধ্যে একই রকম শারীরিক বৈশিষ্ট্য থাকতে পারে বা তাদের জামাকাপড় ও সনাক্তকরণ কাগজপত্র বদলে দেওয়া হতে পারে। আদর্শ পদ্ধতি হলো: প্রতিবেদন প্রকাশের আগে আপনি ফরেনসিক ভেরিফিকেশন করিয়ে নেবেন।

অনেক দেশেই, পুলিশ খুব বিশদভাবে তদন্ত করে না এবং তাদের বাজেট, সক্ষমতা বা ইচ্ছার ঘাটতি থাকে। তাদের কাছে প্রায়শই কোনো ডিএনএ ল্যাব বা জটিল মামলা নিয়ে কাজ করার মতো পর্যাপ্ত প্রশিক্ষণ থাকে না। এমন জায়গায় তদন্তের ফলাফল বাইরের কোনো বিশেষজ্ঞকে দিয়ে যাচাই করে নেয়ার চেষ্টা করুন।

রাষ্ট্রপক্ষের আইনজীবী বা সরকারি তদন্তকারীদের কাছ থেকে যেসব ফরেনসিক প্রমাণ ও বিশ্লেষণ পাবেন, সেগুলোর ব্যাপারে সংশয়ী থাকুন। এখানে কোনো স্বার্থের সংঘাত বা দুর্নীতির সংযোগ থাকতে পারে, যা হয়তো ফলাফলকে প্রভাবিত করেছে।
কর্তৃপক্ষের সঙ্গে কাজ
কিছু ক্ষেত্রে, সাংবাদিকদের সতর্ক থাকতে হবে কর্তৃপক্ষের ব্যাপারেও। মাথায় রাখতে হবে যে, তাদেরও অপরাধীদের সঙ্গে সংযোগ থাকতে পারে। ঘটনা আসলেও এমন কিনা, তা জানার সর্বোচ্চ চেষ্টা করুন, এবং অন্য যে কোনো সূত্রের মতো তাদের কথাগুলোও যাচাই করে নিন। তথ্য অধিকার আইনে আবেদন করেও আপনি সহায়ক নথিপত্র পেতে পারেন।

তবে কিছু ক্ষেত্রে, কর্তৃপক্ষকে সহায়ক ভূমিকাতেও দেখা যায়। সেসব ক্ষেত্রে, এমন কোনো তথ্য প্রকাশের ব্যাপারে সতর্ক থাকুন যার কারণে তাদের অনুসন্ধান বাধাগ্রস্ত হতে পারে বা নিখোঁজ ব্যক্তিকে খুঁজে পাওয়া কঠিন হয়ে যেতে পারে।

মানসিকভাবে বিপর্যস্তদের নিয়ে কাজ
এ ধরনের অনেক প্রতিবেদনের কেন্দ্রে থাকে স্বজন হারানোর কষ্ট। তাই আপনাকে অবশ্যই সংবেদনশীল হতে হবে। নিখোঁজ ব্যক্তির পরিবার বা প্রিয়জনের সঙ্গে কথা বলার সময় ভাষার ব্যবহার নিয়ে সতর্ক থাকুন। যদি কোনো পরিবার বিশ্বাস করে, হারানো ব্যক্তিটি এখনো জীবিত – তাহলে তাদের সাথে “অতীতকাল সূচক ভাষায়” তা কথা বলবেন না।

পরিবারের সদস্যদের সঙ্গে সম্পর্ক স্থাপনের জন্য সততা ও স্বচ্ছতা থাকা জরুরি। কথা বলার আগেই পরিবারের সদস্যদের জানিয়ে দেওয়া উচিত, সাংবাদিক হিসেবে আপনি একই বিষয় নিয়ে অন্য কোনো সোর্স – যেমন অপরাধী চক্রের সদস্য বা এমন কারো সঙ্গে কথা বলেছেন কিনা। এতে সেই পরিবারটি বুঝতে পারবে, আগামীতে কী হতে পারে। তবে যাচাই করা হয়নি, এমন কোনো তথ্য তাদের সঙ্গে শেয়ার করবেন না। তাদের কোনো মিথ্যা আশা দেবেন না।

আগে সংঘবদ্ধ অপরাধের শিকার হয়েছেন, এমন কোনো মানুষের সঙ্গে যোগাযোগের সময় খুবই স্পষ্টভাবে বলুন: আপনি কে এবং কী করছেন। আপনার সঙ্গে কথা বলতে গিয়ে সেই ব্যক্তির নতুনভাবে ট্রমার শিকার হওয়ার ঝুঁকিও থাকে। এবং সবচে খারাপ পরিস্থিতিতে, তারা হয়তো ভয় পেয়ে আবার লুকিয়ে যেতে পারেন। সোর্সরা যেন বিপদে না পড়েন, সেজন্য সর্বোচ্চ চেষ্টা করুন।

সাংবাদিক হিসেবে আপনার সীমাবদ্ধতার কথা খেয়াল রাখুন। এবং রাখতে পারবেন না, এমন কোনো ওয়াদা করবেন না। কিভাবে কোনো ভিকটিমের সাক্ষাৎকার নেবেন, তা আগে থেকেই ভেবে নেওয়াটা জরুরি। কিভাবে এমন ভিকটিম ও সারভাইভারদের সঙ্গে কাজ করতে হয়, তা নিয়ে গুরুত্বপূর্ণ কিছু পরামর্শ পাবেন ডার্ট সেন্টারের এই টিপশিটে। আরো পড়ুন: ভুক্তভোগী ও বেঁচে ফেরাদের সাক্ষাৎকার নেওয়ার ক্ষেত্রে মেক্সিকান সাংবাদিক মার্সেলা তুরাতির পরামর্শ।
নিজের যত্ন
নিখোঁজ খোঁজ করার কাজটা হয়ে উঠতে পারে ক্লান্তিকর, হতাশাজনক ও ঝুঁকিপূর্ণ। কিছু ক্ষেত্রে, গণকবরে গিয়েও খোঁজাখুঁজি করতে হতে পারে সাংবাদিকদের, দেখতে হতে পারে বিভৎস সব দৃশ্য। অথবা এমন কোনো ভিকটিমের সঙ্গে কাজ করতে হতে পারে, যার ওপর চালানো হয়েছে ভয়াবহ শারীরিক বা মানসিক নির্যাতন।

এই ঘটনাগুলো প্রচণ্ড মানসিক চাপ তৈরি করতে পারে। আপনি যদি খুব শক্ত মনেরও হন, তবু ট্রমা কাটিয়ে উঠতে বাইরের কারো সহায়তা দরকার হতে পারে। সহকর্মী, বন্ধু ও ভালো থেরাপিস্টের সাপোর্ট নেটওয়ার্ক তৈরির মাধ্যমে, আপনি এমন কাজের জন্য নিজেকে আগেভাগেই তৈরি রাখতে পারেন।

গাইডটি তৈরি করেছেন জিআইজেএন-এর সম্পাদনা সহযোগী হানা কুগানস। তিনি সিটি ইউনিভার্সিটি থেকে অনুসন্ধানী সাংবাদিকতায় স্নাতকোত্তর ডিগ্রী নিয়েছেন। হংকংয়ে, গবেষক হিসেবে কাজ করেছেন বন্যপ্রাণী পাচার সংক্রান্ত অপরাধ নিয়ে। কাজ করেছেন যুক্তরাজ্যের চ্যানেল ফোর-এর বিভিন্ন প্রোগ্রামের জন্যও। বর্তমানে তিনি আছেন লন্ডনে।

এই গাইডটিতে অবদান রাখার জন্য মার্সেলা তুরাতিকে বিশেষ ধন্যবাদ। তুরাতি একজন ফ্রিল্যান্স অনুসন্ধানী সাংবাদিক, যিনি নিখোঁজ মানুষ, বলপূর্বক গুম, অভিবাসীদের গণহত্যা, গণকবর এবং সহিংসতার ঘটনা অনুসন্ধানের জন্য বিখ্যাত।

এই গাইডটি প্রকাশিত হয়  ২০২০ সালের সেপ্টেম্বরে এবং আরো কিছু রিসোর্স যোগ করে ডিসেম্বর ২০২০ এ  হালনাগাদ করা হয়।