Simon Allison (left) and Christine Mungai of The Continent, speaking at a panel on covering investigations with a personal connection at a panel at AIJC25
Simon Allison (left) and Christine Mungai of The Continent, speaking at a panel on covering investigations with a personal connection at a panel at AIJC25

Image: Courtesy of AIJC

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व्यक्तिगत संबंधों को प्रभावित करने वाली खोजी ख़बरें कैसे करें?

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सच की तलाश में पत्रकारों को सरकार, बड़ी कंपनियों, ताकतवर लोगों और घोटालेबाजों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जब मामला अपने दोस्तों और सहकर्मियों से जुड़ा हो, तो वे हमेशा इतने निडर नहीं होते। यह बात पैन-अफ्रीकन अखबार ‘द कॉन्टिनेंट’ के सह-संस्थापक साइमन एलिसन ने कही।

उन्होंने बताया कि कई पत्रकार ऐसे संस्थान तथा लोगों की जांच करने से डरते हैं, जो उनके बेहद करीब हों। ऐसी खबरें करना मुश्किल और बेहद व्यक्तिगत होता है। इनके लिए एक अलग तरह के साहस की ज़रूरत होती है।

नवंबर 2025 में इककीसवें अफ्रीकन इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज़्म कॉन्फ्रेंस (AIJC) का आयोजन हुआ। इसमें एक सत्र था- ‘द कॉल इज़ कमिंग फ्रॉम इनसाइड द हाउस : रिपोर्टिंग टू क्लोज टू होम।’ साइमन एलिसन तथा उनकी सहयोगी क्रिस्टीन मुंगाई (न्यूज़ एडिटर, द कॉन्टिनेंट) ने इसमें महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

यह सत्र उन पत्रकारों के लिए था, जो किसी कहानी के बहुत करीब महसूस करते हैं, लेकिन उसे आगे नहीं बढ़ा पाते। उन्हें यह संदेह होता है कि अपने व्यक्तिगत संबंधों के कारण ऐसी खबर के लिए वह सही व्यक्ति हैं, अथवा नहीं।

दोनों वक्ताओं ने इस पर रिपोर्टिंग करने की भावनात्मक, नैतिक और प्रोफेशनल चुनौतियों पर बात की। उन्होंने ऐसी खबरों के उदाहरण दिए, जो उनके द्वारा संपादित या खुद लिखी गई थीं। उन्होंने ऐसी जांच के भी उदाहरण दिए, जिन्हें बीच में छोड़ना पड़ा।

खुद को कहानी असाइन करें

क्रिस्टीन मुंगाई ने जुलाई 2025 में अफ्रीका अनसेंसर्ड के साथ एक इन्वेस्टिगेटिव सीरीज़ प्रकाशित की थी। इसका शीर्षक था- ‘द टीचर एंड द सिस्टम’ । यह उनके एक पूर्व टीचर पर आधारित थी। क्रिस्टीन मुंगाई की ज़िंदगी में वह टीचर कभी एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व थे। वह उनका बहुत सम्मान करती थीं। वह बाइबिल का प्रचार करते थे। वह उनके एलायंस गर्ल्स हाई स्कूल में क्रिश्चियन यूनियन की मीटिंग करते थे। यह केन्या में लड़कियों का प्रमुख सेकेंडरी स्कूल है।

क्रिस्टीन मुंगाई (न्यूज़ एडिटर, द कॉन्टिनेंट)। इमेज : स्क्रीनशॉट, लिंक्डइन

स्कूल से निकलने के बाद भी क्रिस्टीन मुंगाई अपने पूर्व टीचर के संपर्क में थीं। 19 साल की उम्र में उन्हें 31 साल की एक स्कूल स्टाफ के साथ यौन उत्पीड़न की जानकारी मिली। यह जानकार वह हैरान थीं। लेकिन जैसा कि उन्होंने अपनी कहानी में लिखा, “तब मेरे पास यह समझने के लिए शब्द नहीं थे कि क्या हुआ था।”

12 सालों तक उस स्कूल स्टाफ ने अपने साथ उत्पीड़न की बात छुपाए रखी। लेकिन 2018 में उसे पता चला कि वह अकेली नहीं है। उसने एक लेख में लिखा- “उससे सब कुछ बदल गया। जब मैंने उनकी कहानी सुनी, मेरी कहानी सच हो गई।” उस निर्णायक क्षण पल ने उसे अपने पुराने टीचर की जांच शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

अक्सर कहा जाता है कि जब पत्रकार का किसी कहानी से करीबी रिश्ता होता है, तो किसी व्यक्ति या संस्था से उसका व्यक्तिगत संबंध उसकी निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, क्रिस्टीन मुंगाई का नज़रिया अलग था। उन्होंने खुद को इस खबर की जिम्मेवारी सौंपी। जबकि आमतौर पर पत्रकारों को उनके संपादक किसी खबर की दायित्व देते हैं। उनका अनुभव कहानी का मुख्य हिस्सा था। क्रिस्टीन मुंगाई ने इसे एक पत्रकार के तौर पर लिया क्योंकि वह चुप्पी तोड़ने के लिए दृढ़ थीं। इस कहानी के करीब होने की वजह से उसे ऐसी जानकारी भी मिली जो बाहरी लोगों को नहीं मिल सकती थी।

कई वर्षों तक उनकी एलुमनाई मिटिंग और सोशल मीडिया पर यौन दुराचार की फुसफुसाहटें फैलती रहीं। लेकिन जवाबदेही तय नहीं हो पाई थी। क्रिस्टीन मुंगाई ने AIJC के श्रोताओं से कहा- “मैं बस सच सामने लाना चाहती थी। मैं उस कहानी को अफवाहों और इशारों के दायरे से बाहर निकालकर इतिहास में दर्ज करना चाहती थी।”

यातनादायक प्रक्रिया

साइमन एलिसन ने क्रिस्टीन मुंगाई से पूछा कि अपनी ही ज़िंदगी के पिछले हिस्से से जुड़ी कहानी पर काम करना मानसिक रूप से कैसा लगा। उन्होंने जवाब दिया, “यह एक तरह की आत्मिक पीड़ा थी। यह यातना जैसा लगा।”

चार सालों तक क्रिस्टीन मुंगाई ने अपनी जांच के लिए गवाहियों को रिकॉर्ड किया। सबूतों को फिर से बनाने के लिए दोस्तों, सहकर्मियों और पुराने स्टूडेंट्स से संपर्क किया।

उन्होंने कहा कि स्कूल से उनका जुड़ाव एक भावनात्मक मुश्किल भी लाया। मैं उस समुदाय का हिस्सा थी और अब भी हूं। इस स्कूल में पढ़ने पर मुझे गर्व था। वह हरेक री-यूनियन में शामिल होती थीं। व्हाट़सअप ग्रुप्स में हिस्सा लेती थीं और स्कूल की भावना को पूरी तरह से जीती थीं। फिर उन्हें एक अलग एहसास हुआ। उन्होंने कहा- “मुझे लगता है कि हममें से बहुतों को बड़ा होने की ज़रूरत थी। जो कुछ भी हमने देखा था, उन चीज़ों को शब्दों में बयां कर सकने लायक ऐसी भाषा और फ्रेमिंग की तलाश थी।“

पुख्ता सबूत न हों, तो क्या करें

क्रिस्टीन मुंगाई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अन्य स्टूडेंट्स की कहानियों की पुष्टि करना था, जिनके साथ गलत व्यवहार हुआ था। प्रारंभ में उनके पास कोई डॉक्यूमेंट्री, फिजिकल या डिजिटल सबूत नहीं थे। सिर्फ़ कुछ पुराने स्टूडेंट्स की यादें थीं, जो अपने साथ हुई घटनाओं पर बात करने को तैयार थे। दो पूर्व स्टूडेंट्स ने उन्हें बताया कि स्कूल में उस टीचर ने उनके साथ बिना सहमति के शारीरिक संबंध बनाए थे। एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि ग्रेजुएशन के कुछ दिनों बाद उस टीचर ने बिना सहमति के उसका चुंबन लिया था। दो अन्य स्टूडेंट्स ने अपने पूर्व टीचर के साथ रिश्तों के बारे में बताया जो बाद में यौन संबंधों में बदल गए थे।

क्रिस्टीन मुंगाई अपनी एक मेंटर को क्रेडिट देती हैं। उन्होंने हर बात को किसी अन्य की गवाही से पुष्टि करने की सलाह दी थी। कहानी के दूसरे हिस्से के लिए क्रिस्टीन मुंगाई एक ऐसे स्रोत से मिलीं, जो बहुत अच्छी तरह से रिकॉर्ड रखता था।

विरोध झेलने को तैयार रहें

साइमन एलिसन और क्रिस्टीन मुंगाई दोनों को ऐसी खबरों के दौरान कानूनी धमकियां और सेंसरशिप का सामना करना पड़ा है। इस खबर को प्रकाशित करने से पहले क्रिस्टीन मुंगाई पर पब्लिक पार्टिसिपेशन के खिलाफ एक स्ट्रेटेजिक लॉ सूट किया गया। ऐसे मुकदमे का इस्तेमाल पत्रकारों को चुप कराने के लिए किया जाता है। क्रिस्टीन मुंगाई को जब मुकदमे का नोटिस मिला तो उन्हें लगा  जैसे वह पागल हो जाएंगी।

क्रिस्टीन मुंगाई ने जब टीचर को जवाब देने का अनुरोध भेजा, तो बदले में उन्हीं को कानूनी नोटिस मिल गया। उनके सवालों का जवाब देने के बजाय टीचर ने कोर्ट जाकर खबर प्रकाशित करने पर रोक लगवा दी। हालांकि कुछ महीनों बाद यह रोक हटा दी गई। कोर्ट ने कहानी को विश्वसनीय पाया और जनहित में इसके प्रकाशन की अनुमति दी। इस कहानी में टीचर पर दो दशक से भी ज़्यादा समय तक यौन दुराचार, ग्रूमिंग और उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था।

क्रिस्टीन मुंगाई को खबर प्रकाशित होने के बाद तीखे विरोध की उम्मीद थी। लेकिन इसके बजाय स्कूल के पूर्व छात्रों और आम जनता से व्यापक समर्थन मिला। इसका श्रेय इस खबर के लिए लंबी और पूरी जांच को जाता है। यह खबर दो हिस्सों में छपी। पहला हिस्सा 17,000 शब्दों का था। फॉलो-अप वाला दूसरा हिस्सा 8,000 शब्दों का था।

टीचर ने स्टूडेंट्स के साथ किसी भी आपत्तिजनक, या भावनात्मक तौर पर उलझाने वाली बातचीत या यौन संबंध के आरोपों से इनकार किया। लेकिन स्कूल बोर्ड ने खबर में लगाए गए आरोपों के आधार पर तत्काल कठोर कार्रवाई का वादा किया। जनता के दबाव के कारण टीचर ने ‘झूठे’ आरोपों से जुड़े साइबर बुलिंग का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया।

भरोसा ज़रूरी है

कभी-कभी, जिस व्यक्ति की हमें जांच करनी है, वह हमारा करीबी होता है। साइमन एलिसन ने एक रिपोर्टर से जुड़ी एक जटिल खबर का उदाहरण दिया। उस पत्रकार ने कैंसर का मरीज़ होने का ढोंग रचते हुए अपना सिर मुंडवा लिया था। उसने एक साल से ज़्यादा समय तक अपने संस्थान और जनता से सहानुभूति बटोरी थी। दिलचस्प बात है कि वह पत्रकार खोजी पत्रकारिता में नैतिकता पर भाषण देता था।

साइमन एलिसन ने कहा- “मैं यह कहानी नहीं करना चाहता था। यह बहुत पर्सनल लग रही थी। यह ऐसे पत्रकार के बारे में खबर थी, जिसका मैं सम्मान करता था।”

लेकिन उनके तत्कालीन एडिटर ब्यूरेगार्ड ट्रोम्प (AIJC के संयोजक) ने उन्हें यह दायित्व दिया। उन्होंने कहा- ‘तुम्हें ऐसी खबरें करना सीखना होगा। कभी-कभी पावर को जवाबदेह ठहराने का मतलब है, उस पावर को जवाबदेह ठहराना, जिसे तुम अपनी ज़िंदगी में देख सकते हो।’

साइमन एलिसन ने कहा कि यह कहानी बताना ज़रूरी था। इस दौरान उस पत्रकार के पिता ने डराने-धमकाने वाले कॉल किए। वह पिता खुद एक प्रमुख पत्रकार हैं। लेकिन संपादक ने हर कदम पर साथ दिया। आखिरकार, उस पत्रकार ने मान लिया कि उसने बीमारी का नाटक किया था। AIJC ने उस पत्रकार को नैतिकता पर भाषण देने की भूमिका से हटा दिया

AIJC25 में बोलते हुए ‘द कॉन्टिनेंट’ के सह-संस्थापक साइमन एलिसन । इमेज : AIJC के सौजन्य से

दोनों वक्ता इस बात पर सहमत थे कि कोई भी ऐसी कहानी अकेले नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि सपोर्ट ही जीने का एक तरीका है। साइमन एलिसन ने ऐसे साथियों और संपादकों की ज़रूरत बताई, जो पत्रकारों के साथ भावनात्मक बोझ बांट सकें।

सत्र में कुछ पत्रकारों ने चिंता जताई कि कुछ मामलों में मीडिया संस्थान उन्हें अकेला छोड़ देता है। इस पर लेखक और राजनीतिक एक्टिविस्ट नांजला न्याबोला ने कहा कि पत्रकारों के बीच एकजुटता ही सुरक्षा है। ऐसी व्यक्तिगत संबंधों वाली कहानियों में भावनात्मक सुरक्षा मिलना बेहद जरूरी है। यह रिपोर्टिंग स्ट्रक्चर का हिस्सा बन जाती है।

साइमन एलिसन ने सत्र में मौजूद लोगों को पत्रकारिता की सबसे कीमती चीज़ के बारे में बताया। कहा- “पत्रकारिता करने के लिए भरोसे की ज़रूरत होती है। अगर लोग आप पर भरोसा नहीं करते, तो आप यह काम नहीं कर सकते।”

कभी-कभी इसका मतलब होता है ऐसी जगहों पर भी रिपोर्टिंग करना, जिन्हें आप छोड़ देना पसंद करेंगे।


नैपानोई लेपापा – नैरोबी, केन्या की अवॉर्ड-विनिंग फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं। ओपन सोर्स इंटेलिजेंस और सहयोगी ट्रांसबाउंड्री इन्वेस्टिगेशन में विशेषज्ञ। अपनी कहानियों में मानवाधिकार, जेंडर, स्वास्थ्य, टेक्नोलॉजी, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन पर फोकस करती हैं। 2022 में उन्हें केन्या मीडिया काउंसिल ने अपने सालाना जर्नलिज़्म एक्सीलेंस अवॉर्ड्स (AJEA) में केन्या की इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट ऑफ़ द ईयर चुना था। वह 2023 पुलित्ज़र सेंटर एआई अकाउंटेबिलिटी फेलो भी थीं।

अनुवाद : डॉ. विष्णु राजगढ़िया

 

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