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रोहिंग्या शरणार्थी

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विषम क्षेत्रों में स्वतंत्र पत्रकारों के मानसिक स्वास्थ्य का संकट

संघर्ष इलाकों में काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों पर शारीरिक खतरों के बारे में काफी जानकारी मौजूद है। लेकिन उन पर मानसिक असर के बारे में बहुत कम बात की गई है। ऐसी रिपोर्टिंग करने वाले ज़्यादातर स्वतंत्र पत्रकारों को बड़े मीडिया संस्थानों का समर्थन नहीं मिलता है। उन्हें अक्सर काउंसलिंग, बीमा या संपादकीय सहयोग के अभाव के कारण बुरे अनुभवों से गुज़रना पड़ता है। यह उनके मानसिक आघात (ट्रॉमा) का कारण बन सकता है।