भारत की खोजी पत्रकार ऋतु सरीन ने साझा किए चार दशकों के अनुभव
मैं साक्षात्कार के लिए प्रश्नवाचक शैली के बजाय संवादात्मक शैली को प्राथमिकता देती हूं। मुझे 1987 में पूर्व राष्ट्रपति ज़ैल सिंह के साथ अपने एक विशेष साक्षात्कार की याद है। बातचीत में उन्होंने स्वीकार किया कि विपक्ष ने उन्हें तत्कालीन राजीव गांधी सरकार को बर्खास्त करने के लिए भारी रकम की पेशकश की थी। मुझे याद है कि जब उन्होंने यह कहा तो मैंने खामोश रहने का नाटक किया।