स्वास्थ्य और ओषधि पर इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के लिए GIJN की गाइड

यह गाइड दवाओं और चिकित्सा उपकरणों पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य पत्रकारों में स्वतंत्र रूप से सबूतों का आकलन करने और किसी भी उत्पाद या नीति के जोखिम-लाभ अनुपात के सटीक मूल्यांकन की समझ विकसित करना है। जिससे वे किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या कदाचार को उजागर कर सकें। अपने दैनिक कार्यों के बीच अपनी सुविधा के अनुसार इस गाइड का अध्धयन किया जा सकता है।

कोविड-19 संबंधी स्वास्थ्य और चिकित्सा पर GIJN गाइड  

कोविड-19 के दौर में हेल्थ केयर पर रिपोर्टिंग काफी जटिल और चुनौतीपूर्ण हो चुकी है। इस पर रिपोर्टिंग के लिए लंबे-लंबे दस्तावेजों के अध्धयन के साथ ही मेडिकल फील्ड के शब्दजाल से अच्छी तरह से परिचित होना भी बहुत जरूरी है। वहीं, इससे जुड़े आंकड़ों को समझना और उन्हें अपनी खबर का हिस्सा बनाना भी बेहद अहम है। अगर आप तेजी से सीखने में दिलचस्पी रखते है तो खोजी पत्रकारिता की यह विधा वैश्विक, रोमांचक व आकर्षक भी लगेगी।

रिपोर्टर संगठित आर्थिक अपराधों की जांच कैसे करें: एक गाइड।

मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब कोई क्लाइंट इस नेटवर्क में पैसे भेजता है। इसके लिए नकली कागजी कार्रवाई का उपयोग करके कोई वस्तु या सेवा की खरीद या बिक्री दिखाई जाती है। इसके बाद वहां से उन पैसों को किसी अन्य कंपनी के खाते में भेज दिया जाता है। फिर वह धन किसी आफशोर कंपनी या अन्य गंतव्य को भेज दिया जाता है।

पत्रकारों के लिए बहुत उपयोगी है इंटरनेट का यह वेब इंस्पेक्टर !

इस web inspector tool (‘वेब इंस्पेक्टर‘ टूल) का अभी बेहद कम उपयोग किया जा रहा है। जबकि यह किसी वेबसाइट के ‘सोर्स-कोड‘ में छिपी हुई जानकारी का खजाना निकाल सकता है। यह किसी ग्राफिक्स का कच्चा डेटा भी निकाल सकता है। यह उन तस्वीरों और वीडियो को डाउनलोड भी कर सकता है, जिनके बारे में हमें लगता है कि इन्हें ‘सेव‘ नहीं किया जा सकता। ‘वेब इंस्पेक्टर‘ टूल और HTML basics (एचटीएमएल बेसिक्स) की सामान्य समझ हो तो पत्रकार किसी भी वेब-पेज से डेटा स्क्रैप कर सकता है। इसके लिए कंप्यूटर विज्ञान में पारंगत होने की आवश्यकता नहीं है।

GIJN की ग्लोबल गाइड टू फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन: प्रेरणादायक FOI

एफओआई आवेदनों को देखने वाली यूएस की वेबसाइट को मकार्रोक के संस्थापक माइकल मोर्सि ने FOI पर कई तरह के सुझाव  दिए हैं। इससे जुड़ी जानकारी तक पहुंचने और उसके महत्व पर 85 से अधिक उदाहरणों का संग्रह Freedominfo.org पर देख सकते हैं।

फ्रीडम ऑफ इन्फॉर्मेशन पर GIJN की ग्लोबल गाइड: FOI टिप्स एंड ट्रिक्स

पूर्व भारतीय केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने आरटीआई आवेदन को लेकर चार अहम् नियम बताए हैं। शैलेश गांधी का मानना है कि RTI आवेदन करते समय हमें अपनी भावनाओं को उसमें समाहित नहीं करना चाहिए। हम वास्तविक रहें और हमारे आवेदन में किसी तरह का आक्रोश या बदले की भावना नहीं होना चाहिए। हमारे आवेदन का उद्देश्य अधिकारियों को उनकी जिम्मेदारियों का एहसास दिलाना है। हम खुद भ्रष्टाचार और गलतियों को रोकने की कोशिश न करें,  भ्रष्ट अधिकारियों को सजा देना और गलतियां  को करने से रोकने का प्रयास खुद न करें। हमें केवल चाही गई जानकारी पर ही केंद्रित रहना चाहिए। बिना किसी गुस्से या बदले की भावना के आरटीआई अधिनियम 2005 के बेहतर उपयोग पर ध्यान केंद्रित करें।

व्हाट्सअप कैसे ‘ग्लोबल साउथ’ के मीडिया संस्थानों में लोकप्रिय है !

भारत के बाद ब्राजील दूसरा ऐसा देश हैं जहां लोग व्हाट्सएप का सबसे ज्यादा उपयोग करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक ब्राजील में व्हाट्सएप के 99 मिलियन मासिक यूजर हैं। वहीं एक अन्य अनुमान के मुताबिक ब्राजील में व्हाटसएप के 120 मिलियन यूजर हैं। इस वजह से व्हाट्सएप का उपयोग करके कोरियो राष्ट्रीय ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। ब्राजील के अलावा भी देखें तो कई शोध हैं जो यह बताते हैं कि लतिन अमेरिका और अफ्रीका के लोगों द्वारा व्हाट्सएप का अधिक उपयोग किया जाता है। यह छोटे न्यूज रूम को अपनी खबरें लोगों तक पहुंचाने में मदद करता है और नए अवसर देता है।

ट्रोल और ऑनलाइन उत्पीड़न का मुकाबला कैसे करें पत्रकार?

दुुनिया भर में दिख रही प्रवृतियां बताती हैं कि पत्रकारों पर पहले की तुलना में बढ़ते खतरों पर विचार करना जरूरी है। इनमें शारीरिक हिंसा, मानसिक उत्पीड़न, व्यक्तिगत सूचनाओं को उजागर करना, डिजिटल सुरक्षा का उल्लंघन और पत्रकारों की तस्वीरों में हेरफेर करके फर्जीवाड़ा करना शामिल है। ऐसी चीजें पत्रकारों के जीवन को भी खतरे में डालती हैं। इसके कारण उनकी स्वतंत्र अभिव्यक्ति सीमित हो सकती है। यहां तक कि उन्हें मीडिया का पेशा छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। जिस तरह ऑनलाइन जगत में सच पर हमला हो रहा है, वैसे ही पत्रकार भी निशाने पर हैं। इसलिए उन्हें अपनी डिजिटल सुरक्षा के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

विमानों की गोपनीय उड़ानों पर नजर कैसे रखें: GIJN गाइड

हवाई जहाजों की उड़ान के शुरुआती दिनों से लेकर आज भी शौकिया ‘प्लेन स्पॉटर‘ लोगों की अच्छी-खासी संख्या है। ये लोग दूरबीन और कैमरों के साथ हवाई अड्डों के पास जाकर विमान देखने का आनंद लेते हैं। इस दौरान वे विमानों और उनके पहचान चिह्नों (टेल नंबर) की फोटो लेते हैं। कुछ शौकिया लोग तो विमानों की आवाजाही की तारीख और समय का लॉग-बुक भी बनाते हैं। इन्हें ‘एमेच्योर प्लेन स्पॉटर‘ कहा जाता है। सभी विमानों में कुछ खास पहचान चिह्न (टेल नंबर) होते हैं। इसमें कुछ अंक और अक्षर होते हैं। पंजीकरण किस देश में हुआ, इसका कोड भी होता है। इसे विमान के पिछले हिस्से में कम-से-कम बारह इंच ऊंचे अक्षरों में लिखा जाता है ताकि आसानी से दिख जाए।